सलाखों के पीछे की दुनिया देखने का मौका! हैदराबाद का ये म्यूजियम कराएगा जेल लाइफ का एहसास

हैदराबाद में एक अनोखा म्यूजियम शुरू किया गया है जहां आम लोग खुद अनुभव कर सकते हैं कि जेल के अंदर की जिंदगी असल में कैसी होती है.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: 'जेल' शब्द सुनते ही लोगों के मन में डर, सख्ती और ऊंची-ऊंची दीवारों की तस्वीरें उभर आती हैं. लेकिन अब हैदराबाद में एक अनोखा म्यूजियम शुरू किया गया है जहां आम लोग खुद अनुभव कर सकते हैं कि जेल के अंदर की जिंदगी असल में कैसी होती है. फील द जेल (Feel the Jail) नाम का यह खास अनुभव केंद्र आने वालों को न सिर्फ जेल का माहौल दिखाएगा बल्कि कैदियों की जिंदगी उनके सुधार और उनके पुनर्वास की पूरी कहानी भी बताएगा.

हैदराबाद में खुला म्यूजियम 

हैदराबाद के लोग अब जेल के अंदर की जिंदगी को करीब से अनुभव कर सकते हैं. मंगलवार को, तेलंगाना के गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला ने चंचलगुडा सेंट्रल जेल में एक अनोखे फील द जेल अनुभव केंद्र और एक नए जेल म्यूजियम का उद्घाटन किया. यह पहल 'स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन' (SICA) के तहत शुरू की गई है. इसका मकसद लोगों को जेल की जिंदगी की असलियत से रूबरू कराना और भारत की सुधार प्रणाली में लागू किए गए बदलावों और सुधार कार्यक्रमों के बारे में जानकारी देना है.

जेल की कोठरी में असली अनुभव 

गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला ने 'फील द जेल' कार्यक्रम के तहत बनाई गई खास जेल कोठरियों का जायज़ा लिया. यहां आने वाले लोग भले ही कुछ समय के लिए ही सही उस माहौल में पूरी तरह डूब पाएंगे, जिसे कैदी जेल की चारदीवारी के अंदर हर रोज झेलते हैं. सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीरों में इन जेल कमरों की झलक देखी जा सकती है. हर कमरे में एक साधारण चारपाई, स्टील के बर्तन और एक छोटा सा अटैच्ड बाथरूम है जिससे आने वालों को जेल की असल स्थितियों की सही समझ मिल पाती है.

सुधार का केंद्र बनें जेल

इस मौके पर बोलते हुए गवर्नर शिव प्रताप शुक्ला ने कहा कि जेलों को सिर्फ सजा देने की जगह के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि एक प्रगतिशील समाज का लक्ष्य सिर्फ अपराधियों को सजा देना नहीं होना चाहिए बल्कि उन्हें सुधारने और उन्हें एक नई जिंदगी शुरू करने का मौका देने तक भी फैला होना चाहिए.

उन्होंने आगे कहा कि जेलों को ऐसी जगहों में बदलना चाहिए जहां लोग अपने अंदर झांक सकें अपने व्यक्तित्व का विकास कर सकें और एक नई शुरुआत करने की प्रेरणा पा सकें. गवर्नर ने पुराने जमाने की बेड़ियों और जेल कोठरियों को एक कठोर, पुरानी सजा प्रणाली का प्रतीक बताया, जबकि आधुनिक सुधार कार्यक्रमों को एक बदलाव लाने वाला कदम बताया.

जो सजा देने वाली सोच से हटकर सुधार और पुनर्वास पर आधारित सोच की ओर बढ़ रहा है. इसकी कीमत कितनी होगी? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस जेल में रहने के लिए लोगों को 1,000 से 2,000 के बीच खर्च करने पड़ सकते हैं. यदि आप 12 घंटे के लिए जेल में रहना चाहते हैं तो आपको 1,000 देने होंगे. 24 घंटे रुकने के लिए इसकी कीमत 2,000 है.

यह पहल चंचलगुडा में स्थित 'स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ करेक्शनल एडमिनिस्ट्रेशन' (SICA) में शुरू की गई है. उद्घाटन के दौरान राज्यपाल ने उन विशेष जेल कोठरियों का भी निरीक्षण किया, जिन्हें 'फील द जेल' कार्यक्रम के तहत तैयार किया गया है.

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