कर्ज से राहत या नई मुसीबत? आर्थिक संकट में फंसे पाकिस्तान ने चीन से लिया सहारा, पहली बार जारी किया पांडा बॉन्ड

आर्थिक संकट और विदेशी मुद्रा की कमी से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब चीन के घरेलू बाजार में पहला पांडा बॉन्ड जारी किया है. इस कदम से उसे नया फंड मिलने की उम्मीद है, लेकिन कर्ज का दबाव और बढ़ सकता है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: आर्थिक संकट, विदेशी मुद्रा की कमी और लगातार बढ़ते कर्ज के दबाव से जूझ रहे पाकिस्तान ने अब फंड जुटाने के लिए एक नया रास्ता अपनाया है. इस बार पाकिस्तान ने सीधे चीन के घरेलू वित्तीय बाजार में कदम रखा है. पाकिस्तान ने पहली बार “पांडा बॉन्ड” जारी कर चीन के निवेशकों से पैसा जुटाने की शुरुआत की है. 

इसे पाकिस्तान की आर्थिक रणनीति में बड़ा कदम माना जा रहा है, क्योंकि इससे उसे चीनी मुद्रा युआन में फंड हासिल करने का मौका मिलेगा. डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाकिस्तान ने गुरुवार को चीन के घरेलू पूंजी बाजार में अपना पहला पांडा बॉन्ड लॉन्च किया. पाकिस्तान सरकार का कहना है कि इससे देश को नए निवेश और विदेशी मुद्रा संकट से कुछ राहत मिल सकती है.

क्या होता है पांडा बॉन्ड?

पांडा बॉन्ड ऐसा वित्तीय साधन होता है जिसमें कोई विदेशी देश या कंपनी चीन के निवेशकों से चीन की मुद्रा यानी युआन (RMB) में कर्ज लेती है. इस मामले में पाकिस्तान ने तीन साल की अवधि वाला फिक्स ब्याज दर का बॉन्ड जारी किया है. इसका मतलब यह है कि चीन के निवेशक अभी पाकिस्तान को पैसा देंगे और तय समय पूरा होने के बाद पाकिस्तान को वह राशि ब्याज सहित लौटानी होगी. सरल भाषा में समझें तो यह भी एक तरह का कर्ज ही है, लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि यह डॉलर की जगह चीनी मुद्रा में लिया जा रहा है.

पाकिस्तान ने क्यों उठाया यह कदम?

पाकिस्तान लंबे समय से आर्थिक मुश्किलों से जूझ रहा है. विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव लगातार बढ़ रहा है और देश को अपने खर्च चलाने के लिए बाहरी मदद की जरूरत पड़ रही है. ऐसे में चीन के बाजार से युआन में पैसा जुटाना पाकिस्तान के लिए एक वैकल्पिक रास्ता माना जा रहा है. इससे उसे डॉलर पर निर्भरता थोड़ी कम करने में मदद मिल सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान इस कदम के जरिए यह संदेश भी देना चाहता है कि चीन के निवेशकों को उसकी अर्थव्यवस्था पर भरोसा है. हालांकि, यह तभी फायदेमंद साबित होगा जब पाकिस्तान समय पर भुगतान कर सके.

कर्ज का बोझ बढ़ने का भी खतरा

हालांकि इस कदम को पाकिस्तान सरकार उपलब्धि के तौर पर पेश कर रही है, लेकिन आर्थिक जानकार इसे जोखिम भरा दांव भी मान रहे हैं. अगर आने वाले समय में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति और खराब होती है या राजस्व बढ़ाने में सरकार नाकाम रहती है, तो इस नए कर्ज का बोझ और बढ़ सकता है. यानी फिलहाल पाकिस्तान को राहत जरूर मिल सकती है, लेकिन भविष्य में भुगतान की जिम्मेदारी उसके लिए बड़ी चुनौती बन सकती है.

चीन पर बढ़ती जा रही पाकिस्तान की निर्भरता

पिछले कुछ वर्षों में पाकिस्तान लगातार चीन और अन्य देशों से आर्थिक मदद लेता रहा है. हाल ही में पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरोबॉन्ड जारी कर करीब 75 करोड़ डॉलर जुटाए थे. इसके अलावा सऊदी अरब ने भी पाकिस्तान को 3 अरब डॉलर की अतिरिक्त जमा राशि दी थी. संयुक्त अरब अमीरात को पाकिस्तान ने 3.4 अरब डॉलर वापस लौटाए थे, जबकि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) से भी उसे 1.3 अरब डॉलर की सहायता मिली थी. इन घटनाओं से साफ है कि पाकिस्तान लगातार बाहरी फंडिंग के सहारे अपनी अर्थव्यवस्था संभालने की कोशिश कर रहा है.

चीन रवाना हुए पाक वित्त मंत्री

पाकिस्तान के संघीय वित्त और राजस्व मंत्री मोहम्मद औरंगजेब पांडा बॉन्ड जारी होने के समारोह में शामिल होने के लिए चीन पहुंचे थे. इस दौरान दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग और निवेश को लेकर भी चर्चा हुई. माना जा रहा है कि आने वाले समय में पाकिस्तान चीन के साथ वित्तीय साझेदारी को और मजबूत करने की कोशिश करेगा.

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