नई दिल्ली: सोशल मीडिया पर स्क्रॉल करते हुए अचानक सामने आने वाले अजीबोगरीब लेकिन बेहद भावनात्मक वीडियो अब आम हो चुके हैं. कभी रोता हुआ समोसा, तो कभी राजमा-चावल के रिश्ते में दरार, ये सब देखने में भले ही अटपटा लगे, लेकिन यूजर्स इन्हें नजरअंदाज नहीं कर पा रहे हैं.
इन वीडियो की खास बात यह है कि ये बिना खोजे ही आपके सामने आ जाते हैं और कुछ ही सेकंड में आपको अपनी कहानी में उलझा लेते हैं. भले ही इनमें तर्क की कमी हो, लेकिन इनकी नाटकीयता और भावनात्मक अपील लोगों को बांधे रखती है.
आज अगर आप इंस्टाग्राम रील्स या यूट्यूब शॉर्ट्स पर थोड़ा समय बिताते हैं, तो ऐसे वीडियो जरूर दिखते हैं. इनमें फल, सब्जियां या खाने-पीने की चीजें इंसानों की तरह व्यवहार करती हैं- प्यार, धोखा, झगड़े और अकेलेपन की कहानियों के साथ.
यह केवल एक ट्रेंड नहीं, बल्कि "एआई स्लोप" नाम की एक नई शैली है, जिसने सोशल मीडिया फीड्स पर तेजी से कब्जा कर लिया है.
एआई स्लोप का मतलब है कृत्रिम बुद्धिमत्ता की मदद से बड़ी मात्रा में बनाई गई निम्न-गुणवत्ता वाली सामग्री. ये वीडियो, तस्वीरें या टेक्स्ट बहुत कम मेहनत से तैयार होते हैं और इनका मुख्य उद्देश्य सिर्फ ध्यान आकर्षित करना होता है.
पहली नजर में ये कंटेंट आकर्षक लगता है, लेकिन गहराई में यह दोहराव और अजीबोगरीब कथानकों से भरा होता है. इसमें भावनाएं बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई जाती हैं, जिससे दर्शक जल्दी जुड़ जाते हैं.
हाल ही में "फ्रूट लव आइलैंड" जैसे एआई-जनरेटेड शो वायरल हुए, जहां फल डेटिंग शो के कंटेस्टेंट्स की तरह व्यवहार करते हैं. बनानाटो और स्ट्रॉबेरीना जैसे किरदार फ्लर्ट, झगड़े और रिश्तों में उलझते नजर आते हैं.
इससे पहले भी बोलने वाले खाने-पीने के सामान की कहानियां वायरल हो चुकी हैं- जैसे उदास चिकन नगेट, त्यागा गया ब्रोकोली बच्चा या खट्टे फलों की भावनात्मक कहानियां.
भारत में इस ट्रेंड को एक नया रूप मिला है. यहां कहानियां राजमा-चावल के ब्रेकअप, चाय-पारले की शादी और पाव-वड़ा के लव ट्रायंगल तक पहुंच चुकी हैं.
इन कहानियों में भारतीय दर्शकों के लिए भावनात्मक जुड़ाव ज्यादा होता है. यही वजह है कि ये वीडियो खासकर युवाओं के बीच तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं.
भारतीय दर्शक लंबे समय से हाई-ड्रामा कंटेंट के आदी रहे हैं. टीवी सीरियल्स में दिखने वाले रिश्तों के उतार-चढ़ाव, पुनर्जन्म और पारिवारिक राजनीति जैसी चीजें हमेशा आकर्षण का केंद्र रही हैं.
एआई स्लोप इन्हीं तत्वों को छोटे और तेज फॉर्मेट में पेश करता है. साथ ही, ये वीडियो प्यार, धोखा और भावनात्मक संघर्ष जैसी बुनियादी भावनाओं को छूते हैं, जिससे दर्शक तुरंत जुड़ जाते हैं.
इन वीडियो को बनाना बेहद आसान है. किसी बड़े सेट, कलाकार या बजट की जरूरत नहीं होती. यही वजह है कि बड़ी संख्या में लोग इस तरह का कंटेंट बना रहे हैं.
सोशल मीडिया एल्गोरिदम भी इन्हें बढ़ावा देता है. चाहे दर्शक इन्हें पसंद करें या नापसंद, उनकी प्रतिक्रिया ही इन वीडियो को और वायरल बना देती है.
हालांकि यह ट्रेंड मनोरंजक लगता है, लेकिन इसके गंभीर पहलू भी हैं. कई कहानियों में पुराने रूढ़िवादी विचार, लैंगिक भेदभाव और गलत संदेश देखने को मिलते हैं.
कुछ वीडियो में संवेदनशील मुद्दों को भी बिना जिम्मेदारी के दिखाया जाता है, जिससे गलत धारणाएं फैल सकती हैं. इसके अलावा, यह कंटेंट दर्शकों की ध्यान क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है.
एआई स्लोप दर्शकों की सोच से ज्यादा उनकी भावनाओं पर असर डालता है. यह सोचने का मौका नहीं देता, बल्कि तुरंत प्रतिक्रिया देने के लिए उकसाता है.
भारत जैसे देश में, जहां नाटकीय कहानियों का हमेशा से आकर्षण रहा है, वहां इस तरह का कंटेंट तेजी से लोगों को अपनी ओर खींच रहा है. First Updated : Friday, 10 April 2026