नई दिल्ली: विदेशों में रहने वाले भारतीय परिवार अपनी संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक मान्यताओं को जीवित रखने के लिए विशेष प्रयास करते हैं. त्योहारों, पूजा-पाठ, गृहप्रवेश, विवाह और अन्य धार्मिक आयोजनों के दौरान वे भारतीय रीति-रिवाजों का पालन करने की कोशिश करते हैं. हालांकि, इन धार्मिक सेवाओं की कीमत विदेशों में भारत की तुलना में काफी अधिक होती है.
हाल ही में अमेरिका में रहने वाली भारतीय मूल की एक महिला ने सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर चर्चा छेड़ दी. उन्होंने बताया कि अमेरिका में किसी साधारण पूजा, हवन या धार्मिक कथा के आयोजन के लिए भी लोगों को अच्छी-खासी रकम खर्च करनी पड़ती है. जहां भारत में ऐसे कार्यक्रम अपेक्षाकृत कम लागत में संपन्न हो जाते हैं, वहीं अमेरिका में यही सेवाएं कई गुना महंगी पड़ सकती हैं.
उनके अनुसार, अमेरिका में दो से तीन घंटे की सामान्य धार्मिक पूजा या कथा के लिए पंडितों की फीस सैकड़ों डॉलर तक पहुंच जाती है. यदि आयोजन किसी निजी आवास पर हो और पंडित को लंबी दूरी तय करनी पड़े, तो खर्च और बढ़ जाता है. विवाह, गृहप्रवेश, नामकरण संस्कार या श्राद्ध जैसे बड़े आयोजनों के लिए शुल्क काफी अधिक हो सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका में पारंपरिक वैदिक विधियों का ज्ञान रखने वाले योग्य पंडितों की संख्या सीमित है. इसके अलावा वहां रहने और यात्रा करने की लागत भी अधिक होती है. यही कारण है कि धार्मिक सेवाओं की फीस भारत की तुलना में कहीं ज्यादा होती है. कई मामलों में यात्रा, अतिरिक्त समय और विशेष अनुष्ठानों के लिए अलग से शुल्क लिया जाता है.
अमेरिका में बसे भारतीय परिवार अपनी सांस्कृतिक पहचान बनाए रखने को महत्व देते हैं. खासकर नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं से जोड़ने के लिए वे धार्मिक आयोजनों पर खर्च करने से पीछे नहीं हटते. यही वजह है कि त्योहारों और शुभ अवसरों पर पंडितों की मांग काफी बढ़ जाती है.
सोशल मीडिया पर इस विषय को लेकर लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए. कई लोगों ने बताया कि अमेरिका में धार्मिक कार्यक्रमों के लिए पहले से बुकिंग करानी पड़ती है और त्योहारों के दौरान पंडितों की उपलब्धता सीमित रहती है. कुछ लोगों का कहना है कि बड़े शहरों में मांग अधिक होने के कारण फीस भी बढ़ जाती है.
भारत और अमेरिका के बीच धार्मिक सेवाओं की लागत में बड़ा अंतर देखने को मिलता है. इसके बावजूद विदेशों में रहने वाले भारतीय समुदाय के लिए धार्मिक परंपराओं को बनाए रखना आज भी प्राथमिकता बना हुआ है, जिसके चलते ऐसे आयोजनों पर खर्च लगातार बढ़ रहा है. First Updated : Wednesday, 10 June 2026