जोसेफ विजय के सामने द्रविड़ राजनीति से अलग राह पर चलने की बड़ी चुनौती, विपक्ष पर कितना भरोसा?
शपथ ग्रहण के दौरान विजय ने तमिल स्वाभिमान की बात तो की, मगर द्रविड़ एकता का जिक्र नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अक्सर सनातन, ब्राह्मण, हिंदी और उत्तर भारत के खिलाफ बयान देते रहे हैं।

नई दिल्ली: तमिलनाडु में सत्ता परिवर्तन के बाद सियासी समीकरण पूरी तरह बदल गए हैं। 59 साल बाद पहली बार ऐसा हुआ है जब राज्य की कमान किसी गैर द्रविड़ नेता के हाथ में आई है। TVK प्रमुख जोसेफ विजय ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली है, पर उनके सामने चुनौतियों का पहाड़ खड़ा है।
शपथ में दिखा बदला हुआ अंदाज
आपको बताते चलें कि शपथ ग्रहण के दौरान विजय ने तमिल स्वाभिमान की बात तो की, मगर द्रविड़ एकता का जिक्र नहीं किया। पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अक्सर सनातन, ब्राह्मण, हिंदी और उत्तर भारत के खिलाफ बयान देते रहे हैं। विजय के भाषण में ऐसी कोई तल्खी नहीं दिखी। उन्होंने अपने साथ नौ मंत्रियों को शपथ दिलाई। इनमें एक ब्राह्मण मंत्री भी शामिल हैं।
कई दशकों बाद तमिलनाडु कैबिनेट में किसी ब्राह्मण को जगह मिली है। DMK और ADMK ने तो चुनाव में किसी ब्राह्मण को टिकट तक नहीं दिया था। दिलचस्प बात यह है कि कैबिनेट में कोई मुस्लिम मंत्री नहीं है और न ही द्रविड़ परंपरा से जुड़ा कोई बड़ा चेहरा। बल्कि एक मंत्री तो हाल तक BJP का आईटी सेल संभाल रहे थे।
जोड़ तोड़ से बना बहुमत
विजय को कांग्रेस के अलावा CPI, CPM, IUML और VCK का भी समर्थन मिला। इन 13 विधायकों के साथ उनकी संख्या 120 पहुंच गई, जो बहुमत से दो ज्यादा है। 234 सीटों वाली विधानसभा में TVK के पास खुद के 107 विधायक हैं। यह 1967 के बाद पहला मौका है, जब द्रविड़ राजनीति का कोई नेता सरकार का हिस्सा नहीं है।
विजय थलापति की 'करुणामयी' छवि
दरअसल तमिलनाडु की जनता फिलहाल विजय से बहुत बड़ी उम्मीदें नहीं लगा रही। लोगों को लगता है कि उनकी सरकार भी पहले की द्रविड़ पार्टियों जैसी ही होगी। फिर भी जनता अभी उनका विरोध नहीं कर रही। वजह यह है कि विजय उन्हें स्टालिन के मुकाबले ज्यादा नरम और संवेदनशील लगते हैं। सितंबर 2025 की रैली में हुई भगदड़ में 41 लोगों की मौत हुई थी।
तब विजय ने हर मृतक के परिवार को 20 लाख रुपये और घायलों के इलाज के लिए 22 लाख रुपये की मदद दी थी। इस कदम से उनकी जनप्रिय छवि बनी। विजय का बैकग्राउंड भी राजनीति का नहीं, तमिल फिल्मों के सुपरस्टार का है। इसलिए लोगों को भरोसा है कि वे आम आदमी का दर्द समझेंगे। स्टालिन के बयानों ने जनता में नाराजगी बढ़ा दी थी।
वादे पूरे करना नहीं होगा आसान
विजय की निजी संपत्ति 624 करोड़ रुपये से ज्यादा है। नामांकन के हलफनामे में उन्होंने 404 करोड़ की चल और 220 करोड़ की अचल संपत्ति बताई थी। उनके अंदर गरीबों के लिए करुणा भी है। यदि निजी पैसे से कुछ लोगों की मदद हो सकती है, पूरे प्रदेश की नहीं। अगर राज्य में व्यापार और उद्योग के लिए माहौल नहीं बना तो पांच साल सरकार चलाना मुश्किल होगा।
सबसे बड़ी चुनौती सहयोगियों को साथ रखने की है। बहुमत के लिए विजय ने पांच दलों का सहारा लिया है। ये सभी दल पहले DMK के साथ थे। कांग्रेस DMK से अलग हुई, पर CPI, CPM, IUML और VCK अभी भी DMK गठबंधन का हिस्सा हैं। उन्होंने TVK को समर्थन तो दिया है, पर DMK से नाता नहीं तोड़ा। ऐसे में विजय सरकार पर अल्पमत का खतरा हमेशा बना रहेगा।


