पांच दिन और चार बैठकों के बाद विजय ने सत्ता तक बनाया रास्ता, आज लेंगे पद की शपथ
तमिलनाडु में सरकार बनाने के लिए विजय को पांच दिनों तक लगातार राजनीतिक संघर्ष करना पड़ा. राज्यपाल से कई दौर की मुलाकातों और सहयोगी दलों के समर्थन के बाद आखिरकार सत्ता का रास्ता साफ हुआ.

चेन्नई: तमिलनाडु की राजनीति में इस बार सत्ता तक पहुंचने का रास्ता किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं रहा. अभिनेता से नेता बने विजय को मुख्यमंत्री बनने के लिए सिर्फ चुनाव जीतना ही काफी नहीं था. सरकार बनाने के लिए जरूरी बहुमत जुटाने में उन्हें पूरे पांच दिन तक लगातार राजनीतिक बातचीत, सहयोगी दलों से समर्थन और राज्यपाल के साथ चार दौर की बैठकों से गुजरना पड़ा. जिसके बाद आज विजय सुबह 10 बजे चेन्नई के नेहरू स्टेडियम में मुख्यमंत्री पद की शपथ लेंगे.
आखिरकार कई राजनीतिक समीकरणों और गठबंधन वार्ताओं के बाद विजय ने वह आंकड़ा हासिल कर लिया, जिसने उन्हें तमिलनाडु की सत्ता के सबसे बड़े पद तक पहुंचा दिया. करीब 60 वर्षों बाद राज्य में पहली बार ऐसी सरकार बनने जा रही है, जिसका नेतृत्व न तो डीएमके करेगी और न ही एआईएडीएमके. यही वजह है कि विजय की यह राजनीतिक जीत तमिलनाडु की राजनीति में बड़े बदलाव के रूप में देखी जा रही है.
चुनाव में सबसे बड़ी पार्टी बनी टीवीके
दो साल पहले बनी तमिलगा वेट्ट्री कज़गम (टीवीके) ने इस विधानसभा चुनाव में शानदार प्रदर्शन किया. विजय की पार्टी ने 234 सदस्यीय विधानसभा में 108 सीटें जीतकर सबको चौंका दिया. हालांकि, बहुमत के लिए 118 सीटों की जरूरत थी और टीवीके इस आंकड़े से 10 सीट पीछे रह गई. इसके बाद असली राजनीतिक चुनौती शुरू हुई. विजय को सरकार बनाने के लिए दूसरे दलों का समर्थन जुटाना पड़ा.
राज्यपाल से पहली मुलाकात
सबसे पहले कांग्रेस ने विजय का समर्थन किया. डीएमके की सहयोगी कांग्रेस के पांच विधायक टीवीके के साथ आए. इसके बाद विजय ने बुधवार को राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर से मुलाकात कर सरकार बनाने का दावा पेश किया. लेकिन राज्यपाल ने साफ कर दिया कि अभी उनके पास बहुमत का पूरा आंकड़ा नहीं है. राजभवन की ओर से कहा गया कि सरकार बनाने के लिए और समर्थन पत्रों की जरूरत होगी.
दूसरी बैठक में भी नहीं बनी बात
इसके बाद विजय ने अन्य दलों से बातचीत तेज कर दी. गुरुवार को उन्होंने एक बार फिर राज्यपाल से मुलाकात की. हालांकि, इस बार भी वे राज्यपाल को यह भरोसा दिलाने में सफल नहीं हो सके कि उनके पास पर्याप्त संख्या बल है. राजभवन ने बैठक के बाद बयान जारी करते हुए कहा कि बहुमत का समर्थन अभी स्पष्ट रूप से सामने नहीं आया है. इस बीच तमिलनाडु की राजनीति में लगातार हलचल बढ़ती रही. सभी की नजर इस बात पर थी कि आखिर विजय बहुमत का जादुई आंकड़ा कैसे हासिल करेंगे.
वामदलों के समर्थन से बदला समीकरण
शुक्रवार को विजय के लिए राहत भरी खबर आई. भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी और माकपा ने टीवीके को समर्थन देने का फैसला किया. दोनों दलों के पास दो-दो विधायक थे. लेकिन एक और तकनीकी स्थिति ने विजय की मुश्किल बढ़ा दी. उन्होंने दो सीटों से चुनाव जीता था और उन्हें एक सीट छोड़नी थी. ऐसे में टीवीके की संख्या 107 रह गई. कांग्रेस और वामदलों के समर्थन के बाद गठबंधन का आंकड़ा 116 तक पहुंचा, जो बहुमत से दो कम था. शुक्रवार शाम विजय तीसरी बार राज्यपाल से मिलने पहुंचे, लेकिन 118 विधायकों के लिखित समर्थन की शर्त अभी पूरी नहीं हो सकी.
वीसीके और आईयूएमएल ने दिलाई जीत
शनिवार को राजनीतिक तस्वीर पूरी तरह बदल गई. डीएमके गठबंधन की सहयोगी पार्टी विदूतलाई चिरुथाइगल काची (वीसीके) ने विजय को समर्थन देने का ऐलान कर दिया. इससे गठबंधन का आंकड़ा 118 तक पहुंच गया. इसके तुरंत बाद इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग ने भी टीवीके को समर्थन देने की घोषणा कर दी. इस समर्थन के बाद विजय के पक्ष में कुल 120 विधायक हो गए और सरकार बनाने का रास्ता साफ हो गया.
चौथी बैठक में राज्यपाल ने दी मंजूरी
वीसीके और आईयूएमएल के समर्थन पत्र मिलने के बाद विजय शनिवार शाम चौथी बार राज्यपाल से मिलने पहुंचे. उन्होंने सभी सहयोगी दलों के समर्थन पत्र राजभवन में सौंपे. इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष के. सेल्वपेरुंथगई और माकपा के राज्य सचिव पी. शनमुगम भी उनके साथ मौजूद रहे. करीब एक घंटे तक चली बातचीत के बाद राज्यपाल संतुष्ट हुए और विजय को तमिलनाडु का मुख्यमंत्री नियुक्त कर दिया. राज्यपाल ने विजय को 13 मई या उससे पहले विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने का निर्देश भी दिया है.


