सुवेंदु अधिकारी के PA हत्याकांड का खुलासा! UPI ट्रांजैक्शन ने दिलाई 3 शार्पशूटर्स की गिरफ्तारी
पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजों के बाद हुई हिंसा के बीच चर्चित चंद्रनाथ रथ हत्याकांड में बड़ा खुलासा हुआ है. पश्चिम बंगाल पुलिस की एसआईटी ने मामले में तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है. 6 मई की रात रथ की हत्या हुई थी, जो विधानसभा चुनाव परिणाम आने के महज दो दिन बाद की घटना थी.

कोलकाता: पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक चंद्रनाथ रथ की हत्या मामले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है. इस हाई-प्रोफाइल हत्याकांड में शामिल तीन शार्पशूटर्स को उत्तर प्रदेश से गिरफ्तार किया गया है. पश्चिम बंगाल पुलिस की विशेष जांच टीम ने कई राज्यों में छापेमारी और जांच के बाद इन आरोपियों को पकड लिया है. सोमवार को इन तीनों आरोपियों को उत्तर 24 परगना के बारासात जिला अदालत में पेश किया जाएगा.
पुलिस सूत्रों के अनुसार आरोपियों को रविवार रात गुपचुप तरीके से कोलकाता लाया गया और दक्षिण कोलकाता स्थित राज्य पुलिस मुख्यालय भवानी भवन में पूरी रात पूछताछ की गई. जांच एजेंसियां अब इस हत्या के पीछे की साजिश, फंडिंग और मास्टरमाइंड तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं.
कब हुई थी हत्या?
चंद्रनाथ रथ की हत्या 6 मई की रात उस समय हुई थी, जब वह एक पार्टी कार्यक्रम से लौटकर उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम स्थित अपने घर जा रहे थे. यह घटना पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के महज दो दिन बाद हुई थी.
प्रारंभिक जांच में सामने आया कि रास्ते में एक चारपहिया वाहन ने रथ की गाड़ी को रोक दिया. इसी दौरान लंबे समय से पीछा कर रही दो मोटरसाइकिलों में से एक रथ की गाड़ी के पास पहुंची और बाइक सवार हमलावर ने बेहद करीब से दस राउंड फायरिंग कर दी. हमले में चंद्रनाथ रथ की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि उनके चालक बुद्धदेव बेरा गंभीर रूप से घायल हो गए.
फर्जी नंबर प्लेट से गुमराह करने की कोशिश
जांच में खुलासा हुआ कि हत्या में इस्तेमाल की गई कार और दोनों मोटरसाइकिलों पर फर्जी नंबर प्लेट लगी हुई थीं. पुलिस का मानना है कि जांच को भटकाने के उद्देश्य से ऐसा किया गया था. पुलिस ने घटना वाले दिन ही हत्या में इस्तेमाल की गई कार को बरामद कर लिया था. बाद में आरोपियों की मोटरसाइकिलें भी बरामद की गईं. जांच एजेंसियों के अनुसार कार झारखंड से लाई गई थी और उसी वाहन से ऑनलाइन पैसों का लेनदेन भी किया गया था.
कितने महीने पहले रची गई थी साजिश
पुलिस के मुताबिक चंद्रनाथ रथ की हत्या की साजिश करीब डेढ़ महीने पहले रची गई थी. जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि हत्या के पीछे कौन लोग शामिल थे और इसका मकसद क्या था. SIT को जांच के दौरान कई तकनीकी सबूत भी मिले हैं, जिनके आधार पर आरोपियों तक पहुंच बनाई गई.
कहां से मिला बड़ा सुराग?
जांच में बड़ा मोड़ तब आया जब पुलिस ने कोलकाता के पास बाली स्थित टोल प्लाजा पर किए गए एक UPI भुगतान को ट्रैक किया. जांच अधिकारियों ने टोल प्लाजा के CCTV फुटेज खंगाले, जिसमें तीनों आरोपी एक कार में दिखाई दिए. डिजिटल भुगतान के जरिए पुलिस को आरोपियों की पहचान और मूवमेंट से जुड़ी अहम जानकारी मिली, जिसके बाद गिरफ्तारी की कार्रवाई की गई.
सुवेंदु अधिकारी ने क्या कहा?
सुवेंदु अधिकारी ने इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था कि अगर चंद्रनाथ रथ उनके निजी सहायक नहीं होते और उन्होंने भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी को हराने में भूमिका न निभाई होती, तो शायद उनकी हत्या नहीं होती.


