नई दिल्ली : भारत और अमेरिका के बीच एक लंबे अंतराल और गहन प्रयासों के बाद सोमवार को एक ऐतिहासिक व्यापार समझौते (Win-Win Deal) पर सहमति बन गई है. इस समझौते का मुख्य आकर्षण टैरिफ दरों में की गई बड़ी कटौती है, जहां अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगने वाले टैरिफ को 50% से घटाकर 18% कर दिया है. इसके जवाब में भारत ने भी अमेरिकी उत्पादों के लिए अपनी बाजार पहुंच (Market Access) बढ़ाने और टैरिफ बाधाओं को भविष्य में संभावित रूप से शून्य तक ले जाने की प्रतिबद्धता व्यक्त की है.
भारतीय उपभोक्ताओं के लिए राहत
आपको बता दें कि इस समझौते के प्रभावी होने से भारतीय बाजार में कई अमेरिकी उत्पाद अब काफी सस्ते होने की उम्मीद है. प्रॉफिट रिसर्च के विश्लेषण के अनुसार, आयात शुल्क में दी गई राहत से दालों, डेयरी उत्पादों और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों (Processed Food) की कीमतों में गिरावट आएगी, जिससे आम जनता को खाद्य महंगाई से सीधी राहत मिल सकती है.
लैपटॉप और अन्य इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर की कीमतें कम होंगी
तकनीकी क्षेत्र में भी बड़े बदलाव की उम्मीद जताई जा रही है, जहां लैपटॉप, गैजेट्स और अन्य इलेक्ट्रॉनिक हार्डवेयर की कीमतें काफी कम हो सकती हैं. इसके अलावा, प्रसंस्कृत और पैकेज्ड गुड्स के साथ-साथ घरेलू उपकरणों का आयात खर्च घटने से उनकी उपलब्धता आसान और सस्ती हो जाएगी.
भारतीय सामानों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर
निर्यात के दृष्टिकोण से यह समझौता भारतीय रसायनों और इंजीनियरिंग सामानों के लिए अमेरिकी बाजार में नए अवसर पैदा करेगा, क्योंकि इनके लिए अब व्यापारिक बाधाएं कम होंगी और बाजार तक पहुंच बेहतर होगी. हालांकि, कुछ महत्वपूर्ण औद्योगिक उत्पाद अभी भी महंगे बने रह सकते हैं.
इन सामानों पर 50 % टैरिफ जारी...
अमेरिकी 'सेक्शन 232' के नियमों के कारण स्टील, एल्युमीनियम और कॉपर पर करीब 50% की उच्च ड्यूटी जारी रहेगी, जिससे इन क्षेत्रों में चुनौतियां बनी रहेंगी. साथ ही, ऑटो घटकों (Auto Components) पर भी सीमित टैरिफ छूट के कारण शुल्क लगभग 25% के स्तर पर रह सकता है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के बीच हुई वार्ता के बाद इस निर्णय को साझा आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है.
First Updated : Tuesday, 03 February 2026