नई दिल्ली: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने शुक्रवार को रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर स्थिर रखने का फैसला किया है. केंद्रीय बैंक ने महंगाई, वैश्विक अनिश्चितताओं और आर्थिक चुनौतियों को देखते हुए ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं किया. यह फैसला बाजार और अर्थशास्त्रियों की उम्मीदों के अनुरूप रहा.
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) के सभी छह सदस्यों ने एकमत से रेपो रेट को स्थिर रखने का समर्थन किया. साथ ही केंद्रीय बैंक ने अपनी ‘न्यूट्रल’ पॉलिसी स्टांस भी बरकरार रखा है. इसका मतलब है कि RBI आने वाले आर्थिक हालात के अनुसार भविष्य में किसी भी दिशा में कदम उठा सकता है.
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि अप्रैल के बाद वैश्विक परिस्थितियां और चुनौतीपूर्ण हो गई हैं. पश्चिम एशिया में जारी तनाव, ऊंची ऊर्जा कीमतें और सप्लाई चेन में रुकावटें दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर असर डाल रही हैं. उन्होंने चेतावनी दी कि इन वजहों से आने वाले समय में महंगाई बढ़ सकती है, हालांकि फिलहाल खुदरा महंगाई (CPI) RBI के तय लक्ष्य के भीतर बनी हुई है.
केंद्रीय बैंक ने वित्त वर्ष 2027 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान घटा दिया है. RBI का मानना है कि भू-राजनीतिक तनाव, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और सप्लाई संबंधी समस्याएं आर्थिक विकास की रफ्तार को प्रभावित कर सकती हैं.
आरबीआई ने कहा कि अभी तक वैश्विक संकट का असर घरेलू कीमतों पर सीमित रहा है, लेकिन आने वाले महीनों में महंगाई बढ़ने का खतरा बना हुआ है. खासकर कमजोर दक्षिण-पश्चिम मानसून और एल नीनो की संभावना कृषि उत्पादन और खाद्य कीमतों को प्रभावित कर सकती है.
रेपो रेट में बदलाव नहीं होने से होम लोन, कार लोन और अन्य कर्ज की EMI पर फिलहाल कोई असर नहीं पड़ेगा. RBI ने साफ संकेत दिया है कि वह महंगाई और आर्थिक हालात पर लगातार नजर बनाए हुए है और जरूरत पड़ने पर आगे जरूरी कदम उठाए जा सकते हैं. First Updated : Friday, 05 June 2026