क्यों आसमान छू रही चांदी ? सट्टेबाजी का जाल या इंडस्ट्रियल डिमांड

चांदी का जलवा रुकने का नाम नहीं ले रही हैं और अब ग्लोबल मार्केट में चांदी 100 डॉलर के आंकड़े को पार कर चुकी है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि सट्टेबाजी का जोश और हेजिंग की तेज मांग इस तेजी के पीछे का मुख्य कारण है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: चांदी की कीमतों में आई ऐतिहासिक तेजी ने निवेशकों को हैरान कर दिया है. बीते एक महीने में चांदी करीब 1 लाख रुपये तक महंगी हो चुकी है, जबकि सिर्फ एक हफ्ते में ही इसमें लगभग 40 हजार रुपये की उछाल दर्ज की गई है. ऐसे समय में जब शेयर बाजार में निवेशकों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है, चांदी का यह तेज उभार हर किसी के मन में सवाल खड़ा कर रहा है आखिर चांदी में चल क्या रहा है?

घरेलू ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी ने नया रिकॉर्ड बना दिया है. पहली बार चांदी की कीमत 100 डॉलर प्रति औंस के पार पहुंच गई है. तेज उतार-चढ़ाव और रिकॉर्ड स्तरों के बीच निवेशक जहां एक ओर मुनाफे की संभावना देख रहे हैं, वहीं दूसरी ओर बढ़ते जोखिम को लेकर सतर्क भी हो गए हैं.

इंटरनेशनल मार्केट में रिकॉर्ड स्तर

शुक्रवार को चांदी की कीमतें करीब 3.40 लाख रुपये तक पहुंच गई थीं, हालांकि कारोबार के अंत में यह 3.34 लाख रुपये पर बंद हुई. अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी चांदी ने इतिहास रचते हुए पहली बार 100 डॉलर प्रति औंस का स्तर छू लिया.

एक ही ट्रेडिंग सेशन में हाजिर चांदी की कीमतों में 4% से अधिक की तेजी देखी गई, जबकि मार्च वायदा चांदी भी करीब 4% उछलकर 100.06 डॉलर पर पहुंच गई. विशेषज्ञ इसे मजबूत सट्टेबाजी और हेजिंग डिमांड का नतीजा बता रहे हैं.

सट्टेबाजी और हेजिंग डिमांड से चांदी में उछाल

विशेषज्ञों के मुताबिक, वैश्विक स्तर पर बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन और वित्तीय अस्थिरता की आशंकाओं के बीच निवेशकों का रुझान कीमती धातुओं की ओर बढ़ा है. इसी वजह से चांदी ने यह ऐतिहासिक स्तर हासिल किया है. मजबूत सट्टेबाजी के साथ-साथ हेजिंग की मांग ने भी चांदी की कीमतों को सपोर्ट दिया है, जिससे बाजार में तेजी और ज्यादा आक्रामक हो गई है.

चांदी में सट्टेबाजी का क्या मतलब है?

चांदी में सट्टेबाजी का मतलब है किसी खबर, अनुमान या उम्मीद के आधार पर बड़े पैमाने पर दांव लगाना. बजट में चांदी पर ड्यूटी में राहत की चर्चाएं, एक्सपर्ट्स द्वारा दिए गए ऊंचे टारगेट और इंडस्ट्रियल डिमांड की बढ़ती उम्मीदों ने कमोडिटी मार्केट में चांदी को लेकर सट्टेबाजी को तेज कर दिया है.

क्यों बढ़ रही है चांदी में सट्टेबाजी?

कमोडिटी मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि चांदी का ‘ड्युअल कैरेक्टर’ इसे सट्टेबाजों के लिए आकर्षक बनाता है. चांदी न सिर्फ एक कीमती धातु है, बल्कि यह एक महत्वपूर्ण इंडस्ट्रियल मेटल भी है.

सोलर पैनल, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सेमीकंडक्टर, 5G टेक्नोलॉजी और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर में चांदी की मांग लगातार बढ़ रही है. इसी वजह से ज्यादा रिटर्न की उम्मीद में निवेशक चांदी में आक्रामक पोजिशन बना रहे हैं.

कम लिक्विडिटी, ज्यादा उतार-चढ़ाव

सोने के मुकाबले चांदी का बाजार काफी छोटा है. जानकारों का मानना है कि इसमें थोड़ी सी खरीद-बिक्री भी कीमतों में बड़ा उतार-चढ़ाव ला सकती है. इंटरनेशनल मार्केट में F&O सेगमेंट के जरिए तेजी से पैसा चांदी में आ रहा है.

कम मार्जिन ट्रेडिंग, सोशल मीडिया और यूट्यूब पर तेजी के अनुमान ने रिटेल निवेशकों को भी चांदी की ओर आकर्षित किया है.

हेजिंग डिमांड ने भी दी कीमतों को मजबूती

चांदी में तेजी सिर्फ सट्टेबाजी की वजह से नहीं है. रूस-यूक्रेन युद्ध, मिडिल ईस्ट में तनाव, अमेरिका-चीन व्यापार विवाद और यूरोप की आर्थिक सुस्ती ने निवेशकों को सुरक्षित विकल्प तलाशने पर मजबूर किया है.

हालांकि सेंट्रल बैंक मुख्य रूप से सोने में निवेश करते हैं, लेकिन हेज फंड्स, फैमिली ऑफिस और बड़े संस्थागत निवेशक अब चांदी को भी अपने पोर्टफोलियो में शामिल कर रहे हैं.

इंडस्ट्रियल कंपनियां भी कर रहीं अग्रिम खरीद

सोलर एनर्जी, इलेक्ट्रिक व्हीकल और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की कंपनियां चांदी की बढ़ती कीमतों से चिंतित हैं. भविष्य में और महंगी होने की आशंका के चलते ये कंपनियां पहले से ही चांदी की खरीद कर रही हैं, ताकि आगे ऊंचे दाम न चुकाने पड़ें. इससे भी चांदी की कीमतों को मजबूती मिल रही है.

आगे चांदी का क्या होगा?

एक्सपर्ट्स का मानना है कि मौजूदा स्तर पर चांदी में तेजी जरूर है, लेकिन जोखिम भी उतना ही बड़ा है. अगर इंडस्ट्रियल डिमांड मजबूत बनी रहती है और सोना स्थिर रहता है, तो चांदी में और उछाल देखने को मिल सकता है.

हालांकि, अगर वैश्विक आर्थिक संकट गहराता है या जोखिम से बचने का माहौल बनता है, तो चांदी की कीमतों में तेज गिरावट भी संभव है. विशेषज्ञों के अनुसार, निवेशकों को चांदी में लंबी अवधि के लिए सीमित हिस्सेदारी के साथ ही निवेश करना चाहिए.

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