देश में कैश की कमी नहीं, फिर भी क्यों खाली पड़े ATM? जानें क्या है वजह
भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 29 मई 2026 तक कैश का चलन 42.56 लाख करोड़ से भी अधिक रहा है, जो की पिछले साल की तुलना में 12% से ज्यादा है. लेकिन इसके बाद भी एटीएम मशीन में कैश उपलब्ध न होने के कारण लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है.

नई दिल्ली: जब से भारत देश में यूपीआई सुविधा शुरू हुई है तब से देश के कई राज्यों में एटीएम मशीन में कैश न उपलब्ध होने के कारण चिंता बढ़ती जा रही है. भारतीय रिजर्व बैंक के आंकड़ों के अनुसार, 29 मई 2026 तक कैश का चलन 42.56 लाख करोड़ से भी अधिक रहा है, जो की पिछले साल की तुलना में 12% से ज्यादा है. लेकिन इसके बाद भी एटीएम मशीन में कैश उपलब्ध न होने के कारण लोगों के बीच चिंता बढ़ गई है.
क्या कहते है आंकड़े?
बता दें, हाल ही में एटीएम उद्योग से जुड़े संगठन CATMi ने दावा किया है कि ऑपरेटरों को जरूरत के अनुसार पर्याप्त कैश नहीं मिल पा रहा है. अगर ऐसी ही स्थिति बनी रही तो आम लोगों को पैसे निकालने में दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है. CATMi के अनुसार, नकदी की कमी लगातार बढ़ रही है. मार्च 2026 में जहां यह कमी 36 फीसदी थी, वहीं अप्रैल में बढ़कर 43 फीसदी हो गई यानी एटीएम संचालकों को उनकी जरूरत की कुल नकदी का सिर्फ 57 फीसदी हिस्सा ही मिल पाया। संगठन का कहना है कि पिछले साल दिसंबर से कई राज्यों में बैंक शाखाओं और करेंसी चेस्ट से एटीएम तक कैश पहुंचाने में समस्याएं आ रही हैं.
एटीएम लेनदेन क्यों हो रही गिरावट
वहीं एटीएम से नकदी निकालने वाले लोगों की संख्या भी लगातार घट रही है. इसकी सबसे बड़ी वजह डिजिटल पेमेंट और यूपीआई का तेजी से बढ़ता इस्तेमाल माना जा रहा है. पहले जहां लोग छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी एटीएम से पैसे निकालते थे, अब ज्यादातर भुगतान सीधे मोबाइल के जरिए हो रहा है. इसी कारण एटीएम लेनदेन में लगातार गिरावट दर्ज की गई है.
एटीएम ऑपरेटरों का बढ़ा खर्च
एटीएम ऑपरेटरों का कहना है कि एक तरफ उनकी आय कम हो रही है, तो दूसरी तरफ खर्च बढ़ते जा रहे हैं. नकदी ढुलाई, ईधन, सुरक्षा व्यवस्था और कर्मचारियों के वेतन पर पहले से ज्यादा खर्च करना पड़ रहा है. उनका मानना है कि मौजूदा शुल्क और अन्य आय के स्रोत इन बढ़ती लागतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं हैं.
समस्या को जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश
इस मामले पर RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा है कि रिजर्व बैंक देश में नकदी की जरूरत का नियमित आकलन करता है और बैंकों को आवश्यक करेंसी उपलब्ध कराता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि जहां भी नकदी की कमी की समस्या सामने आएगी, उसे जल्द से जल्द दूर करने की कोशिश की जाएगी.
हालांकि अगर एटीएम में नकदी की उपलब्धता प्रभावित होती है तो इसका सबसे ज्यादा असर ग्रामीण इलाकों, वरिष्ठ नागरिकों और नकद लेनदेन पर निर्भर छोटे व्यापारियों पर पड़ सकता है. ऐसे में बैंकों और संबंधित एजेंसियों के लिए यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि लोगों को जरूरत पड़ने पर आसानी से नकदी मिल सके. अब देखना होगा कि बैंक कैसे इस बात का समाधान निकालते है.


