बैठक में पहुंचे सिर्फ 14 नेता, टीएमसी में बढ़ती नाराजगी ने बढ़ाई ममता बनर्जी की चिंता

शुक्रवार को  ममता बनर्जी द्वारा अपने कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई लेकिन उम्मीद के अनुसार इस बैठक में काफी कम नेता ही शामिल हुए. इसके बाद पार्टी के बीट कलह को लेकर चर्चा शुरू हो गई है.

Yashika Jandwani

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री और तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) प्रमुख ममता बनर्जी इन दिनों अपनी ही पार्टी के अंदर बढ़ती नाराजगी को लेकर चिंता में नजर आ रही हैं. बता दें, शुक्रवार को  ममता बनर्जी द्वारा अपने कोलकाता स्थित कालीघाट आवास पर पार्टी नेताओं की एक अहम बैठक बुलाई लेकिन उम्मीद के अनुसार इस बैठक में काफी कम नेता ही शामिल हुए. बता दें, बैठक में केवल आठ विधायक और छह सांसद शामिल हुए, जिसके बाद पार्टी में अंदरूनी कलह की चर्चाएं तेज हो गई हैं. 

पार्टी ने दी सफाई 

जानकारी के अनुसार,  बैठक में शामिल हुए विधायकों के नाम बीना मंडल, आशिमा पात्रा, मदन मित्रा, कुणाल घोष, फिरहाद हकीम, शोभनदेब चट्टोपाध्याय, बिमान बनर्जी और अशोक कुमार देब है. इसके साथ ही सांसद में से डोला सेन, माला रॉय, कल्याण बनर्जी, अभिषेक बनर्जी, डेरेक ओ'ब्रायन और सुदीप बंद्योपाध्याय शामिल हुए. 

वहीं टीएमसी ने इस मामले पर सफाई देते हुए कहा कि यह सभी सांसदों और विधायकों की बैठक नहीं थी. पार्टी के मुताबिक, यह राष्ट्रीय कार्य समिति की बैठक थी और इस दौरान कई सदस्य ऑनलाइन माध्यम से इसमें जुड़े थे. हालांकि, इसके बावजूद भी पार्टी के भीतर कलह की खबरें लगातार सामने आ रही हैं. 

कार्यशैली से ना खुश

बताया जा रहा है कि कुछ विधायक और सांसद नेतृत्व की कार्यशैली से खुश नहीं हैं. इसके साथ ही विधानसभा में भी एक असंतुष्ट गुट सक्रिय बताया जा रहा है, जिसका नेतृत्व पार्टी से निष्कासित किए जा चुके ऋतब्रता बनर्जी कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्हें कई विधायकों का समर्थन हासिल है, जिससे पार्टी के भीतर मतभेद खुलकर सामने आने लगे हैं.

यही वजह है कि संसद में भी टीएमसी के कुछ नेताओं की नाराजगी चर्चा का विषय बनी हुई है. इस नाराजगी के बीच राजनीतिक गलियारों में ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि कुछ सांसद भविष्य में अलग राजनीतिक रास्ता चुन सकते हैं. हालांकि, इन दावों की अभी तक कोई भी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

 क्या नेताओं के नाराजगी दूर कर पाएगी ममता बनर्जी 

इसी बीच यह भी चर्चा है कि ममता बनर्जी लोकसभा की राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाने पर विचार कर सकती हैं. खबरों के मुताबिक, पार्टी बहरामपुर लोकसभा सीट को लेकर रणनीति बना रही है. हालांकि इस संबंध में भी अभी तक कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है. फिलहाल टीएमसी के सामने सबसे बड़ी चुनौती पार्टी को एकजुट बनाए रखने की है. आने वाले दिनों में देखा होगा कि ममता बनर्जी इस स्थिति से कैसे निपटती हैं, इस पर राजनीतिक जानकारों और विपक्ष की नजर बनी हुई है.

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