जंग छिड़ी, मिसाइलें बरसीं...फिर भी सोना-चांदी के दाम क्यों गिरे? बाजार का अनोखा खेल!

सामान्य तौर पर जियो-पॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर सोना-चांदी की कीमतें आसमान छूने लगती हैं, मगर इस बार चौंकाने वाला खेल हो रहा है. ईरान-इज़राइल-अमेरिका के बीच युद्ध के बावजूद सोमवार, 9 मार्च को वैश्विक बाजार में सोना और चांदी की कीमतें गिरावट पर हैं.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली: भू-राजनीतिक तनाव बढ़ने पर आमतौर पर सोना और चांदी सुरक्षित निवेश के रूप में चमकते हैं, लेकिन इस बार मीडिल ईस्ट में गहराते संघर्ष के बीच सोमवार, 9 मार्च को वैश्विक बाजार में इन कीमती धातुओं की कीमतों में तेज गिरावट देखी गई. कॉमेक्स पर सोने का भाव करीब 1.3% लुढ़ककर 5,090 डॉलर प्रति औंस के आसपास पहुंच गया, जबकि चांदी में 4% से अधिक की भारी गिरावट दर्ज हुई. युद्ध की छाया में कच्चे तेल की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच रही हैं, लेकिन सोने-चांदी पर उलटा दबाव पड़ रहा है, जिससे बाजार विशेषज्ञ हैरान हैं.

एक्सपर्ट्स का मानना है कि यह गिरावट पिछले महीनों की जबरदस्त तेजी के बाद मुनाफावसूली, मजबूत डॉलर और बढ़ती बॉन्ड यील्ड के संयुक्त प्रभाव से हो रही है. निवेशक युद्ध की अनिश्चितता के बीच तरलता बनाए रखने के लिए सोने के स्टॉक बेच रहे हैं.

तेजी के बाद मुनाफा

खबरों के अनुसार, कीमती धातुओं में आई इस गिरावट की मुख्य वजह निवेशकों द्वारा मुनाफावसूली है. पिछले कुछ महीनों में सोने ने शानदार रिटर्न दिए थे, जिसके बाद अब निवेशक अपने मुनाफे को सुरक्षित करने में लगे हैं. शेयर बाजार में जारी गिरावट के कारण पोर्टफोलियो के नुकसान की भरपाई के लिए भी सोने के हिस्से को बेचा जा रहा है. फिलहाल सोने की कीमतों पर मध्य पूर्व की स्थिति का सबसे अधिक असर देखा जा रहा है, जिससे बाजार में उतार-चढ़ाव काफी बढ़ गया है.

कच्चे तेल की कीमतों में रिकॉर्ड उछाल

सोने-चांदी की कीमतें गिर रही हैं, लेकिन कच्चे तेल ने आसमान छू लिया है. ब्रेंट क्रूड का भाव 17% की छलांग लगाकर 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो महामारी के बाद सबसे बड़ी एक दिवसीय बढ़ोतरी है. वहीं, डब्ल्यूटीआई क्रूड भी 107 डॉलर के करीब ट्रेड कर रहा है. यह उछाल होर्मुज स्ट्रेट से तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका के कारण है.

बढ़ते तेल दाम वैश्विक महंगाई को और तेज कर रहे हैं, जिससे केंद्रीय बैंकों के सामने ब्याज दरों को लेकर नई चुनौतियां खड़ी हो गई हैं. अमेरिकी फेडरल रिजर्व के लिए ब्याज दरों में कटौती का रास्ता और जटिल हो सकता है.

मजबूत डॉलर और बॉन्ड यील्ड ने बढ़ाया दबाव

कीमती धातुओं पर दबाव का एक प्रमुख कारण अमेरिकी डॉलर की मजबूती और ट्रेजरी यील्ड में वृद्धि है. बाजार की अनिश्चितता में निवेशक नकदी के लिए डॉलर की ओर रुख कर रहे हैं. बढ़ती महंगाई के चलते अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड भी ऊपर गई है. मजबूत डॉलर के कारण अन्य मुद्राओं वाले देशों के लिए सोना खरीदना महंगा पड़ रहा है, जिससे मांग में कमी आई है.

युद्ध का बाजार पर उल्टा असर

विश्लेषकों का कहना है कि सोने की कीमतों में यह उतार-चढ़ाव किसी बुनियादी बदलाव की वजह से नहीं, बल्कि युद्ध से उत्पन्न अल्पकालिक अस्थिरता के कारण हो रहा है. एक्सपर्टका कहना है कि एक बार भू-राजनीतिक तनाव कम होने के बाद, अमेरिकी ब्याज दरों और डॉलर की दिशा जैसे पारंपरिक कारक ही सोने-चांदी की कीमतों को तय करेंगे. फिलहाल, निवेशक सुरक्षित निवेश और बाजार की तरलता की जरूरत के बीच उलझे हुए हैं.

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