CBSE Revaluation 2026: तकनीकी गड़बड़ियों पर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सख्त, बोर्ड से मांगी विस्तृत रिपोर्ट

धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में आई तकनीकी गड़बड़ियों को लेकर सख्त रुख अपनाया है. छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों के बाद शिक्षा मंत्री ने सर्वर डाउन, पेमेंट फेल और अन्य तकनीकी खामियों पर बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: धर्मेंद्र प्रधान ने सीबीएसई की पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान सामने आई तकनीकी समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए बोर्ड से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है. छात्रों और अभिभावकों की ओर से सर्वर डाउन होने, पेमेंट गेटवे फेल होने और अन्य तकनीकी बाधाओं की शिकायतों के बाद यह कदम उठाया गया है.

सूत्रों के मुताबिक, केंद्रीय शिक्षा मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे तकनीकी खामियों के कारणों, पहले से किए गए तैयारी उपायों और पूरी प्रक्रिया के संचालन में शामिल एजेंसियों की जवाबदेही को लेकर स्पष्ट रिपोर्ट प्रस्तुत करें.

छात्रों और अभिभावकों की शिकायतों पर बढ़ी सख्ती

सूत्रों के अनुसार, 'सीबीएसई पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया के दौरान तकनीकी व्यवधानों को लेकर छात्रों और अभिभावकों द्वारा उठाई गई शिकायतों का गंभीर संज्ञान लेते हुए, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सर्वर डाउनटाइम, पेमेंट गेटवे की गड़बड़ियों और परिचालन संबंधी खामियों पर एक विस्तृत रिपोर्ट मांगी है.”

बताया गया है कि कई छात्रों को आवेदन प्रक्रिया के दौरान पोर्टल तक पहुंचने में दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जबकि कुछ मामलों में भुगतान की पुष्टि में भी देरी हुई.

98.6 लाख उत्तर पुस्तिकाओं का हुआ मूल्यांकन

CBSE ने बयान जारी कर कहा कि इस वर्ष ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) प्रणाली के तहत 98.6 लाख से अधिक उत्तर पुस्तिकाओं का मूल्यांकन किया गया.

बोर्ड के मुताबिक, छात्रों को उनकी मूल्यांकित उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उपलब्ध कराई गईं, जिसके बाद सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन की प्रक्रिया शुरू की गई.

सीबीएसई ने कहा कि इस नई सुविधा को छात्रों से 'अत्यंत सकारात्मक प्रतिक्रिया' मिली और कम समय में बड़ी संख्या में आवेदन प्राप्त हुए.

स्कैन कॉपी और मूल्यांकन को लेकर उठे सवाल

बोर्ड ने स्वीकार किया कि कुछ छात्रों ने पोर्टल पर भारी ट्रैफिक के दौरान तकनीकी समस्याओं की शिकायत की.

सीबीएसई के अनुसार, 'साथ ही, कुछ छात्रों से व्यस्त समय में पोर्टल तक पहुँचने में कठिनाई, भुगतान की पुष्टि में देरी, और स्कैन की गई प्रतियों को देखने के बाद कुछ चिंताओं, जैसे धुंधले या गायब पृष्ठ, साथ ही मूल्यांकन से संबंधित संदेह, जिनमें उत्तरों पर निशान न होना या गलत निशान होना शामिल हैं, के बारे में प्रतिक्रिया मिली है.'

लगातार निगरानी कर रहा है सीबीएसई

बोर्ड ने कहा कि सभी रिपोर्ट की गई समस्याओं पर लगातार नजर रखी जा रही है और सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं.

सीबीएसई ने अपने बयान में कहा, “अभिभावकों और छात्रों से अनुरोध है कि यदि उन्हें ऐसी कोई समस्या आई है तो वे चिंतित न हों. सत्यापन और पुनर्मूल्यांकन तंत्र का मूल उद्देश्य वास्तविक चिंताओं का व्यवस्थित और निष्पक्ष तरीके से समाधान करना है.”

बोर्ड के अनुसार, पोर्टल पर अधिक ट्रैफिक के कारण कुछ समय के लिए तकनीकी बाधाएं आईं, लेकिन छात्रों को परेशानी न हो, इसके लिए आवश्यक कदम उठाए गए हैं.

आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ाई गई

सीबीएसई ने छात्रों को राहत देते हुए आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि एक दिन बढ़ाकर 24 मई कर दी है.

इसके अलावा बोर्ड ने यह भी कहा है कि उत्तर पुस्तिकाओं की अंतिम स्कैन कॉपी भेजे जाने के बाद पुनर्मूल्यांकन के लिए पोर्टल दो दिनों तक खुला रहेगा.

फीस में भी किया गया बड़ा बदलाव

इस वर्ष सीबीएसई ने शुल्क संरचना में भी बदलाव किया है. अब छात्र 100 रुपये देकर अपनी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन कॉपी प्राप्त कर सकते हैं, जबकि पहले इसके लिए 700 रुपये शुल्क देना पड़ता था.

उत्तर पुस्तिकाओं के सत्यापन का शुल्क भी 500 रुपये से घटाकर 100 रुपये कर दिया गया है. वहीं, पुनर्मूल्यांकन के लिए प्रति प्रश्न 25 रुपये शुल्क तय किया गया है.

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