नई दिल्ली: ऑन-स्क्रीन मार्किंग विवाद के बीच केंद्र सरकार ने CBSE में दो बड़े बदलाव किए हैं। वरिष्ठ IAS अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को बोर्ड का नया अध्यक्ष बनाया गया है। उन्होंने राहुल सिंह की जगह ली है। वहीं वरुण भारद्वाज को नया सचिव नियुक्त किया गया है। उन्होंने हिमांशु गुप्ता का स्थान लिया है। ये नियुक्तियां OSM प्रणाली की जांच के आदेश के कुछ घंटे बाद ही हुई हैं।
लोखंडे प्रशांत सीताराम 2001 बैच के AGMUT कैडर के IAS अधिकारी हैं। अभी तक वे गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव थे। अब उन्हें इसी रैंक पर CBSE की जिम्मेदारी दी गई है। उनकी जगह राहुल सिंह को कृषि मंत्रालय में भेजा गया है। राहुल 1996 बैच के बिहार कैडर के IAS हैं।
नए सचिव वरुण भारद्वाज 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा के अधिकारी हैं। वे शिक्षा मंत्रालय में निदेशक थे। अब केंद्रीय स्टाफिंग योजना के तहत उन्हें CBSE में भेजा गया है। वे 19 सितंबर 2027 तक इस पद पर रहेंगे। हिमांशु गुप्ता 2012 बैच के AGMUT कैडर के IAS थे।
CBSE की बोर्ड परीक्षाओं में OSM प्रणाली को लेकर काफी शिकायतें आई थीं। छात्रों और अभिभावकों ने तकनीकी दिक्कत, पेमेंट में परेशानी और वेरिफिकेशन व री-इवैल्यूएशन में देरी की बात कही थी। इसके बाद सरकार ने क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस. राधा चौहान की अगुवाई में एक सदस्यीय समिति बनाई। यह समिति OSM के लिए सेवाओं की खरीद की जांच करेगी और एक महीने में रिपोर्ट देगी।
चेयरमैन और सेक्रेटरी दोनों का एक साथ बदलना CBSE में हाल के सालों का सबसे बड़ा प्रशासनिक फेरबदल माना जा रहा है। सरकारी आदेश में इन तबादलों को सीधे OSM विवाद से नहीं जोड़ा गया है। लेकिन यह बदलाव उसी दिन हुआ जिस दिन OSM खरीद की जांच का ऐलान किया गया। डिजिटल मूल्यांकन को लेकर बढ़ती आलोचना के बीच सरकार ने यह कदम उठाया है। आने वाले हफ्तों में जांच पर सबकी नजर रहेगी।
गौरतलब है कि कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फेरबदल को "मामला दबाने की कोशिश" बताया। उन्होंने X पर लिखा कि CBSE चेयरमैन और सेक्रेटरी का तबादला हुआ, जांच समिति बनी, लेकिन शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान सुरक्षित हैं। गांधी ने कहा कि अधिकारियों को हटाया गया पर मंत्री को बख्श दिया गया। यह जवाबदेही नहीं है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को बर्खास्त करने और स्वतंत्र न्यायिक जांच की मांग दोहराई। गांधी ने कहा कि अगर प्रधानमंत्री को 18.5 लाख छात्रों की चिंता होती तो धर्मेंद्र प्रधान को पहले ही हटा दिया गया होता। First Updated : Tuesday, 02 June 2026