OSM सिस्टम पर उठे सवालों के बाद CBSE का बड़ा बयान, सुरक्षा खामियों को किया स्वीकार
CBSE के ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठे सवालों के बीच बोर्ड ने सुरक्षा सुधारों की जानकारी दी है. एथिकल हैकर्स और विशेषज्ञों की मदद से सिस्टम को और सुरक्षित बनाने की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.

नई दिल्ली: ऑन-स्क्रीन मार्किंग सिस्टम को लेकर उठे सवालों और लगातार बढ़ती चर्चा के बीच आखिरकार केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने अपनी चुप्पी तोड़ दी है. छात्रों, अभिभावकों और कई तकनीकी जानकारों की ओर से सिस्टम की सुरक्षा को लेकर चिंता जताए जाने के बाद बोर्ड ने साफ किया है कि वह पूरे मामले पर गंभीरता से काम कर रहा है और डिजिटल व्यवस्था को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाने की दिशा में कदम उठा रहा है.
CBSE ने एक आधिकारिक बयान जारी करते हुए बताया कि उसके सेवा प्रदाता के ऑन-स्क्रीन मार्किंग (OSM) पोर्टल में सामने आई तकनीकी कमजोरियों की लगातार समीक्षा की जा रही है. बोर्ड का कहना है कि सार्वजनिक रूप से उठाए गए सवालों को गंभीरता से लेते हुए सुधार की प्रक्रिया तेज कर दी गई है.
We have been closely monitoring the vulnerabilities in the OnMark portal of our service provider that are being flagged in the public domain. An expert team of cybersecurity professionals has been deployed over the last few days from across various arms of the government as well…
— CBSE HQ (@cbseindia29) May 31, 2026
सुरक्षा को मजबूत करने में जुटी विशेषज्ञ टीम
बोर्ड ने जानकारी दी कि पिछले कुछ दिनों से साइबर सुरक्षा के क्षेत्र के विशेषज्ञ लगातार सिस्टम की जांच कर रहे हैं. इस काम में अलग-अलग सरकारी एजेंसियों और भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थानों (IITs) से जुड़े पेशेवर भी शामिल हैं. टीम का मुख्य लक्ष्य पोर्टल के सुरक्षा ढांचे को मजबूत करना और किसी भी संभावित खतरे को खत्म करना है. CBSE के अनुसार, जिन तकनीकी खामियों की पहचान की गई थी, उन्हें ठीक कर दिया गया है. इसके साथ ही सिस्टम में भविष्य में किसी तरह की परेशानी न आए, इसके लिए अतिरिक्त स्तर पर सुरक्षा जांच और सुधार भी जारी हैं.
सीबीएसई ने एथिकल हैकर्स को सराहा
इस पूरे घटनाक्रम के बीच CBSE ने उन लोगों का धन्यवाद किया जिन्होंने सिस्टम में संभावित कमजोरियों की ओर ध्यान दिलाया. बोर्ड ने कहा कि जागरूक नागरिकों और एथिकल हैकर्स ने जिम्मेदारी के साथ अपनी बात सामने रखी, जिससे सुधार की दिशा में मदद मिली. बयान में यह भी बताया गया कि कुछ लोगों से सीधे संपर्क कर उनकी भूमिका की सराहना की गई है. साथ ही बोर्ड ने ऐसे अन्य लोगों को भी आमंत्रित किया है जिन्हें किसी तरह की सुरक्षा समस्या या तकनीकी कमी नजर आई हो.
कैसे शुरू हुआ विवाद?
हालिया दिनों में CBSE के डिजिटल सिस्टम को लेकर चर्चा तब तेज हुई जब 19 वर्षीय एथिकल हैकर निसर्गा अधिकारी ने दावा किया कि कुछ उत्तर पुस्तिकाएं और प्रश्न पत्र ऑनलाइन उपलब्ध हो सकते हैं. यह दावा सामने आने के बाद बोर्ड की ऑन-स्क्रीन मार्किंग प्रणाली और उसके डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर सवाल उठने लगे. इसी के बाद मामले को लेकर जांच और सुरक्षा समीक्षा की मांग बढ़ी और CBSE ने आधिकारिक रूप से स्थिति स्पष्ट करते हुए सुधारात्मक कदमों की जानकारी दी.
इस विवाद में एक और नाम चर्चा में आया- कक्षा 12 के छात्र सार्थक सिद्धांत. उन्होंने बोर्ड के टेंडर दस्तावेजों का अध्ययन करने के बाद कुछ प्रक्रियागत और सुरक्षा संबंधी सवाल उठाए. उनके अनुसार, कुछ पात्रता मानकों में बदलाव और सुरक्षा शर्तों में ढील को लेकर सवाल बनते हैं. हालांकि इन आरोपों पर अंतिम निष्कर्ष जांच और आधिकारिक समीक्षा के बाद ही सामने आएगा. फिलहाल CBSE का कहना है कि उसकी प्राथमिकता छात्रों के डेटा और पूरे मूल्यांकन सिस्टम को सुरक्षित बनाए रखना है.


