पहले CBSE कराता था NEET-JEE, फिर क्यों आई NTA जानिए पूरी कहानी

केंद्र सरकार ने 2017-2018 के बजट में एक स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने का ऐलान किया था। नवंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने NTA के गठन को मंजूरी दी।

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नई दिल्ली: NEET UG 2026 का पेपर लीक होने के बाद परीक्षा रद्द कर दी गई। इससे लाखों छात्रों को बड़ा झटका लगा। 3 मई को देशभर में हुई परीक्षा को रद्द करने के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी सवालों के घेरे में है। छात्र और अभिभावक पूछ रहे हैं कि करोड़ों युवाओं के भविष्य से जुड़ी परीक्षाओं की जिम्मेदारी आखिर NTA को क्यों दी गई। 

NTA की शुरुआत कब हुई?   

दरअसल केंद्र सरकार ने 2017-2018 के बजट में एक स्वतंत्र परीक्षा एजेंसी बनाने का ऐलान किया था। नवंबर 2017 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट ने NTA के गठन को मंजूरी दी।

इसे भारतीय सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1860 के तहत रजिस्टर किया गया। इसके बाद 2018 के अंत से NTA ने अपनी पहली परीक्षा करानी शुरू की। आज NEET, JEE मेन समेत कई बड़ी प्रवेश परीक्षाएं NTA ही कराती है।

CBSE से क्यों छीनी गई जिम्मेदारी   

पहले इंजीनियरिंग और मेडिकल की प्रवेश परीक्षाएं CBSE बोर्ड कराता था। लेकिन बाद में यह काम NTA को सौंप दिया गया। इसके पीछे कई ठोस वजह थीं। 

CBSE पर बढ़ रहा था बोझ    

CBSE का मुख्य काम स्कूली शिक्षा और 10वीं-12वीं की बोर्ड परीक्षा कराना है। NEET, JEE जैसी बड़ी प्रवेश परीक्षाओं की वजह से बोर्ड के मूल काम पर असर पड़ रहा था। संसाधन और समय दोनों बंट रहे थे।

पेपर लीक के मामले बने बड़ी वजह   

2015 में जब CBSE AIPMT करा रहा था तो बड़े पैमाने पर पेपर लीक और नकल की शिकायतें आईं। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा और परीक्षा रद्द करके दोबारा करानी पड़ी। AIPMT ही बाद में NEET बना। इसके बाद 2018 में CBSE की 10वीं और 12वीं के पेपर भी लीक हो गए। लगातार हो रही गड़बड़ियों ने एक अलग एजेंसी की जरूरत को पुख्ता कर दिया।

NTA कैसे काम करता है?     

NTA को एक तकनीक आधारित संस्था के रूप में बनाया गया। इसका गठन सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत हुआ है। इसमें एक चेयरपर्सन होता है और साथ में कई सदस्य होते हैं। NTA को चलाने के लिए शिक्षा मंत्रालय देश के जाने-माने शिक्षाविद को अध्यक्ष चुनता है। 

एक्सपर्ट्स की टीम संभालती है कमान   

NTA की टीम में IIT, IIM और बड़े विश्वविद्यालयों के एक्सपर्ट्स शामिल होते हैं। मकसद यह है कि प्रवेश परीक्षाओं के लिए एक समर्पित, प्रोफेशनल और तकनीकी रूप से मजबूत सिस्टम तैयार हो। ताकि पारदर्शिता बढ़े और पेपर लीक जैसी घटनाएं रोकी जा सकें। 

हालांकि NEET UG 2026 के पेपर लीक के बाद NTA की कार्यप्रणाली पर फिर से सवाल उठ गए हैं। छात्र मांग कर रहे हैं कि सिस्टम को और मजबूत किया जाए ताकि लाखों बच्चों का भविष्य दांव पर न लगे। First Updated : Tuesday, 02 June 2026