Pati Patni Aur Woh Do Review: आयुष्मान खुराना की यह फिल्म पूरी तरह अराजक, लाउड लेकिन मनोरंजक कॉमेडी

आयुष्मान खुराना की ‘पति पत्नी और वो दो’ एक ऐसी फिल्म है, जिसमें कॉमेडी, गलतफहमियां और ओवरड्रामैटिक ट्विस्ट भरपूर मात्रा में देखने को मिलते हैं. फिल्म कई जगह बेतुकी लगती है, लेकिन अपनी अराजक और मजेदार दुनिया के चलते दर्शकों को एंटरटेन करने में सफल रहती है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

पति पत्नी और वो दो रिव्यू: आयुष्मान खुराना स्टारर 'पति पत्नी और वो दो' एक ऐसी फिल्म है जो तर्क से ज्यादा अपनी अराजकता और बेतुके हास्य पर भरोसा करती है. फिल्म में रिश्तों का उलझा हुआ जाल, गलतफहमियां, ओवरड्रामैटिक किरदार और लगातार बढ़ती अफरा-तफरी दर्शकों को एक अलग तरह की कॉमिक दुनिया में ले जाती है. यह फिल्म कई बार बेहद लाउड और अतिरंजित लगती है, लेकिन अपनी ऊर्जा और मनोरंजन के दम पर दर्शकों को बांधे रखने में कामयाब भी रहती है.

निर्देशक मुदस्सर अजीज ने इस फिल्म में कॉमेडी ऑफ एरर्स को छोटे शहर के माहौल, अजीबोगरीब परिस्थितियों और अनोखे किरदारों के साथ पेश किया है. हालांकि कहानी कई जगह बिखरी हुई महसूस होती है, लेकिन फिल्म अपने पागलपन को पूरे आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करती है और यही इसकी सबसे बड़ी खासियत बन जाती है.

उलझनों और गलतफहमियों से भरी कहानी

फिल्म की कहानी प्रयागराज में रहने वाले प्रजापति पांडे के इर्द-गिर्द घूमती है, जो वन विभाग में अधिकारी हैं. उनकी जिंदगी अपनी पत्रकार पत्नी अपर्णा के साथ शांत चल रही होती है, तभी उनकी पुरानी सहपाठी चंचल अचानक उनकी जिंदगी में लौट आती है.

चंचल अपने प्रेमी सनी के साथ भागने की योजना में फंसी होती है और परिस्थितियां ऐसी बनती हैं कि प्रजापति को उसका प्रेमी होने का नाटक करना पड़ता है. इसके बाद कहानी में गलतफहमियों, अफवाहों और रिश्तों की उलझनों का सिलसिला शुरू हो जाता है.

फिल्म की सबसे बड़ी ताकत है इसका पागलपन

'पति पत्नी और वो दो' पूरी तरह अतिशयोक्ति पर आधारित फिल्म है. यहां हर किरदार जरूरत से ज्यादा नाटकीय है और हर घटना सामान्य से कहीं अधिक बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गई है.

फिल्म में तेंदुआ, भेड़िया, नकली रिश्ते, अफवाहें और बेतुके संयोग लगातार कहानी को और ज्यादा अराजक बनाते हैं. कई बार यह सब अविश्वसनीय लगता है, लेकिन फिल्म की खास बात यही है कि यह खुद को गंभीरता से लेने की कोशिश नहीं करती.

आयुष्मान खुराना ने संभाली पूरी फिल्म

आयुष्मान खुराना एक बार फिर छोटे शहर के सीधे-सादे लेकिन परेशान युवक के किरदार में शानदार नजर आते हैं. वह अपने अभिनय से फिल्म की कमजोर पटकथा को भी संभाल लेते हैं.

कभी बेबस तो कभी हास्यास्पद परिस्थितियों में फंसे प्रजापति के रूप में आयुष्मान दर्शकों को लगातार एंटरटेन करते हैं. उनकी कॉमिक टाइमिंग और स्क्रीन प्रेजेंस फिल्म की सबसे मजबूत कड़ी साबित होती है.

सपोर्टिंग कास्ट ने बढ़ाया मनोरंजन

वामिका गब्बी ने अपर्णा के किरदार में प्रभाव छोड़ा है. वहीं सारा अली खान को निर्देशक ने ऐसा किरदार दिया है जिसमें उनकी ओवर-द-टॉप शैली सहज लगती है.

रकुल प्रीत सिंह भी अपनी भूमिका में प्रभावशाली नजर आती हैं, लेकिन फिल्म में सबसे ज्यादा ध्यान आयशा रज़ा खींचती हैं. बुआ-जी के किरदार में उनका हास्य और संवाद अदायगी कई दृश्यों को बेहद मजेदार बना देती है.

इसके अलावा विशाल वशिष्ठ, तिग्मांशु धूलिया और विजय राज भी फिल्म को मजबूत सपोर्ट देते हैं.

फिल्म की कमियां भी हैं साफ नजर

फिल्म की सबसे बड़ी समस्या इसकी जरूरत से ज्यादा लंबी और खिंची हुई कॉमेडी है. कई मजाक बार-बार दोहराए गए लगते हैं और कुछ दृश्य जरूरत से ज्यादा नाटकीय हो जाते हैं.

इसके अलावा समलैंगिक किरदारों का रूढ़िवादी चित्रण भी कई जगह असहज महसूस होता है. कहानी कई बार इतनी बिखर जाती है कि दर्शक तर्क ढूंढना छोड़ देते हैं.

फिर भी क्यों देखी जा सकती है फिल्म?

अगर आप गंभीर फिल्मों और क्राइम थ्रिलर से हटकर हल्की-फुल्की, बिना ज्यादा दिमाग लगाए देखने वाली कॉमेडी फिल्म पसंद करते हैं, तो ‘पति पत्नी और वो दो’ आपको पसंद आ सकती है.

फिल्म अपनी अजीबोगरीब दुनिया, तेज रफ्तार कॉमेडी और कलाकारों की शानदार केमिस्ट्री के दम पर मनोरंजन करने में सफल रहती है. यह परफेक्ट फिल्म नहीं है, लेकिन अपनी पूरी अव्यवस्था के बावजूद दर्शकों को हंसाने की कोशिश ईमानदारी से करती है.

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