पीरियड्स के समय महिलाओं को छुट्टी देने की मांग करने वाली याचिका SC करेगा सुनवाई

हर महीने महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म के समय उठने वाले असहनीय दर्द से आराम के लिए अवकाश की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है।

Nisha Srivastava

Menstrual Leave : हर महीने महिलाओं को होने वाले मासिक धर्म के समय उठने वाले असहनीय दर्द से आराम के लिए अवकाश की मांग करने वाली याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई के लिए तैयार हो गया है। इस मुद्दे को लेकर कोर्ट में याचिका दायर की गई थी, अब कोर्ट 24 फरवरी पर इस मामले की याचिका पर सुनवाई करेगा। वकील शैलेंद्रमणि त्रिपाठी ने हाल ही में सर्वोच्च न्यायालय में एक याचिका दायर की थी, जिसमें महिलाओं, छात्राओं और कामकाजी महिलाओं के लिए मासिक धर्म के समय होने वाले दर्द में छुट्टी देने की मांग की गई थी।

इस याचिका में कहा गया था कि मातृत्व लाभ अधिनियम के नियमों को लागू करने के लिए निरीक्षकों की नियुक्ति भी सुनिश्चित की जाए। याचिका में आगे मांग की गई कि “मातृत्व लाभ अधिनियम के तहत कानून के ये प्रावधान कामकाजी महिलाओं के मातृत्व और मातृत्व को पहचानने और सम्मान देने के लिए संसद या देश के लोगों द्वारा उठाए गए सबसे बड़े कदमों में से एक हैं। लेकिन फिर भी कानून होने के बाद भी इन का सख्ती से पालन नहीं होता है” इस याचिका में सभी राज्य सरकारों को निर्देश देने की मांग थी कि वे पीरियड्स के समय महिलाओं, कामकाजी महिलाओं, छात्राओं को उनके दफ्तरों में छुट्टी दी जाए।

आपको बता दें कि याचिका में ये भी कहा गया कि सरकारें मातृत्व लाभ अधिनियम, 1961 की धारा 14 का अनुपालन करें। अब सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की अध्यक्षता वाली पीठ वकील शैलेंद्र मणि त्रिपाठी द्नारा याचिका पर 24 फरवरी को सुनावई के लिए तैयारी हो गई है। आपको बता दें कि बिहार भारत का मात्र एक ऐसा राज्य है जहां वर्ष 1992 से महिलाओं को दो दिन का मासिक धर्म दर्द अवकाश प्रदान कर रहा है।

इसके अलावा याचिका में कहा गया कि कुछ भारतीय कंपनियां अपने ऑफिस में काम करने वाली मिलाओं को मासिक धर्म के समय पीरियड लीव ऑफर करती हैं। इनमें जोमैटो, बायजूज, स्विगी, मैग्जटर, इंडस्ट्री, एआरसी, मातृभूमि, फ्लाईमायबिज और गुजूप पेड शामिल हैं।

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