जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले को लेकर चल रही राजनीतिक बयानबाज़ी ने नया मोड़ ले लिया है, जब हमले में बचे एक पीड़ित की पत्नी ने नेताओं से आग्रह किया कि वे इस त्रासदी को राजनीतिक रंग न दें. यह अपील महाराष्ट्र कांग्रेस नेता विजय वडेट्टीवार के उस बयान के बाद आई है, जिसमें उन्होंने संदेह जताया था कि क्या आतंकवादियों ने वास्तव में धर्म पूछकर लोगों की हत्या की थी.
22 अप्रैल को हुए इस आतंकी हमले में महाराष्ट्र के छह पर्यटकों की जान चली गई थी. इन मृतकों में पुणे निवासी संतोष जगदाले भी शामिल थे, जिनकी पत्नी प्रगति जगदाले हमले में बच गईं. मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा, “कृपया इस घटना को राजनीति का माध्यम न बनाएं. हम खुद इस भयावह हमले के गवाह हैं. हम जानते हैं कि आतंकवादियों ने क्या कहा और क्या किया. हमने पहले ही उनकी बातें साझा की हैं.”
प्रगति ने अत्यंत भावुक स्वर में कहा कि इस आतंकी घटना के समय जो कुछ हुआ, उसे केवल वही लोग समझ सकते हैं जिन्होंने वह भयावह क्षण झेला है. जगदाले ने कहा कि हमने वह आतंक देखा है, सुना है कि उन्होंने किन शब्दों का प्रयोग किया और किन इरादों से आए थे. आतंकवादी निर्ममता से हत्या करने के इरादे से आए थे और उन्होंने ऐसा किया.
प्रगति ने आगे कहा, “मैं सभी नेताओं से मानवीय आधार पर अपील करती हूं कि वे हमारे जख्मों को राजनीतिक हथियार न बनाएं. हमारी भावनाओं से न खेलें. परिवार उस सदमे से अभी भी बाहर नहीं निकल पाया है. जब भी आंखें बंद करती हूं, एक बंदूकधारी सामने खड़ा दिखता है. ठीक से नींद तक नहीं आ रही.” प्रगति ने यह भी जानकारी दी कि उनकी बेटी असावरी इस घटना के बाद बुरी तरह डरी हुई है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सरकारी मदद से वह अपना जीवन दोबारा संवार सकेगी.
सीएम देवेंद्र फडणवीस ने घोषणा की कि हमले में मारे गए छह नागरिकों के परिवारों को महाराष्ट्र सरकार 50-50 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देगी. इसके अलावा, मृतकों के परिजनों को सरकारी नौकरी भी प्रदान की जाएगी. फडणवीस ने कहा कि यह न केवल हमारी जिम्मेदारी है, बल्कि हमारी नैतिक प्रतिबद्धता भी है कि हम इन परिवारों के पुनर्वास में हरसंभव सहायता करें.
कांग्रेस विधायक दल के नेता विजय वडेट्टीवार ने सोमवार को मीडिया से बातचीत में कहा, “कहा जा रहा है कि आतंकवादियों ने धर्म पूछा और उसके आधार पर लोगों को मारा. क्या आतंकियों के पास इतना समय होता है कि वे किसी के पास जाकर कान में कुछ कहें? यह सुनियोजित प्रचार जैसा लगता है.”
उनकी इस टिप्पणी के बाद सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी. देवेंद्र फडणवीस ने इसे पीड़ित परिवारों के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा बताया और कहा कि ऐसे बयानों से न केवल मृतकों का अपमान होता है, बल्कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई को भी कमजोर किया जाता है. First Updated : Tuesday, 29 April 2025