कांग्रेस सांसद शशि थरूर इन दिनों एक सर्वदलीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए विभिन्न देशों की यात्रा पर हैं. यह यात्रा भारत के आतंकवाद-विरोधी अभियानों के लिए वैश्विक समर्थन जुटाने और हाल ही में किए गए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के उद्देश्यों को साझा करने के मकसद से की जा रही है. इसी क्रम में वे ब्राजील पहुंचे, जहां उन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत की स्थिति को मजबूती से रखा.
ब्राजील में एक संवाद के दौरान थरूर ने खुलासा किया कि पाकिस्तान और चीन ने मिलकर यह सुनिश्चित किया कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रेस बयान में लश्कर-ए-तैयबा के मुखौटा संगठन ‘द रेजिस्टेंस फ्रंट’ (TRF) का नाम न आए. थरूर का आरोप है कि चीन ने हर बार पाकिस्तान की ढाल बनकर काम किया और UNSC की प्रतिबंध समिति में TRF पर कार्रवाई को रोक दिया.
थरूर ने कहा कि भारत ने TRF के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र को बार-बार ठोस साक्ष्य सौंपे. उन्होंने यह भी बताया कि TRF ने कई आतंकवादी हमलों की जिम्मेदारी खुलेआम ली थी और सोशल मीडिया पर इस बात का प्रचार किया. लेकिन जब इस दावे का असर बढ़ने लगा, तो पाकिस्तान में बैठे इसके कर्ताधर्ताओं ने TRF से वह बयान हटवाया. बावजूद इसके, वह पोस्ट करीब 24 घंटे तक इंटरनेट पर मौजूद रही.
थरूर ने यह भी कहा कि भारत ने विशेष रूप से TRF का नाम UNSC के प्रेस स्टेटमेंट में शामिल करने की मांग की थी. लेकिन पाकिस्तान ने चीन की मदद से यह नाम पूरी तरह हटवा दिया. न सिर्फ नाम हटाया गया, बल्कि किसी भी रूप में TRF का जिक्र भी नहीं किया गया. उन्होंने इसे चीन-पाकिस्तान की गहरी साजिश और संयुक्त राष्ट्र की निष्पक्षता पर चोट बताया.
थरूर ने पाकिस्तान पर निशाना साधते हुए कहा कि वह आतंकवाद को राज्य नीति का एक हिस्सा बना चुका है. उन्होंने बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मारे गए आतंकियों के जनाजों में पाकिस्तान के उच्च स्तर के पुलिस व सैन्य अधिकारियों की उपस्थिति इस मिलीभगत का पुख्ता सबूत है.
थरूर की यह यात्रा भारत की उस कूटनीतिक पहल का हिस्सा है जिसमें विभिन्न देशों को यह दिखाने की कोशिश की जा रही है कि भारत की आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई केवल अपनी सीमाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह पूरी दुनिया की सुरक्षा के लिए भी जरूरी है. First Updated : Tuesday, 03 June 2025