Lal Bahadur Shastri Jayanti: भारत के दूसरे प्रधानमंत्री के बारे में 10 ऐसी बातें जो आप शायद नहीं जानते

Lal Bahadur Shastri Jayanti: आज 2 अक्टूबर को भारत अपने दूसरे प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहा है. सरल जीवन, सादगी और देशभक्ति के प्रतीक शास्त्री जी ने जय जवान, जय किसान जैसे प्रेरक नारे देकर सैनिकों और किसानों के योगदान को सम्मानित किया. उनके ईमानदार नेतृत्व और आम जनता के साथ गहरे संबंध ने उन्हें हमेशा यादगार बना दिया.

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Lal Bahadur Shastri Jayanti: आज, 2 अक्टूबर को भारत अपने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती मना रहा है. सरल जीवन, संयम और अडिग देशभक्ति के प्रतीक शास्त्री ने पंडित जवाहरलाल नेहरू के बाद भारत की बागडोर संभाली और कठिन समय में ईमानदारी और न्यायप्रिय नेतृत्व के लिए याद किए जाते हैं. उन्होंने न केवल सादगी और नैतिक राजनीति का परिचय दिया, बल्कि आम जनता से गहरा संबंध कायम कर देश को एक नई पहचान भी दी.

लाल बहादुर शास्त्री का नाम आज भी उनके ऐतिहासिक नारे "जय जवान, जय किसान" के कारण जिंदा है, जो सैनिकों और किसानों के योगदान को सम्मानित करता है. आइए जानते हैं भारत के इस महापुरुष के जीवन से जुड़े 10 दिलचस्प और प्रेरक तथ्य...

श्रीवास्तव था उपनाम

लाल बहादुर शास्त्री का जन्म लाल बहादुर श्रीवास्तव के रूप में हुआ था. उन्होंने स्कूल में जातिवाद का विरोध करते हुए अपना जाति-आधारित उपनाम "श्रीवास्तव" छोड़ दिया. बाद में 1925 में काशी विद्यापीठ विश्वविद्यालय से दर्शन और नैतिकता में डिग्री पूरी करने के बाद उन्हें "शास्त्री" (विद्वान) की उपाधि मिली.

नदी को पार करके जाते थे स्कूल

शास्त्री जी अपने स्कूल के दिनों में प्रतिदिन गंगा नदी को पार करते थे, सिर पर बैग और कपड़े रखकर. यह उनके सरल और संघर्षशील जीवन का परिचायक था.

पुलिस और भीड़ नियंत्रण में नवाचार

उत्तर प्रदेश में पुलिस और परिवहन मंत्री रहते हुए शास्त्री जी लाठी चार्ज के बजाय पानी की फुहार के माध्यम से भीड़ को नियंत्रित करने वाले पहले व्यक्ति थे.

महिला सशक्तिकरण की पहल

परिवहन मंत्री के रूप में उन्होंने महिलाओं को कंडक्टर के रूप में नियुक्त करने की पहल की, जो उस समय के लिए क्रांतिकारी कदम था.

दिया "जय जवान, जय किसान" का नारा

1965 में पाकिस्तान के साथ युद्ध के दौरान देश को खाद्य संकट का सामना करना पड़ा. नागरिकों को प्रेरित करने और आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए शास्त्री जी ने उपवास का आह्वान किया और "जय जवान, जय किसान" का नारा दिया.

अनुचित पदोन्नति का विरोध

शास्त्री जी अपने निजी जीवन में भी सादगी के प्रतीक थे. जब उनके पुत्र को किसी अन्यायपूर्ण पदोन्नति मिली, तो उन्होंने तुरंत आदेश जारी कर इसे रद्द करवा दिया.

भ्रष्टाचार पर कड़ा कदम

1962 में भारत के गृहमंत्री रहते हुए शास्त्री जी ने भ्रष्टाचार से निपटने के लिए पहला समिति गठन किया.

व्हाइट रिवॉल्यूशन और दूध उत्पादन

शास्त्री जी ने व्हाइट रिवॉल्यूशन के विचार को अपनाया, अमूल डेयरी को समर्थन दिया और 1965 में नेशनल डेयरी डेवलपमेंट बोर्ड (NDDB) की स्थापना की. इससे भारत दुनिया के सबसे बड़े दूध उत्पादक देशों में शामिल हुआ.

निधन के बाद भी जारी रखा कार की किस्त का भुगतान

शास्त्री जी के निधन के बाद उनके परिवार ने पाया कि उन्होंने प्रधानमंत्री रहते हुए खरीदी गई Fiat कार का क़िस्त भुगतान जारी रखा था. उनके निधन के बाद यह ऋण उनकी पत्नी ललिता शास्त्री ने अपनी पेंशन से चुकाया.

भारत रत्न का पहला पोस्टह्यूमस सम्मान

उनकी सेवाओं और योगदान को देखते हुए शास्त्री जी को भारत रत्न से सम्मानित किया गया, जो भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान है. First Updated : Thursday, 02 October 2025