नक्सलवाद खत्म होने से ठीक 24 घंटे पहले 9 नक्सलियों ने किया सरेंडर, एक नक्सली पर है दो विधायकों की हत्या का आरोप

आंध्र प्रदेश में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है. विजयवाड़ा में 9 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं. नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की समयसीमा पूरी होने से महज 24 घंटे पहले यह कामयाबी मिली है.

Sonee Srivastav

विजयवाड़ा: नक्सलवाद को पूरी तरह खत्म करने की समयसीमा पूरी होने से महज 24 घंटे पहले आंध्र प्रदेश में सुरक्षा बलों को बड़ी कामयाबी मिली है. विजयवाड़ा में 9 नक्सली आत्मसमर्पण कर चुके हैं. इनमें एक शीर्ष माओवादी कमांडर भी शामिल है, जो पिछले 36 साल से अंडरग्राउंड जीवन बिता रहा था. 

यह घटना नक्सल समस्या के खिलाफ चल रही सरकार की मुहिम को मजबूती देगी. अब इन सभी नक्सलियों को मुख्यधारा में लाने और उन्हें नई जिंदगी देने का काम शुरू किया जाएगा.

36 साल अंडरग्राउंड रहा कमांडर सुरेश

सरेंडर करने वालों में सबसे चर्चित नाम चेल्लूरी नारायण राव उर्फ सुरेश का है. यह माओवादी संगठन CPI (माओवादी) की सेंट्रल कमेटी का सदस्य और आंध्र-ओडिशा बॉर्डर स्पेशल जोनल कमेटी का सचिव था. सुरेश पर दो विधायकों की हत्या के गंभीर आरोप भी लगे हैं. 36 साल तक जंगल और छिपकर रहने के बाद अब वह सरेंडर कर चुका है.

बाकी 8 नक्सली छत्तीसगढ़ और ओडिशा के विभिन्न इलाकों से है. इनमें प्लेटून कमांडर और एरिया कमेटी के सदस्य शामिल है. सभी ने आंध्र प्रदेश के पुलिस महानिदेशक (DGP) हरीश कुमार गुप्ता के सामने आत्मसमर्पण किया.

सरकार की पुनर्वास नीति और इनाम

आंध्र प्रदेश सरकार की सरेंडर और पुनर्वास नीति के तहत इन नक्सलियों को आर्थिक मदद और नई शुरुआत का मौका मिलेगा. कमांडर सुरेश को 25 लाख रुपये की राशि दी जाएगी. बाकी सदस्यों को उनकी रैंक के हिसाब से 1 लाख से 5 लाख रुपये तक इनाम मिलेगा. तुरंत राहत के रूप में DGP ने सभी 9 नक्सलियों को 20,000 रुपये नकद सौंपे हैं. सरकार का लक्ष्य है कि ये पूर्व नक्सली कौशल प्रशिक्षण लेकर सामान्य जीवन जी सकें और समाज का हिस्सा बनें.

नक्सलवाद के खिलाफ अंतिम दौर

केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक नक्सलवाद को पूरी तरह समाप्त करने की डेडलाइन तय की है. इस समयसीमा से ठीक पहले यह सामूहिक सरेंडर सुरक्षा बलों की रणनीति की सफलता को दिखाता है. पिछले कुछ वर्षों में नक्सली संगठनों की ताकत काफी कम हुई है. 

कई शीर्ष कमांडर या तो मारे जा चुके हैं या सरेंडर कर चुके हैं. आंध्र प्रदेश, छत्तीसगढ़ और ओडिशा जैसे प्रभावित राज्यों में सुरक्षा बल लगातार दबाव बनाए हुए हैं. यह सरेंडर नक्सल प्रभावित इलाकों के लोगों के लिए राहत की खबर है. सरकार उम्मीद कर रही है कि ऐसे और मामले सामने आएंगे, जिससे नक्सल समस्या का अंत जल्दी हो सकेगा.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो