मुंबई: हैदराबाद से सांसद और एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के एक बयान ने सियासी हलकों में नई बहस छेड़ दी है. ओवैसी द्वारा यह कहे जाने के बाद कि “एक दिन हिजाब पहनने वाली महिला भारत की प्रधानमंत्री बनेगी”, भाजपा और एआईएमआईएम के बीच तीखी जुबानी जंग शुरू हो गई है. भाजपा नेताओं ने इस बयान पर कड़ा विरोध जताते हुए इसे भारत की सांस्कृतिक और राजनीतिक परंपराओं से जोड़कर देखा है, जबकि एआईएमआईएम इसे संविधान से जुड़ा अधिकार बता रही है.
दरअसल, मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य हिस्सों में होने वाले स्थानीय निकाय चुनावों को देखते हुए असदुद्दीन ओवैसी राज्यभर में प्रचार कर रहे हैं. इसी दौरान सोलापुर में आयोजित एक जनसभा में उन्होंने भारतीय संविधान का हवाला देते हुए कहा कि भारत का संविधान किसी भी नागरिक को, धर्म या पहनावे से परे, प्रधानमंत्री बनने की अनुमति देता है. उन्होंने पाकिस्तान के संविधान की तुलना करते हुए कहा कि वहां केवल एक विशेष धर्म का व्यक्ति ही प्रधानमंत्री बन सकता है, जबकि भारत में ऐसी कोई पाबंदी नहीं है.
ओवैसी ने अपने भाषण में कहा, “बाबासाहेब आंबेडकर के बनाए संविधान के तहत कोई भी भारतीय नागरिक प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री या महापौर बन सकता है. मेरा सपना है कि एक दिन इस देश की प्रधानमंत्री हिजाब पहनने वाली बेटी बने.” उनके इस बयान को समर्थकों ने समावेशी सोच का प्रतीक बताया, तो विरोधियों ने इसे तुष्टीकरण की राजनीति करार दिया.
भाजपा नेताओं ने ओवैसी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया दी. महाराष्ट्र सरकार में मंत्री और भाजपा नेता नितेश राणे ने कहा कि भारत में इस तरह की सोच संभव नहीं है और जो लोग ऐसा सपना देखते हैं, उन्हें पाकिस्तान के शहरों इस्लामाबाद या कराची जाना चाहिए. उन्होंने यह भी कहा कि भारत की बहुसंख्यक आबादी हिंदू है और यहां ऐसी राजनीति नहीं चलेगी.
नितेश राणे के बयान पर एआईएमआईएम के प्रवक्ता वारिस पठान ने पलटवार करते हुए कहा कि ओवैसी के बयान में कुछ भी असंवैधानिक नहीं है. उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय संविधान हर नागरिक को समान अधिकार देता है और किसी के पहनावे के आधार पर उसके राजनीतिक अधिकार नहीं छीने जा सकते. पठान ने सवाल उठाया कि अगर संविधान इसकी अनुमति देता है, तो इसमें आपत्ति किस बात की है.
भाजपा प्रवक्ता शहजाद पूनावाला ने ओवैसी को चुनौती देते हुए कहा कि अगर वे वाकई इस विचारधारा में विश्वास रखते हैं, तो पहले अपनी पार्टी की अध्यक्ष किसी हिजाब या बुर्का पहनने वाली महिला को बनाकर दिखाएं. उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बनने के लिए पहले लोकतांत्रिक तरीके से जनता का विश्वास जीतना जरूरी है.
गौरतलब है कि हिजाब का मुद्दा पिछले कुछ वर्षों से देश में विवाद का विषय रहा है. कई राज्यों में शैक्षणिक संस्थानों में हिजाब पहनने को लेकर बहस और विरोध देखने को मिला है. ओवैसी के बयान के बाद यह मुद्दा एक बार फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है, जहां एक ओर संविधान और समान अधिकारों की बात हो रही है, वहीं दूसरी ओर इसे सांस्कृतिक और राजनीतिक पहचान से जोड़कर देखा जा रहा है.
First Updated : Saturday, 10 January 2026