पाकिस्तान से महाकुंभ पहुंचा 68 हिंदू श्रद्धालुओं का एक जत्था, लगाई आस्था की डुबकी, बोले हमें अपनी सनातन धर्म विरासत पर गर्व
उन्होंने कहा कि "मैं पहली बार भारत और महाकुंभ में आई हूं। यहां अपनी संस्कृति को देखना एक दिव्य अनुभव है। हम सिंध में मुसलमानों के बीच पैदा हुए और पले-बढ़े। मीडिया में दिखाए गए चित्रण के विपरीत, वहाँ हिंदुओं के साथ बहुत ज़्यादा भेदभाव नहीं होता। लेकिन भारत में अपनी विरासत को देखना एक अनूठा अनुभव है।"

महाकुंभ की आध्यात्मिक भव्यता से आकर्षित होकर पाकिस्तान के सिंध प्रांत से 68 हिंदू श्रद्धालुओं का एक समूह प्रयागराज पहुंचा। जहां पर संगम में पवित्र डुबकी लगाकर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। उत्तर प्रदेश सूचना विभाग के अनुसार, श्रद्धालुओं ने गंगा, यमुना और पौराणिक सरस्वती के पवित्र संगम पर अपने पूर्वजों के लिए प्रार्थना करते हुए अनुष्ठान किया।
हरिद्वार में की 480 पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित
समूह के साथ आए महंत रामनाथ ने कहा कि वे पहले हरिद्वार गए थे, जहां उन्होंने महाकुंभ में आने से पहले लगभग 480 पूर्वजों की अस्थियां विसर्जित की थीं और अनुष्ठान किए थे। सेक्टर 9 स्थित श्री गुरु कार्ष्णि शिविर में बोलते हुए सिंध निवासी गोबिंद राम मखेजा ने पीटीआई को बताया, "जब से हमने पिछले दो या तीन महीनों में महाकुंभ के बारे में सुना है, तब से हमारे अंदर वहां जाने की तीव्र इच्छा थी। हम खुद को वहां आने से रोक नहीं सके। उन्होंने कहा कि में अपनी सनातन धर्म विरासत पर गर्व है।
पिछले साल 250 लोग आए थे प्रयागराज
उन्होंने कहा कि "पिछले साल अप्रैल में पाकिस्तान से 250 लोग प्रयागराज आए और गंगा में डुबकी लगाई। इस बार सिंध के छह जिलों - घोटकी, सुक्कुर, खैरपुर, शिकारपुर, करकोट और जटाबल - से 68 लोग आए हैं, जिनमें से करीब 50 पहली बार आए हैं।" अपने अनुभव का वर्णन करते हुए मखेजा ने कहा, "यह एक खुशी और अभिभूत करने वाला एहसास है। इसे व्यक्त करने के लिए मेरे पास शब्द नहीं हैं। कल हम एक और पवित्र डुबकी लगाएंगे। यहां आकर हमें अपनी सनातन धर्म विरासत पर गर्व होता है।" घोटकी की 11वीं कक्षा की छात्रा सुरभि ने कहा कि वह पहली बार भारत और महाकुंभ में आई है। उन्होंने बताया, "पहली बार मैं अपने धर्म को गहराई से समझ पा रही हूं और उसका अनुभव कर पा रही हूं। यह अद्भुत अनुभव है।"


