नेतन्याहू ने युद्धविराम को किया दरकिनार! हिजबुल्लाह पर बरसाए बम, दहशत में मुस्लिम देश
इजरायल और लेबनान के बीच तनाव फिर से चरम पर पहुंच गया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्धविराम की परवाह किए बिना हिजबुल्लाह के खिलाफ तगड़ा एक्शन लिया है. इजरायली वायुसेना ने लेबनान में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर जबरदस्त बमबारी की, जिससे पूरे क्षेत्र में दहशत फैल गई है.

इजरायल और लेबनान के बीच जारी तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है. प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने युद्धविराम की परवाह किए बिना हिज़बुल्लाह के खिलाफ बड़ा कदम उठाया है. इजरायली वायुसेना ने लेबनान में हिज़बुल्लाह के ठिकानों पर ताबड़तोड़ बमबारी कर दी, जिससे पूरे इलाके में दहशत का माहौल बन गया है.
इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने दावा किया है कि यह हमला हिज़बुल्लाह के हथियार डिपो पर किया गया है, जहां सीरिया से लाई गई अवैध हथियारों की खेप जमा की जा रही थी. यह हमला उस वक्त हुआ जब दोनों देशों के बीच 18 फरवरी तक युद्धविराम का समझौता लागू था. इस हमले के बाद अब युद्धविराम टूटने की आशंका और भी बढ़ गई है.
हिजबुल्लाह के खिलाफ क्यों बरसाए बम?
इजरायल ने हिज़बुल्लाह पर सीरिया के रास्ते हथियारों की तस्करी करने और अपनी सैन्य शक्ति बढ़ाने का आरोप लगाया है. इजरायल का कहना है कि यह सीजफायर का सीधा उल्लंघन है, जिसके चलते उसके पास हमला करने के अलावा कोई और विकल्प नहीं बचा. IDF ने अपने आधिकारिक बयान में कहा, "युद्धविराम का मतलब होता है कि दोनों पक्ष किसी भी तरह की लड़ाई बंद करने के लिए राजी हों. लेकिन अगर कोई एक पक्ष इसे तोड़ता है, तो दूसरे पक्ष को भी जवाब देने का हक है."
लितानी नदी के पास हिज़बुल्लाह के ठिकाने तबाह
इजरायली वायुसेना ने लितानी नदी के पास स्थित हिज़बुल्लाह के दो सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. यह वही इलाका है जहां से संगठन अपनी सैन्य गतिविधियों का संचालन करता था. इजरायल ने दावा किया है कि उसने इन ठिकानों पर कई बड़े हमले किए, जिससे हिज़बुल्लाह को भारी नुकसान हुआ है.
मुस्लिम देशों में दहशत का माहौल
इजरायल के इस हमले के बाद पूरे अरब जगत में हड़कंप मच गया है. मुस्लिम देशों में इस हमले को लेकर आक्रोश बढ़ रहा है. पहले से ही गाजा पट्टी में चल रहे संघर्ष के बीच इजरायल का यह कदम मध्य पूर्व में एक और बड़े टकराव का संकेत दे रहा है.
क्या अब युद्धविराम का कोई मतलब नहीं?
युद्धविराम लागू होने के बावजूद इजरायल द्वारा की गई यह कार्रवाई यह सवाल खड़ा कर रही है कि क्या अब इस संघर्ष विराम का कोई मतलब बचा है? अगर दोनों पक्ष लगातार एक-दूसरे पर हमले करते रहेंगे, तो यह शांति प्रक्रिया के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है. अब देखने वाली बात यह होगी कि लेबनान और हिज़बुल्लाह इस हमले का क्या जवाब देते हैं और क्या यह संघर्ष एक बार फिर से खुली जंग में तब्दील होगा.


