क्या है ‘कोरियन लवर गेम’? बच्चों के लिए खतरा बन रही ऑनलाइन गेमिंग, माता-पिता ऐसे रहें सतर्क

गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों ने कथित तौर पर ‘कोरियन लवर’ नामक टास्क-बेस्ड ऑनलाइन गेम के प्रभाव में आकर आत्महत्या कर ली. यह घटना ऑनलाइन गेमिंग के खतरों और बच्चों की डिजिटल सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करती है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: गाजियाबाद की भारत सिटी सोसाइटी में देर रात एक दर्दनाक घटना ने सबको झकझोर दिया. करीब 2:30 बजे 16, 14 और 12 साल की तीन बहनों ने नौवीं मंजिल से कूदकर अपनी जान दे दी. शुरुआती जांच में सामने आया है कि वे एक खतरनाक ऑनलाइन गेम के जाल में फंस गई थीं, जिसे ‘कोरियन लवर’ नाम से जाना जा रहा है. इस घटना ने एक बार फिर साफ कर दिया है कि डिजिटल दुनिया कितनी ज्यादा खतरनाक हो सकती है. 

क्या है ‘कोरियन लवर’ गेम?

यह कोई सामान्य वीडियो गेम नहीं, बल्कि चैट के जरिए चलने वाला टास्क-बेस्ड गेम है. ऐसे गेम आमतौर पर व्हाट्सऐप, टेलीग्राम या इंस्टाग्राम जैसे प्लेटफॉर्म के जरिए फैलते हैं. गेम की शुरुआत में कोई अनजान व्यक्ति दोस्ती करता है, फिर प्यार का इजहार करता है और धीरे-धीरे भरोसा जीत लेता है.

इसके बाद रोज छोटे-छोटे टास्क दिए जाते हैं, जैसे सेल्फी भेजना या कोई खास मैसेज लिखना. इन टास्क का सबूत फोटो या वीडियो के रूप में मांगा जाता है. समय के साथ टास्क पर्सनल, शर्मनाक या जोखिम भरे होते जाते हैं. इमोशनल दबाव, रिश्ता खत्म करने की धमकी या सच्चे प्यार को साबित करने की बात कहकर बच्चों को फंसाया जाता है. अंत में आखिरी चुनौती बेहद खतरनाक होती है.

क्यों खतरनाक हैं ऐसे गेम?

टीनएजर्स अक्सर इमोशनल रूप से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं. नकली पहचान और झूठे वादों के जरिए उन्हें भरोसे में लिया जाता है. जब तक बच्चों को खतरे का एहसास होता है, तब तक वे मानसिक दबाव में आ चुके होते हैं. ऐसे गेम के अंत में अक्सर बच्चों को मौत का टास्क दिया जाता है. 

ऑनलाइन गेमिंग हो सकती है खतरनाक

ऑनलाइन गेमिंग मनोरंजन का साधन हो सकता है, लेकिन इसमें कई जोखिम भी हैं. इसमें लत लगना, साइबर बुलिंग, धोखाधड़ी, अजनबियों से संपर्क और मानसिक स्वास्थ्य पर असर जैसे खतरे आम होते हैं. इसलिए बच्चों की ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखना बहुत जरूरी है.

बच्चों की सुरक्षा के लिए जरूरी कदम

माता-पिता को बच्चों के गेम खेलने के समय की सीमा तय करनी चाहिए. दिन में केवल एक-दो घंटे ही गेमिंग की अनुमति दें और पढ़ाई या रात के समय इससे दूर रखें. फोन, कंप्यूटर या गेम कंसोल में उपलब्ध पेरेंटल कंट्रोल का इस्तेमाल करें. अनजान लोगों से चैट की सुविधा बंद रखें और किसी भी तरह की ऑनलाइन खरीदारी पर रोक लगाएं.

बच्चों को समझाएं कि वे अपना नाम, पता या निजी जानकारी किसी से साझा न करें. अगर कोई ऑनलाइन परेशान करे तो तुरंत रिपोर्ट करें, स्क्रीनशॉट लें और उसे ब्लॉक कर दें. सबसे जरूरी बात यह है कि बच्चों के साथ खुलकर बातचीत करें. उन्हें यह भरोसा दें कि किसी भी परेशानी में वे आपसे बात कर सकते हैं.

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