ब्लू व्हेल से कोरियन लवर तक, कैसे ऑनलाइन चैलेंज मासूम जिंदगियों के दुश्मन बन रहे हैं?
गाजियाबाद में तीन सगी बहनों द्वारा की गई आत्महत्या को एक खतरनाक ऑनलाइन गेम से जोड़ा जा रहा है. हालांकि इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है. यह मामला एक बार फिर ऑनलाइन चैलेंज और सोशल मीडिया ट्रेंड से बच्चों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े करता है.

ऑनलाइन दुनिया में तेजी से फैलते गेम्स और चैलेंज कई बार मनोरंजन की सीमा पार कर जानलेवा साबित हो जाते हैं. बीते कुछ वर्षों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जहां डिजिटल प्लेटफॉर्म पर चल रहे खतरनाक टास्क लोगों की मौत की वजह बने. इस तरह के मामलों में सबसे चर्चित नाम रहा है ‘ब्लू व्हेल चैलेंज’, जिसने दुनियाभर में सनसनी मचा दी थी.
कोरियन लवर गेम से जुड़ा मामला
अब ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ा एक और दर्दनाक मामला सामने आया है. उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद स्थित भारत सिटी सोसाइटी में तीन सगी बहनों ने कथित तौर पर नौवीं मंजिल से कूदकर आत्महत्या कर ली. शुरुआती जांच में आशंका जताई जा रही है कि यह कदम एक ऑनलाइन ‘कोरियन लवर गेम’ से जुड़ा हो सकता है. हालांकि, पुलिस या प्रशासन की ओर से अभी इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है.
मृतक बच्चियों के पिता ने मीडिया से बातचीत में बताया कि उन्हें इस बात की कोई जानकारी नहीं थी कि उनकी बेटियां किसी खतरनाक ऑनलाइन गेम का हिस्सा हैं. उन्होंने कहा कि उनकी बेटियां एक ऐसे ऑनलाइन गेम से जुड़ी थीं, जिसमें खिलाड़ियों को एक के बाद एक टास्क पूरे करने होते थे. कुल मिलाकर इसमें 50 टास्क बताए जा रहे हैं. पिता के मुताबिक, उनकी 14 वर्षीय बेटी इस गेम में लीडर की भूमिका में थी और तीनों बहनें साथ मिलकर इसे खेल रही थीं.
उन्होंने बताया कि बच्चियों ने घर में कभी इस गेम को लेकर कोई चर्चा नहीं की और न ही किसी को अंदाजा होने दिया कि वे किसी ऐसे चैलेंज में शामिल हैं. परिवार के लिए यह घटना पूरी तरह अप्रत्याशित और सदमे से भरी हुई है. जब भी ऑनलाइन टास्क या जानलेवा चैलेंज की बात होती है तो सबसे पहले ब्लू व्हेल चैलेंज का जिक्र सामने आता है. भारत में वर्ष 2017 के दौरान इस ट्रेंड से जुड़े कई मामले रिपोर्ट हुए थे. उस समय दावा किया गया था कि कुछ किशोरों ने इस चैलेंज के प्रभाव में आकर आत्महत्या की या आत्महत्या का प्रयास किया.
ब्लू व्हेल चैलेंज
अगस्त 2017 में एक छात्र का मामला सामने आया था, जिसने ब्लू व्हेल चैलेंज के सभी 50 टास्क अपनी स्कूल डायरी में लिखे थे. बाद में उसने खुद को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की थी. इसके अलावा मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से भी ऐसे मामले सामने आए थे, जिससे पूरे देश में चिंता का माहौल बन गया था.
असल में ब्लू व्हेल कोई पारंपरिक मोबाइल गेम नहीं था, बल्कि यह एक ऑनलाइन चैलेंज ट्रेंड था. इसमें हिस्सा लेने वाले व्यक्ति को लगभग 50 दिनों तक अलग-अलग टास्क पूरे करने के लिए कहा जाता था. शुरुआत में ये टास्क आसान होते थे, लेकिन धीरे-धीरे खतरनाक और जानलेवा बनते चले जाते थे. कई टास्क ऐसे थे, जिनमें खुद को चोट पहुंचाने या जान जोखिम में डालने जैसी बातें शामिल थीं.
किकी चैलेंज
ब्लू व्हेल के बाद 2018 में ‘किकी चैलेंज’ भी काफी वायरल हुआ. इस ट्रेंड में लोग चलती कार से उतरकर सड़क पर डांस करते थे और उसका वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट करते थे. इस चैलेंज के चलते कई लोग गंभीर रूप से घायल हुए. इसकी शुरुआत एक वायरल वीडियो से हुई थी, जिसे अमेरिकी कॉमेडियन शिगी ने पोस्ट किया था.
मोमो चैलेंज
इसी साल ‘मोमो चैलेंज’ भी चर्चा में आया. इसमें दावा किया गया कि एक डरावनी प्रोफाइल फोटो वाला यूजर बच्चों को मैसेज भेजकर उन्हें टास्क पूरा करने के लिए उकसाता है. इन टास्क में खुद को नुकसान पहुंचाने जैसी बातें भी शामिल थीं. हालांकि, इससे किसी मौत की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी, लेकिन पुलिस और प्रशासन ने लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी जरूर दी थी.
विशेषज्ञों के मुताबिक, ऐसे गेम्स या चैलेंज किसी ऐप स्टोर पर उपलब्ध नहीं होते. ये आमतौर पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर बने पेज, सीक्रेट ग्रुप या मैसेजिंग ऐप्स के जरिए संचालित होते हैं. खिलाड़ियों को निजी मैसेज के माध्यम से टास्क दिए जाते हैं और धीरे-धीरे मानसिक रूप से इस तरह प्रभावित किया जाता है कि उन्हें केवल टास्क पूरा करना ही सबसे अहम लगने लगता है.
ब्लू व्हेल जैसे ट्रेंड सिर्फ एक देश तक सीमित नहीं रहे. भारत के अलावा रूस, यूरोप और दक्षिण एशिया के कई देशों में इसके असर की रिपोर्ट सामने आई थी. चूंकि ये किसी आधिकारिक ऐप का हिस्सा नहीं होते. इसलिए इन्हें ऐप स्टोर से हटाना भी संभव नहीं होता. इनका सबसे बड़ा हथियार सोशल मीडिया होता है, जहां ट्रेंड के नाम पर लोग बिना सोचे-समझे इसका हिस्सा बन जाते हैं.


