केंद्र सरकार की सर्वदलीय बैठक खत्म, पश्चिम एशिया के हालात पर चर्चा

मिडिल ईस्ट में चल रहे संघर्ष पर भारत सरकार ने सर्वदलीय बैठक कर हालात की समीक्षा की और सभी दलों ने मिलकर चिंता जताई. सरकार ने भरोसा दिलाया कि ऊर्जा संकट और आपूर्ति पर असर के बावजूद देश के हितों की रक्षा के लिए जरूरी कदम उठाए जा रहे हैं.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मिडिल ईस्ट में जारी तनावपूर्ण हालात अब वैश्विक चिंता का विषय बन चुके हैं. इसी कड़ी में भारत सरकार ने हालात की समीक्षा के लिए एक अहम सर्वदलीय बैठक बुलाई, जो करीब एक घंटे 45 मिनट तक चली. इस बैठक की अध्यक्षता रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने की, जिसमें पश्चिम एशिया की मौजूदा स्थिति और उसके संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा की गई.

बैठक में कौन-कौन शामिल हुआ? 

बैठक में केंद्र सरकार के कई वरिष्ठ मंत्री शामिल हुए. गृहमंत्री अमित शाह, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने भी अपने-अपने विभाग से जुड़े पहलुओं पर जानकारी साझा की. इसके अलावा कांग्रेस की ओर से तारिक अनवर और मुकुल वासनिक ने भाग लिया, जबकि माकपा का प्रतिनिधित्व जॉन ब्रिटास ने किया.

विपक्षी दलों की भागीदारी भी इस बैठक में उल्लेखनीय रही. समाजवादी पार्टी से जावेद अली, आम आदमी पार्टी से संजय सिंह, डीएमके के कलानिधि वीरासामी, शिवसेना (यूबीटी) के संजय राउत, एनसीपी (शरद पवार गुट) की सुप्रिया सुले, टीडीपी के लवू कृष्णा और आरजेडी के अभय कुशवाहा समेत कई नेताओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. सभी दलों ने मिलकर इस अंतरराष्ट्रीय संकट पर अपने विचार रखे और सरकार के साथ समन्वय पर जोर दिया.

पीएम मोदी ने राज्यसभा में क्या कहा था? 

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राज्यसभा में इस मुद्दे पर विस्तार से जानकारी दी थी. उन्होंने स्पष्ट किया कि पश्चिम एशिया में चल रहा संघर्ष न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक स्तर पर भी गंभीर प्रभाव डाल सकता है. उन्होंने कहा कि यह स्थिति लंबे समय तक बनी रह सकती है. इसलिए भारत को सतर्क रहने की आवश्यकता है.

प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से ऊर्जा संकट की आशंका पर चिंता जताई. उनके अनुसार, इस युद्ध के कारण तेल और गैस की आपूर्ति पर असर पड़ रहा है, जिससे पेट्रोल और डीजल जैसी आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता प्रभावित हो सकती है. चूंकि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए काफी हद तक आयात पर निर्भर है. ऐसे में यह स्थिति देश के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है.

इसके साथ ही उन्होंने यह भी बताया कि अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों पर पड़ रहे असर से जरूरी वस्तुओं की सप्लाई बाधित हो रही है. हालांकि, सरकार ने भरोसा दिलाया है कि हालात पर लगातार नजर रखी जा रही है और देश के हितों की रक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं.

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