वेतन वृद्धि, साप्ताहिक छुट्टी समेत कई मांगें, नोएडा में मजदूर आंदोलन के बाद रात में हुई चर्चा

उत्तर प्रदेश सरकार ने सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर एक उच्चस्तरीय समिति गठित की. यह समिति मौजूदा स्थिति का जायजा लेगी और विभिन्न मांगों पर गहराई से विचार कर समाधान निकालेगी.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

गौतम बुद्ध नगर में हो रहे प्रदर्शन को दूर करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित उच्चस्तरीय समिति के साथ श्रमिक प्रतिनिधियों की चल रही चर्चाओं में वेतन वृद्धि, साप्ताहिक छुट्टियां और बेहतर कार्य परिस्थितियां प्रमुख मांगों के रूप में उभरी हैं. अधिकारियों ने सोमवार को यह जानकारी दी. 

समिति ने ग्रेटर नोएडा में श्रमिक प्रतिनिधियों और अन्य हितधारकों के साथ बैठक की, जिसमें विभिन्न औद्योगिक इकाइयों के कर्मचारियों ने अपनी चिंताओं को विस्तार से रखा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सोमवार को गठित इस समिति की अध्यक्षता औद्योगिक विकास आयुक्त कर रहे हैं, जिसमें एमएसएमई के अतिरिक्त मुख्य सचिव, श्रम एवं रोजगार के प्रधान सचिव और श्रम आयुक्त सदस्य सचिव के रूप में शामिल हैं, साथ ही श्रम संघों व उद्योग संगठनों के प्रतिनिधि भी सदस्य हैं.

श्रमिकों की मांगें क्या हैं?

प्रदर्शन कर रहे श्रमिकों ने बताया कि कई कर्मचारी फिलहाल 10,000 से 15,000 रुपये मासिक वेतन पा रहे हैं और वे इसे 18,000 से 20,000 रुपये तक संशोधित करने की मांग कर रहे हैं. उन्होंने बढ़ती जीवनयापन की लागत और हरियाणा जैसे पड़ोसी राज्यों से वेतन असमानता का हवाला दिया. साथ ही कर्मचारियों ने गारंटीड साप्ताहिक छुट्टी तथा डबल ओवरटाइम भुगतान के सख्त प्रवर्तन की भी मांग उठाई है.  

हम वर्षों से बिना किसी सार्थक वेतन वृद्धि के काम कर रहे हैं. हमारी मांग सीधी-सादी है- हमें उचित वेतन चाहिए जो मौजूदा लागतों को दर्शाता हो, सेक्टर 63 की एक औद्योगिक इकाई में कार्यरत मजदूरों का कहना है कि मांगें केवल वेतन तक सीमित नहीं हैं. साप्ताहिक अवकाश, उचित ओवरटाइम भुगतान और कार्यस्थल पर बेहतर व्यवहार की मांग की है. यह सिर्फ वेतन का मामला नहीं है, बल्कि सम्मान का भी मामला है.

नौकरी सुरक्षा और श्रम कानूनों के कार्यान्वयन पर चिंताएं

जिला प्रशासन के अधिकारियों के अनुसार श्रमिकों ने नौकरी की सुरक्षा, श्रम कानूनों के अमल और कार्यस्थल पर सम्मानजनक तथा सुरक्षित माहौल की जरूरत पर भी अपनी चिंताएं जताईं. जिला मजिस्ट्रेट मेधा रूपम ने कहा कि समिति संवाद के जरिए मुद्दों का समाधान करने पर ध्यान केंद्रित है. उन्होंने कहा, समिति सभी हितधारकों से परामर्श करेगी और प्राथमिकता के आधार पर अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करेगी. औद्योगिक शांति बनाए रखते हुए श्रमिकों के हितों की रक्षा की जाएगी.

चर्चाओं से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि श्रमिकों ने पैनल के सामने वेतन संशोधन, ओवरटाइम और कार्य स्थितियों से जुड़ी मांगें स्पष्ट रूप से रखीं. अधिकारियों ने बताया कि आने वाले दिनों में और बैठकें होंगी तथा मुख्य मांगों खासकर वेतन संशोधन पर फैसला सरकारी स्तर पर लिया जाएगा. इस बीच प्रशासन ने श्रमिकों से शांति बनाए रखने, कार्यस्थलों पर लौटने और अफवाहों से दूर रहने की अपील की है. उन्होंने आग्रह किया कि केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें.  

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