होर्मुज संकट के बीच जयशंकर को ईरान से आया फोन, जानें किस मुद्दे पर हुई बात?
इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन साआर ने पश्चिम एशिया में बढ़ती तनाव को लेकर भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से फोन पर विस्तार से बात की. दोनों नेताओं की यह चर्चा बेहद सकारात्मक रही. जयशंकर ने कहा कि मध्य-पूर्व की मौजूदा स्थिति पर कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर विचार-विमर्श हुआ.

भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मीडिल ईस्ट की मौजूदा स्थिति पर इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन साआर से फोन पर विस्तृत बातचीत की है. दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव, खासकर ईरान, लेबनान और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर गहन चर्चा की. जयशंकर ने एक्स पर इस बातचीत की जानकारी देते हुए बताया कि दोपहर में इजरायली विदेश मंत्री के साथ कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई. इजरायल की तरफ से भी इस फोन कॉल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रिया आई है.
Had a telecon this afternoon with Israel FM @gidonsaar. Our discussion covered different aspects of the West Asia situation.
— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) April 14, 2026
जयशंकर और गिदोन साआर के बीच फोन पर बातचीत
भारतीय विदेश मंत्री एस जयशंकर और इजरायल के विदेश मंत्री गिदोन साआर ने आज दोपहर फोन पर बात की. इस दौरान दोनों ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की.
इजरायल ने अमेरिका की शर्तों का समर्थन किया
गिदोन साआर ने बातचीत में पाकिस्तान में हुई अमेरिका-ईरान वार्ता में अमेरिका के सख्त रुख की हिमायत की. उन्होंने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने वाली शर्तें पूरी अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद जरूरी हैं.
गिदोन साआर का बयान
इजरायली विदेश मंत्री गिदोन साआर ने बातचीत के बारे में कहा, मेरे मित्र, भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ हमेशा की तरह एक अच्छी बातचीत हुई. हमने ईरान, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और लेबनान पर चर्चा की.
मैंने कहा कि वार्ता में अमेरिका का सख्त रुख, ऐसी शर्तों पर जो ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकें (ईरान में किसी भी तरह का संवर्धन नहीं, और समृद्ध सामग्री को ईरान से हटाना) पूरे अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए बेहद महत्वपूर्ण है.
मैंने यह भी कहा कि ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में आर्थिक आतंकवाद के जरिए नौवहन की स्वतंत्रता और वैश्विक अर्थव्यवस्था को नुकसान पहुंचाना ऐसी कार्रवाई की मांग करता है, जिससे सभी देशों जिसमें भारत और खाड़ी क्षेत्र के हमारे मित्र भी शामिल हैं, के लिए नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित की जा सके.


