'आधी रात को पिटीशन लिखते हो क्या?', सुप्रीम कोर्ट में PIL को लेकर वकील पर भड़के CJI

सुप्रीम कोर्ट ने शराब प्रिस्क्रिप्शन, तामसिक भोजन और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन जैसे कई मुद्दों वाली एक PIL खारिज कर दी. CJI सूर्यकांत ने खराब ड्राफ्टिंग और अस्पष्ट मांगों पर नाराज़गी जताते हुए याचिकाकर्ता वकील को भविष्य में भारी जुर्माने की चेतावनी दी.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (9 मार्च) को एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान दिलचस्प लेकिन सख्त टिप्पणी देखने को मिली. देश के मुख्य न्यायाधीश (CJI) जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के सामने जब एक वकील द्वारा दाखिल की गई PIL आई, तो उसकी सामग्री देखकर अदालत ने नाराज़गी जाहिर की. याचिका में अलग-अलग और असंबंधित मुद्दों को एक साथ शामिल किया गया था, जिसे देखकर अदालत ने इसे गंभीरता से लेने से इनकार कर दिया.

दरअसल, इस जनहित याचिका को एक वकील ने खुद ही याचिकाकर्ता बनकर दाखिल किया था. याचिका में कई ऐसे मुद्दे शामिल थे जिनका आपस में कोई सीधा संबंध नहीं था. इसमें शराब के लिए फिक्स्ड प्रिस्क्रिप्शन लागू करने की मांग की गई थी. इसके अलावा तामसिक भोजन (मांसाहारी या मसालेदार भोजन) को लेकर नियम बनाने की बात भी कही गई थी. यही नहीं, याचिका में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन से जुड़े मामलों समेत अन्य कई विषयों का भी उल्लेख कर दिया गया था. अलग-अलग मुद्दों को एक ही PIL में शामिल करने के कारण अदालत ने इसे गंभीर और स्पष्ट याचिका नहीं माना.

CJI ने जताई नाराजगी

जब यह मामला सुनवाई के लिए मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत की पीठ के सामने आया, तो उन्होंने याचिका की भाषा और विषयवस्तु पर कड़ी नाराज़गी जताई. सुनवाई के दौरान उन्होंने याचिकाकर्ता वकील से तीखे सवाल भी पूछे. सीजेआई ने कहा कि यह याचिका “दिमाग नहीं लगाने का एक उदाहरण” लगती है. उन्होंने वकील से यह भी पूछा कि क्या ऐसी याचिकाएं आधी रात में बैठकर तैयार की जाती हैं. अदालत ने साफ कहा कि इस तरह की याचिका सुप्रीम कोर्ट के सामने लाना उचित नहीं है.

खराब ड्राफ्टिंग पर भी सवाल

अदालत ने अपने आदेश में कहा कि याचिका की मांगें स्पष्ट नहीं हैं और उनमें ठोस आधार भी नहीं दिखता. साथ ही यह भी कहा गया कि यह पिटीशन खराब ड्राफ्टिंग का उदाहरण है. अदालत के अनुसार, याचिका में जो बातें लिखी गई हैं, वे अस्पष्ट और बिना ठोस तर्क के पेश की गई हैं. पीठ ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता वकील न होता, तो अदालत उस पर भारी जुर्माना लगाकर याचिका खारिज कर सकती थी. अदालत का मानना था कि इस तरह की याचिकाएं न्यायालय का समय और संसाधन दोनों बर्बाद करती हैं.

अगली बार भारी जुर्माने की चेतावनी

सुप्रीम कोर्ट ने याचिका को सुनवाई योग्य न मानते हुए खारिज कर दिया. इसके साथ ही याचिकाकर्ता वकील को चेतावनी भी दी गई कि भविष्य में इस तरह की याचिका दाखिल करने पर भारी जुर्माना लगाया जा सकता है. सुनवाई के दौरान CJI सूर्यकांत ने यह भी कहा कि कुछ लोग इस तरह की याचिकाओं के जरिए अपनी “दुकानें” चला रहे हैं, जो सही नहीं है. अदालत ने साफ किया कि जनहित याचिका एक गंभीर कानूनी प्रक्रिया है और इसका उपयोग सोच-समझकर ही किया जाना चाहिए.

हालांकि, अदालत ने यह भी कहा कि अगर याचिकाकर्ता को किसी मुद्दे पर शिकायत या सुझाव देना है, तो वह संबंधित सरकारी अथॉरिटी या उचित विभाग से संपर्क कर सकता है. सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि हर विषय को सीधे अदालत के सामने लाना जरूरी नहीं होता, खासकर तब जब वह ठीक तरीके से तैयार भी न किया गया हो.

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