पटना: बिहार सरकार ने राज्य के विकास और जनकल्याण को गति देने के लिए कैबिनेट बैठक में 25 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी है. इन फैसलों का असर सामाजिक सुरक्षा, ग्रामीण रोजगार, कृषि, शहरी बुनियादी ढांचे, तकनीकी विकास और शिक्षा जैसे कई क्षेत्रों पर पड़ेगा. मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अध्यक्षता में हुई बैठक में बुजुर्गों, किसानों और ग्रामीण आबादी को विशेष राहत देने वाले कई बड़े निर्णय लिए गए.
कैबिनेट के सबसे अहम फैसलों में सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाओं के लाभार्थियों के लिए बड़ी वित्तीय मंजूरी शामिल है. सरकार ने वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांगता और मुख्यमंत्री वृद्धजन पेंशन समेत छह सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के तहत मई, जून और जुलाई 2026 की राशि के भुगतान के लिए बिहार आकस्मिकता निधि से 3,662.09 करोड़ रुपये अग्रिम जारी करने की स्वीकृति दी है. इससे लाखों लाभार्थियों को समय पर आर्थिक सहायता मिल सकेगी.
ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और स्वरोजगार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सरकार ने ‘विकसित भारत-रोजगार एवं आजीविका गारंटी मिशन (ग्रामीण)’ को भी मंजूरी प्रदान की है. यह योजना 1 जुलाई 2026 से पूरे बिहार में लागू की जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे गांवों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और लोगों की आय में सुधार होगा.
शहरी विकास के मोर्चे पर भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए. अमृत 2.0 परियोजना के तहत बिहारशरीफ, हाजीपुर, बेगूसराय और सहरसा में सीवरेज नेटवर्क, सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) और पेयजल आपूर्ति से जुड़ी योजनाओं के लिए प्रशासनिक मंजूरी दी गई है. इन परियोजनाओं से शहरों में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी.
परिवहन विभाग की ओर से पुरानी वाहनों की स्क्रैपिंग नीति में संशोधन को भी स्वीकृति दी गई. इसके तहत 15 वर्ष से अधिक पुराने सरकारी और गैर-सरकारी वाहनों को हटाने की प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए कुछ प्रावधानों में बदलाव किया गया है.
कृषि क्षेत्र को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को वित्तीय वर्ष 2026-27 के रबी सीजन से दोबारा लागू करने का फैसला किया है. साथ ही ‘बिस्कोमान’ को निर्यात कार्यों के लिए राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी बनाने पर भी सहमति दी गई है.
शिक्षा और तकनीकी विकास को बढ़ावा देने के लिए आईआईटी पटना में रिसर्च पार्क और इन्क्यूबेशन सेंटर फेज-2 के तहत नए छात्रावास निर्माण को मंजूरी दी गई है. इसके अलावा सरकारी वित्तीय लेनदेन को अधिक पारदर्शी और सुगम बनाने के लिए ‘BIHAR SNA-SPARSH’ सॉफ्टवेयर विकसित करने हेतु 5.75 करोड़ रुपये से अधिक की राशि स्वीकृत की गई है. सरकार का दावा है कि इन फैसलों से राज्य के विकास को नई गति मिलेगी और आम लोगों को प्रत्यक्ष लाभ पहुंचेगा. First Updated : Monday, 08 June 2026