बिहार सरकार सख्त! दाखिल-खारिज के लंबित मामलों पर 15 दिनों का अल्टीमेटम

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी महीने 13 तारीख को विभागीय सचिव जय सिंह ने भी जिलों को ऐसा ही आदेश जारी किया था। अब 15 दिन बाद मंत्री स्तर से दोबारा निर्देश आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है।

Sachin Hari Legha

पटना: बिहार सरकार ने दाखिल-खारिज के अटके हुए मामलों को लेकर बड़ा कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री डॉ. दिलीप कुमार जायसवाल ने तीन लाख से ज्यादा लंबित मामलों को 15 दिनों के अंदर निपटाने का निर्देश दिया है। सरकार के इस सख्त रुख के बाद राजस्व विभाग में हलचल बढ़ गई है। सभी जिलों को तेजी से काम पूरा करने के लिए कहा गया है।

15 दिन में दूसरी बार आया सख्त आदेश   

यहाँ ध्यान देने वाली बात यह है कि इसी महीने 13 तारीख को विभागीय सचिव जय सिंह ने भी जिलों को ऐसा ही आदेश जारी किया था। अब 15 दिन बाद मंत्री स्तर से दोबारा निर्देश आने के बाद मामला और गंभीर हो गया है। विभाग के सचिव ने जिलाधिकारियों को फिर से पत्र भेजकर लंबित मामलों को जल्द निपटाने पर जोर दिया है।

तीन लाख से ज्यादा मामले अटके हुए हैं   

राज्य में दाखिल-खारिज के करीब 3 लाख 10 हजार मामले लंबित हैं। विभाग का कहना है कि छोटी गड़बड़ियों और तकनीकी वजहों से बड़ी संख्या में आवेदन रुके हुए हैं। राजस्व कर्मचारियों और अंचल अधिकारियों के सामूहिक अवकाश के कारण भी स्क्रूटनी के स्तर पर काम धीमा पड़ा है।

तकनीकी खामी पर अब आवेदन वापस नहीं होंगे  

सरकार ने साफ कर दिया है कि मामूली या तकनीकी त्रुटियों के नाम पर आवेदन बेवजह वापस नहीं किए जाएंगे। राजस्व कर्मचारियों को सकारात्मक सोच के साथ आवेदनों की जांच करने को कहा गया है ताकि लोगों को राहत मिले।

सभी लंबित आवेदनों का डिफेक्ट चेक अधिकतम 15 दिनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। सरकार का कहना है कि ईज ऑफ लिविंग के लक्ष्य को देखते हुए दाखिल-खारिज की प्रक्रिया को आसान और तेज किया जा रहा है।

कर्मचारियों की कार्यशैली पर रखी जाएगी नजर   

विभाग ने एक नया नियम भी लागू किया है। अगर कोई राजस्व कर्मचारी किसी आवेदन में त्रुटि बताता है तो संबंधित अंचल अधिकारी उसकी अनिवार्य जांच करेंगे। अगर त्रुटि गलत पाई जाती है तो आवेदन सीधे आवेदक को नहीं लौटाया जाएगा। उसे सुधार के लिए फिर से संबंधित कर्मचारी को भेजा जाएगा।

लाखों लोगों को मिल सकती है राहत   

गौरतलब है कि सरकार के इस फैसले से लाखों आवेदकों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है। लंबे समय से अटके दाखिल-खारिज मामलों के निपटारे से लोगों को सरकारी दफ्तरों के चक्कर कम लगाने पड़ेंगे। अब सबकी नजर इस बात पर है कि विभाग तय समय सीमा में लंबित मामलों को कितनी तेजी से निपटाता है।

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