नीतीश कुमार की विरासत आगे बढ़ाएंगे निशांत कुमार, लेंगे मंत्री पद की शपथ

नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार पटना के गांधी मैदान में मंत्री पद की शपथ लेकर राजनीति में औपचारिक एंट्री करने जा रहे हैं. जेडीयू नेतृत्व के मनाने के बाद उन्होंने जिम्मेदारी स्वीकार की, जिससे बिहार की सियासत में नई हलचल तेज हो गई है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पटना: बिहार की राजनीति में एक अहम मोड़ सामने आ रहा है, जहां पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के बेटे निशांत कुमार अब सक्रिय भूमिका निभाते नजर आ सकते हैं. जानकारी के अनुसार, निशांत कुमार गुरुवार को पटना के ऐतिहासिक गांधी मैदान में मंत्री पद की शपथ लेने वाले हैं. इस फैसले ने राज्य की सियासत में नई हलचल पैदा कर दी है.

वरिष्ठ नेताओं की देर रात चली बैठक 

बताया जा रहा है कि जनता दल (यूनाइटेड) के वरिष्ठ नेताओं की देर रात चली बैठक में इस मुद्दे पर सहमति बनी. सूत्रों के मुताबिक, निशांत पहले राजनीति में आने को लेकर ज्यादा इच्छुक नहीं थे, लेकिन पार्टी नेतृत्व ने उन्हें मौजूदा परिस्थितियों में जिम्मेदारी संभालने के लिए तैयार कर लिया. नेताओं का मानना है कि इस समय पार्टी और सरकार दोनों को उनकी जरूरत है.

शपथ ग्रहण समारोह के चलते निशांत की 7 मई से शुरू होने वाली “सद्भावना यात्रा” फिलहाल स्थगित कर दी गई है. अब यह कार्यक्रम 9 मई से दोबारा शुरू होगा. इस यात्रा के जरिए वह राज्य के अलग-अलग जिलों में जाकर लोगों से संवाद कर रहे थे और अपने पिता के कार्यकाल में हुए कामकाज पर जनता की राय जुटा रहे थे.

इसी बीच, केंद्रीय मंत्री राजीव रंजन सिंह सहित कई वरिष्ठ नेता पटना पहुंच चुके हैं. यहां गठबंधन दलों के बीच लगातार बैठकों का दौर जारी है, जिसमें मंत्रिमंडल के गठन को अंतिम रूप दिया जा रहा है. तैयार सूची को बाद में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के सामने रखा गया.

मंत्रिमंडल में अधिकतम 27 मंत्री ले सकते हैं शपथ 

सूत्रों के अनुसार, इस बार मंत्रिमंडल में अधिकतम 27 मंत्री शपथ ले सकते हैं. इसमें भाजपा, जेडीयू, एलजेपी (राम विलास), हम और आरएलजेपी जैसे सहयोगी दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाएगा. कई नए चेहरों को मौका मिलने की संभावना है, जबकि कुछ पुराने और चर्चित नाम इस बार जगह नहीं बना पाएंगे.

निशांत कुमार के संभावित मंत्री बनने को उनके राजनीतिक करियर की बड़ी शुरुआत माना जा रहा है. उनके समर्थकों का कहना है कि वे अपने पिता की राजनीतिक विरासत को आगे बढ़ाने में सक्षम हैं. हाल के दिनों में उनकी बढ़ती सक्रियता को देखते हुए यह कदम उनके लिए राज्य की राजनीति में मजबूत एंट्री के तौर पर देखा जा रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो