पटना की नई टाउनशिप को मिलेगा ‘पाटलिपुत्र’ नाम, सीएम सम्राट चौधरी ने किया ऐलान
बिहार सरकार ने पटना में विकसित की जा रही नई टाउनशिप का नाम ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हुए ‘पाटलिपुत्र’ रखने का फैसला किया है. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि यह कदम राजधानी की प्राचीन पहचान को नए स्वरूप में स्थापित करने के लिए उठाया गया है.

पटना: बिहार की राजधानी पटना में विकसित की जा रही नई टाउनशिप अब ‘पाटलिपुत्र’ के नाम से जानी जाएगी. मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने फुलवारी शरीफ के नदियावां क्षेत्र में आयोजित सहयोग शिविर के दौरान यह महत्वपूर्ण घोषणा की. उन्होंने कहा कि सरकार जिस आधुनिक टाउनशिप का निर्माण कर रही है, उसका नाम बिहार की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ा होगा.
पुराने गौरव को नए स्वरूप में सहेजने की पहल
मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ‘पाटलिपुत्र’ कोई नया नाम नहीं है, बल्कि यह पटना की ऐतिहासिक पहचान रही है. उन्होंने बताया कि राजधानी की नई पहचान उसके गौरवशाली अतीत से जुड़नी चाहिए. इसी सोच के तहत प्रस्तावित टाउनशिप को पाटलिपुत्र नाम दिया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इस ऐतिहासिक विरासत से परिचित हो सकें.
कंकड़बाग का उदाहरण देते हुए कही बात
सम्राट चौधरी ने कहा कि एक समय कंकड़बाग को एशिया की सबसे बड़ी टाउनशिप माना जाता था. इसका विकास 1960 और 1970 के दशक में शुरू हुआ था, लेकिन समय के साथ इसकी मूल पहचान कमजोर पड़ गई. उन्होंने कहा कि जब वे नगर विकास मंत्री थे, तब वहां जल निकासी जैसी कई समस्याएं थीं, जिन्हें दूर करने के लिए काफी प्रयास किए गए. हालांकि अब सरकार एक नई और सुव्यवस्थित टाउनशिप विकसित करने की दिशा में काम कर रही है.
‘बड़े पटना’ की सोच के साथ आगे बढ़ रही सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनकी परिकल्पना केवल एक नई बस्ती बसाने की नहीं, बल्कि एक विस्तृत और आधुनिक पटना के निर्माण की है. उन्होंने कहा कि कुछ लोग पाटलिपुत्र नाम को लेकर चर्चा करते रहे हैं, क्योंकि यह प्राचीन मगध साम्राज्य की राजधानी का नाम था. ऐसे में नई टाउनशिप को यही नाम देकर सरकार इतिहास और आधुनिक विकास के बीच संतुलन स्थापित करना चाहती है.
पाटलिपुत्र से पटना तक का सफर
इतिहासकारों के अनुसार, लगभग तीन हजार वर्ष पहले इस क्षेत्र में पाटलि नामक वृक्षों की बहुतायत थी. इसी कारण पहले इसका नाम पाटलिग्राम और बाद में पाटलिपुत्र पड़ा. समय के साथ यह क्षेत्र व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित हुआ और आगे चलकर पटना कहलाने लगा. मुगल काल में 1704 में इसका नाम अजीमाबाद रखा गया था, लेकिन बाद में फिर से पटना नाम प्रचलन में आ गया. अब सरकार उसी ऐतिहासिक नाम ‘पाटलिपुत्र’ को नई टाउनशिप के जरिए एक बार फिर पहचान दिलाने जा रही है.


