राज्यसभा में भाजपा का शतक, एनडीए 140 पार, विपक्ष सिमटा, संसद की नई ताकत ने बदल दिया दिल्ली का पूरा सियासी गणित

राज्यसभा की नई तस्वीर ने भारतीय राजनीति का संतुलन बदल दिया है। एनडीए का आंकड़ा 140 पार पहुंच गया है। भाजपा 100 से ऊपर है। विपक्ष पीछे दिख रहा है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

राज्यसभा की नई गिनती ने राजनीति का पूरा माहौल बदल दिया है। अब भाजपा पहली बार 100 के आंकड़े से ऊपर पहुंच गई है। यह संख्या भारतीय राजनीति में बड़ा संकेत मानी जा रही है। उच्च सदन में भाजपा के अब 101 निर्वाचित सांसद हैं। इसके साथ पांच मनोनीत सदस्य भी उसके समर्थन में हैं। इस तरह पार्टी की कुल ताकत 106 तक पहुंच गई है। यह स्थिति भाजपा के लिए नई मजबूती का संकेत मानी जा रही है।

क्या एनडीए 140 के पार पहुंचा?

भाजपा ही नहीं उसका गठबंधन भी अब मजबूत दिख रहा है। एनडीए का कुल आंकड़ा अब 141 तक पहुंच गया है। यह 250 सदस्य वाली राज्यसभा में बड़ा बहुमत माना जाता है। हाल ही में खाली हुई 37 सीटों में से 22 सीटें एनडीए ने जीत लीं। इसी जीत ने गठबंधन की ताकत को बढ़ा दिया। पहले एनडीए के पास 135 सीटें थीं।अब यह बढ़कर 141 हो चुकी हैं।

क्या राज्यों से मिली अतिरिक्त ताकत?

इस बढ़त में कुछ राज्यों की अहम भूमिका रही है। ओडिशा और बिहार में भाजपा ने अतिरिक्त सीटें हासिल कीं।इन सीटों ने राज्यसभा का समीकरण बदल दिया। राज्यसभा के चुनाव अक्सर राज्य की सरकारों पर निर्भर होते हैं। जहां भाजपा या उसके सहयोगी मजबूत हैं वहां फायदा मिला। यही वजह है कि हाल के चुनावों ने तस्वीर बदल दी। यह बढ़त सीधे दिल्ली की राजनीति में असर डाल रही है।

क्या सहयोगी दल भी बने सहारा?

एनडीए की ताकत सिर्फ भाजपा से नहीं आई है। उसके सहयोगी दलों ने भी इस बढ़त में योगदान दिया है।तमिलनाडु की एआईएडीएमके के पांच सांसद हैं। बिहार की जेडीयू के भी पांच सदस्य हैं। महाराष्ट्र में एनसीपी के चार सांसद एनडीए के साथ हैं। एकनाथ शिंदे की शिवसेना के दो सदस्य हैं। आंध्र प्रदेश की टीडीपी के भी दो सदस्य राज्यसभा में मौजूद हैं।

क्या संसद में आसान होगा बिल पास?

राज्यसभा में यह बढ़त सरकार के लिए राहत मानी जा रही है। अब सरकार के लिए बिल पास कराना पहले से आसान हो सकता है। अक्सर राज्यसभा में संख्या कम होने से सरकार अटकती थी। लेकिन अब तस्वीर कुछ अलग दिख रही है। लोकसभा में पहले से ही सरकार के पास बहुमत है। अब उच्च सदन में भी ताकत बढ़ती दिख रही है।इससे संसद का कामकाज तेज हो सकता है।

क्या विपक्ष की ताकत कम हुई?

दूसरी तरफ विपक्ष की स्थिति कमजोर दिख रही है। कांग्रेस को विपक्ष की धुरी माना जाता है। लेकिन राज्यसभा में उसके पास अब सिर्फ 29 सीटें हैं। यह संख्या भाजपा के मुकाबले काफी कम है। पूरे विपक्ष की कुल ताकत करीब 62 सीटों तक सिमट गई है। यह स्थिति विपक्ष के लिए चिंता की वजह बन रही है।

क्या विपक्षी दलों को लगा झटका?

कुछ विपक्षी दलों की सीटें भी कम हुई हैं।डीएमके के सांसद अब आठ ही रह गए हैं।पहले उनकी संख्या दस थी।आरजेडी को भी नुकसान हुआ है।उसके सांसद पांच से घटकर तीन रह गए हैं।इन बदलावों ने विपक्ष की कुल ताकत घटा दी है।राजनीतिक जानकार मानते हैं कि यह आने वाले वर्षों की राजनीति को प्रभावित करेगा।

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