डिजिटल सुपरहीरो बनकर मैदान में उतरी बीजेपी ने बीएमसी चुनाव में युवाओं को साधने की सबसे बड़ी सियासी चाल चल दी

बीएमसी चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने युवाओं को जोड़ने के लिए पारंपरिक राजनीति छोड़कर मार्वल सुपरहीरो से प्रेरित डिजिटल कैंपेन शुरू कर दिया है जो सोशल मीडिया पर तेजी से छा रहा है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मुंबई में बीएमसी चुनाव की लड़ाई अब पोस्टर से आगे निकल गई है।बीजेपी ने इसे पूरी तरह डिजिटल बना दिया है।सोशल मीडिया पर पार्टी के रंग और चेहरे दिख रहे हैं।मार्वल स्टाइल के ग्राफिक्स से युवाओं को जोड़ा जा रहा है।हर पोस्ट में एक संदेश छिपा है।पार्टी चाहती है कि युवा खुद को इससे जोड़ें।यही नई सियासी रणनीति बन गई है।

मार्वल स्टाइल कैंपेन क्यों चुना गया?

बीजेपी जानती है कि युवा सुपरहीरो कल्चर से जुड़ा रहता है।मार्वल के किरदार युवाओं में जोश पैदा करते हैं।इसी सोच से यह स्टाइल अपनाया गया है।राजनीति को मनोरंजन से जोड़ा गया है।इससे पार्टी की बात बोझिल नहीं लगती।मैसेज मजेदार तरीके से पहुंचता है।युवाओं का ध्यान आसानी से खिंच जाता है।

डिजिटल टीम को इतनी ताकत कैसे मिली?

बीजेपी की डिजिटल टीम अब बहुत मजबूत हो चुकी है।पार्टी टेक्नोलॉजी पर बड़ा दांव लगा रही है।हर पोस्ट और वीडियो एक योजना के तहत बनता है।ग्राफिक्स से लेकर म्यूजिक तक सब सोचा समझा होता है।टीम का कहना है कि वह एंडगेम लेवल तक पहुंच गई है।मतलब हर वोटर तक पहुंचने का पूरा सिस्टम तैयार है।यही वजह है कि बीजेपी इस रेस में आगे दिख रही है।

युवाओं को कैसे जोड़ा जा रहा है?

पार्टी मनोरंजन और भावना दोनों का इस्तेमाल कर रही है।युवाओं को सीधे भाषण नहीं सुनाए जा रहे।अब बात छोटी क्लिप में कही जा रही है।इंस्टाग्राम रील्स और यूट्यूब शॉर्ट्स पर कैंपेन चल रहा है।व्हाट्सएप स्टेटस भी इसका हिस्सा है।हर युवा अपने फोन पर इसे देख सकता है।यही बीजेपी की बड़ी ताकत बन गई है।

दूसरी पार्टियां इसमें कहां खड़ी हैं?

कांग्रेस और अन्य दल भी इस ट्रेंड को अपनाने की कोशिश कर रहे हैं।लेकिन टेक्निकल एग्जीक्यूशन में वे पीछे दिखते हैं।बीजेपी का कंटेंट ज्यादा प्रोफेशनल लगता है।ग्राफिक्स और मैसेज ज्यादा साफ होते हैं।इसी वजह से सोशल मीडिया पर वही छाई रहती है।बीएमसी चुनाव में यह फर्क साफ दिख रहा है।डिजिटल स्पेस में बीजेपी की पकड़ मजबूत है।

उद्धव ठाकरे किस रणनीति पर चल रहे हैं?

उद्धव ठाकरे युवाओं को साधने की कोशिश कर रहे हैं।वे कोस्टल रोड जैसे प्रोजेक्ट्स का क्रेडिट ले रहे हैं।उनका फोकस मराठी वोटरों पर है।वे हिंदी भाषी पर भी सवाल उठा रहे हैं।लेकिन युवाओं को यह तरीका ज्यादा नहीं भा रहा।कई लोग इसे पुरानी राजनीति मानते हैं।डिजिटल मुकाबले में वे कमजोर पड़ते दिख रहे हैं।

क्या डिजिटल रणनीति चुनाव बदल सकती है?

बीएमसी चुनाव अब सिर्फ सड़क और नाली की बात नहीं है।यह इमेज और रिकॉर्ड की लड़ाई बन गया है।डिजिटल कैंपेन से युवा जल्दी प्रभावित होते हैं।बीजेपी इस बात को समझ चुकी है।हर फोन अब एक वोटर तक पहुंचने का रास्ता है।जो इस रास्ते पर आगे है वही बढ़त में है।मुंबई की राजनीति इसी दिशा में जा रही है।

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