Chandra Grahan 2026 : भारत में कल लगेगा चंद्र ग्रहण, इतने बजे से शुरू होगा सूतक काल...बंद रहेंगे मंदिरों के कपाट

वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को लगने जा रहा है. भारत के अधिकांश हिस्सों में ग्रहण का अंतिम चरण दिखाई देगा. सूतक काल सुबह से ही प्रभावी रहेगा. जबकि वैज्ञानिक इसे एक अद्भुत प्राकृतिक खगोलीय घटना मान रहे हैं.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : खगोल विज्ञान और धार्मिक मान्यताओं के संगम के रूप में इस वर्ष का पहला चंद्र ग्रहण मंगलवार को आकाश में दिखाई देगा. यह एक महत्वपूर्ण खगोलीय घटना है. जिसे भारत के कई हिस्सों में देखा जा सकेगा. हालांकि देश के अधिकांश क्षेत्रों में लोग इसका केवल अंतिम चरण ही देख पाएंगे. पंडितों और वैज्ञानिकों दोनों ने इस ग्रहण को लेकर अपनी-अपनी राय साझा की है. जहाँ आस्थावान लोग इसे सूतक काल और दान-पुण्य से जोड़ रहे हैं. वहीं विज्ञान इसे ब्रह्मांडीय क्रिया के रूप में देख रहा है.

ग्रहण का समापन शाम 6:47 बजे होगा

आपको बता दें कि चंद्र ग्रहण दोपहर 3:20 बजे से शुरू होगा. इसका चरम बिंदु यानी परमग्रास दोपहर 4:35 बजे महसूस किया जाएगा. ग्रहण का समापन या मोक्ष शाम 6:47 बजे होगा. इस पूरी खगोलीय घटना की कुल अवधि लगभग तीन घंटे 27 मिनट की होगी. भारत में यह ग्रहण शाम के समय चंद्रमा के उदय होने के साथ ही दिखाई देने लगेगा. जिससे शाम का दृश्य काफी मनोरम और जिज्ञासुओं के लिए बेहद खास होगा.

नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू 

धार्मिक मान्यताओं के मुताबिक. चंद्र ग्रहण लगने से ठीक नौ घंटे पहले सूतक काल शुरू हो जाता है. इस आधार पर 3 मार्च की सुबह 6:20 बजे से ही सूतक प्रभावी हो जाएगा. सूतक काल के दौरान मंदिरों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं और किसी भी प्रकार के शुभ या मांगलिक कार्यों की मनाही होती है. ग्रहण के मोक्ष के बाद ही मंदिरों की शुद्धि की जाएगी और भक्त दोबारा दर्शन कर सकेंगे. सूतक काल का धार्मिक दृष्टि से बहुत महत्व है.

आध्यात्मिक प्रगति के लिए भी अत्यंत शुभ

धार्मिक विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रहण काल केवल सूतक और निषेध का समय नहीं है. बल्कि यह आध्यात्मिक प्रगति के लिए भी अत्यंत शुभ है. ग्रहण के दौरान किए गए मंत्र-जाप. ईश्वर का स्मरण और विशेष साधनाएं कई गुना फलदायी मानी जाती हैं. लोग इस समय दान-पुण्य और मानसिक शांति के लिए ध्यान का सहारा लेते हैं. मान्यता है कि इस समय की गई प्रार्थनाएं जातक को नकारात्मक ऊर्जा से बचाने और मानसिक शक्ति प्रदान करने में एक बड़ा आधार बनती हैं.

6:20 से 6:47 बजे के बीच स्पष्ट रूप से दृश्य 

भारत में रहने वाले लोगों के लिए यह ग्रहण शाम 6:20 बजे से 6:47 बजे के बीच स्पष्ट रूप से दृश्य होगा. जैसे ही चंद्रमा क्षितिज से ऊपर आएगा. ग्रहण का बचा हुआ हिस्सा नंगी आंखों से देखा जा सकेगा. हालांकि पूरे भारत में यह एक समान रूप से दिखाई नहीं देगा. लेकिन अंतिम मोक्ष काल का दृश्य देश के ज्यादातर हिस्सों में उपलब्ध होगा. शाम के धुंधलके में चंद्रमा का यह बदला हुआ स्वरूप फोटोग्राफी के शौकीनों के लिए भी बहुत अद्भुत होगा.

क्या है वैज्ञानिक नजरिया 

वैज्ञानिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो चंद्र ग्रहण पूरी तरह से एक प्राकृतिक और सुरक्षित खगोलीय घटना है. इसे देखने के लिए किसी विशेष चश्मे या दूरबीन की आवश्यकता नहीं होती. आप इसे नंगी आंखों से पूरी तरह सुरक्षित रूप से देख सकते हैं. विज्ञान इसे सूर्य. पृथ्वी और चंद्रमा की एक सीधी रेखा में आने की प्रक्रिया मानता है. जहाँ आस्था इसे सावधानी से देखती है. वहीं वैज्ञानिक जिज्ञासा इसे ब्रह्मांड के रहस्यों को समझने के एक सुनहरे अवसर के रूप में स्वीकार करती है.

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