दिल्ली-NCR से अब प्रदुषण होगा खत्म! SC ने रखा 300 किलोमीटर का प्रस्ताव, इन राज्यों में नोटिस जारी

दिल्ली में बढ़ते प्रदुषण को देख सुप्रीम कोर्ट ने एक नया प्रस्ताव रखा है, जिसके तहत कोयला आधारित उद्योगों को क्षेत्र से बाहर किया जाएगा. इसके लिए कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में बढ़ते वायु प्रदूषण को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सख्त रुख अपनाया है. सोमवार 23 फरवरी को हुई सुनवाई में कोयला आधारित उद्योगों को क्षेत्र से बाहर करने का बड़ा प्रस्ताव सामने आया. अदालत ने केंद्र सरकार से इस पूरे मामले पर साफ-साफ जवाब मांगा है. 

प्रदूषण पर सुप्रीम कोर्ट की नई सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट की बेंच, जिसमें चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस विपुल पंचोली शामिल थे, उन्होंने दिल्ली-एनसीआर के वायु प्रदूषण पर चर्चा की. कमिशन फॉर एयर क्वालिटी मैनेजमेंट (CAQM) की रिपोर्ट पर विचार करते हुए अदालत ने कई सवाल उठाए. मुख्य फोकस कोयला से चलने वाले उद्योगों और थर्मल पावर प्लांट्स पर रहा. 

क्या है 300 किलोमीटर का प्रस्ताव?

सुनवाई में सुझाव आया कि दिल्ली से 300 किलोमीटर के दायरे में कोई नया कोयला आधारित थर्मल पावर प्लांट नहीं लगाया जाए. साथ ही मौजूदा कोयला आधारित उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से दिल्ली-एनसीआर से बाहर शिफ्ट करने का प्रस्ताव रखा गया.

अदालत ने पर्यावरण मंत्रालय, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय और विद्युत मंत्रालय से संयुक्त जवाब मांगा है. ये मंत्रालय बताएं कि ऐसे उद्योगों को कैसे बाहर किया जा सकता है, वैकल्पिक ईंधन क्या उपलब्ध होंगे और क्या यह संभव है. 

राज्यों को जारी नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली सरकारों को निर्देश दिया कि वे कोयला आधारित उद्योगों से होने वाले प्रदूषण पर सार्वजनिक नोटिस जारी करें. लोगों से राय मांगी जाए कि ऐसे उद्योगों को कैसे नियंत्रित किया जाए. अदालत ने राज्यों से पूछा कि वे क्या कार्रवाई कर सकते हैं और इन सुझावों पर उनकी क्या राय है.

वाहनों और निर्माण से प्रदूषण पर भी फोकस

बेंच ने वाहनों से होने वाले प्रदूषण की जांच की बात कही. 12 मार्च को इस पर विस्तार से सुनवाई होगी. निर्माण कार्यों से उड़ने वाली धूल को कम करने के उपायों पर भी चर्चा हुई. अदालत ने पूछा कि निर्माण और तोड़फोड़ से धूल कैसे रोकी जा सकती है. 

प्रदूषण का पुराना मुद्दा

दिल्ली-एनसीआर में हर साल सर्दियों में प्रदूषण बढ़ता है. दीवाली से जनवरी तक AQI खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है. सुप्रीम कोर्ट में कई बार सुनवाई हुई, लेकिन अब तक बड़े बदलाव नहीं आए. इस बार कोयला आधारित उद्योगों पर फोकस से लगता है कि लंबे समय के समाधान की ओर कदम बढ़ रहे हैं.

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