Controversial Statement by Pakistani Cleric on Kashmir: पाकिस्तान में इन दिनों कश्मीर को लेकर एक बड़े राजनीतिक बयानबाजी का सिलसिला जारी है. पाकिस्तान के कट्टरपंथी नेताओं ने कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा बताते हुए भारत के खिलाफ जोरदार टिप्पणियाँ की हैं. इस बीच, पाकिस्तान के कट्टर मौलवी और जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हाफ़िज़ नईम उर रहमान की टिप्पणी ने विवाद को और बढ़ा दिया है. उन्होंने हाल ही में एक रैली के दौरान कश्मीर को पाकिस्तान की "जीवन रेखा" बताया और यह भी कहा कि इसे "हिंदू ब्राह्मणों के हाथों में" नहीं रहने दिया जा सकता.
हाफ़िज़ नईम उर रहमान का बयान: भारत के खिलाफ कड़ा हमला
लाहौर में आयोजित एक रैली में हाफ़िज़ नईम उर रहमान ने भारत के खिलाफ जमकर नफ़रत भरी बातें कीं. उन्होंने कहा, "कश्मीर पाकिस्तान की जीवन रेखा है, और हम इसे हिंदू ब्राह्मणों के हाथों में नहीं रहने दे सकते." इसके अलावा, हाफ़िज़ नईम ने भारत पर आरोप लगाया कि भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियां पाकिस्तान में लक्षित हत्याएं कर रही हैं और इस पर अमेरिका तथा कनाडा जैसे देशों की तरह कड़ा जवाब दिया जाना चाहिए. उन्होंने भारत को वैश्विक मंच पर अलग-थलग करने का भी आह्वान किया.
हाफ़िज़ नईम उर रहमान की पृष्ठभूमि और राजनीति में भागीदारी
हाफ़िज़ नईम उर रहमान पाकिस्तान के एक कट्टरपंथी मौलवी हैं और धार्मिक व राजनीतिक संगठन जमात-ए-इस्लामी के प्रमुख हैं. वह खुद को एक सामाजिक कार्यकर्ता, इंजीनियर और राजनीतिज्ञ के रूप में पेश करते हैं. हाल ही में उन्हें 2024-2029 के कार्यकाल के लिए जमात-ए-इस्लामी पाकिस्तान का अमीर चुना गया है.
नईम उर रहमान का जन्म पाकिस्तान के हैदराबाद शहर में एक उर्दू भाषी मुहाजिर परिवार में हुआ था. उन्होंने सिंध के हैदराबाद में जामिया मस्जिद दारुल उलूम में कुरान की तालीम ली और फिर सिविल इंजीनियरिंग में स्नातक की डिग्री प्राप्त की. इसके बाद उन्होंने इस्लामी इतिहास में मास्टर डिग्री भी हासिल की.
उनकी पत्नी एक डॉक्टर हैं, और उनके बच्चे भी राजनीति में सक्रिय हैं. हाफ़िज़ नईम उर रहमान ने औद्योगिक और आवासीय परियोजनाओं में जल उपचार इंजीनियर के रूप में 20 साल का अनुभव भी हासिल किया है.
क्या इस बयान से पाकिस्तान की राजनीति पर असर पड़ेगा?
पाकिस्तान में कट्टरपंथी नेताओं के इस प्रकार के बयान हमेशा से विवादों का कारण बनते हैं. हाफ़िज़ नईम उर रहमान के बयान ने एक बार फिर भारत और पाकिस्तान के रिश्तों को और तनावपूर्ण बना दिया है. हालांकि, यह भी देखा जाएगा कि पाकिस्तान की जनता और अन्य राजनीतिक दल इस बयान पर कैसी प्रतिक्रिया देते हैं.
इस बयानबाजी ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि कश्मीर के मुद्दे को लेकर पाकिस्तान के नेता और धार्मिक संगठन अपने हितों की पूर्ति के लिए कड़ा रुख अपनाते हैं. कश्मीर को लेकर इस प्रकार की बयानबाजी से न केवल अंतरराष्ट्रीय समुदाय में प्रतिक्रिया होती है, बल्कि यह पाकिस्तान के अंदर भी राजनीतिक उठापटक का कारण बन सकती है.
हाफ़िज़ नईम उर रहमान के विवादित बयान ने एक बार फिर भारत-पाकिस्तान रिश्तों को लेकर चर्चाओं का सिलसिला शुरू कर दिया है. पाकिस्तान में अपनी राजनीतिक पकड़ मजबूत करने के लिए ऐसे बयान आते रहते हैं, लेकिन क्या यह भविष्य में किसी बड़े संघर्ष या बदलाव की ओर ले जाएंगे, यह समय ही बताएगा. First Updated : Wednesday, 05 February 2025