नई दिल्ली: अमेरिका के राजनीतिक से इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप पर यौन शोषण का गंभीर आरोप लगाने वाली पूर्व कॉलम लेखिका ई. जीन कैरोल अब खुद कानूनी शिकंजे में फंसती नजर आ रही हैं. अमेरिकी न्याय विभाग ने कैरोल के खिलाफ एक जांच शुरू कर दी है. न्यूयॉर्क टाइम्स और सीएनएन की रिपोर्ट्स के अनुसार यह जांच इस बात पर केंद्रित है कि क्या कैरोल ने ट्रंप के खिलाफ दायर अपने पिछले दो सिविल मामलों के दौरान अदालत में झूठी गवाही दी थी.
क्या है झूठी गवाही का पूरा मामला?
2022 में मामले की सुनवाई के दौरान दिए गए एक बयान को इस जांच का मुख्य आधार बनाया गया है. उस समय 82 वर्षीय ई. जीन कैरोल ने अदालत के सामने शपथ लेकर कहा था कि उन्हें इस लड़ाई को लड़ने के लिए बाहर से कोई आर्थिक मदद नहीं मिल रही है. बाद में कानूनी दस्तावेजों से यह खुलासा हुआ कि लिंक्डइन के सह-संस्थापक और अरबपति व्यवसायी रीड हॉफमैन ने कैरोल की अदालती फीस और अन्य कानूनी खर्चों का एक बड़ा हिस्सा चुकाया था.
विरोधियों पर कार्रवाई को लेकर उठ रहे सवाल
इस नई आपराधिक जांच की कमान इलिनोइस के नॉर्दर्न डिस्ट्रिक्ट के संघीय अभियोजक एंड्रयू एस. बोट्रोस संभाल रहे हैं. इनकी नियुक्ति खुद डोनाल्ड ट्रंप ने की थी. अमेरिकी कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लैंच ने इस मामले से खुद को बिल्कुल अलग कर लिया है. वह पहले मामलों में ट्रंप के निजी वकील रह चुके हैं.
ट्रंप प्रशासन द्वारा अपने विरोधियों और आलोचकों के खिलाफ न्याय विभाग का इस्तेमाल करने के इस कदम की कानूनी विशेषज्ञ और विपक्षी नेता कड़ी आलोचना कर रहे हैं. उनका मानना है कि यह जांच पूरी तरह से राजनीति से प्रेरित है.
करोड़ों डॉलर के हर्जाने का विवाद
ई. जीन कैरोल ने आरोप लगाया था कि 1996 में न्यूयॉर्क के एक नामी डिपार्टमेंट स्टोर के ड्रेसिंग रूम में डोनाल्ड ट्रंप ने उनका यौन शोषण किया था. इस मामले में जूरी ने ट्रंप को दीवानी तौर पर जिम्मेदार ठहराया था. इसके बाद जब ट्रंप ने इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कैरोल को 'नॉट माई टाइप' कहा था.
कैरोल ने उन पर मानहानि का दूसरा मुकदमा ठोक दिया. अदालत ने ट्रंप को दोषी मानते हुए कैरोल को 8 करोड़ 33 लाख डॉलर का भारी-भरकम हर्जाना देने का आदेश दिया था, जिसे ट्रंप ने ऊपरी अदालत में चुनौती दी है. First Updated : Thursday, 28 May 2026