Delhi Blast: ब्लास्ट से पहले फरीदाबाद में मोबाइल की दुकान पर दिखा आतंकी डॉ. उमर, सीसीटीवी फुटेज आया सामने

नई सीसीटीवी फुटेज में लाल किले विस्फोट के आरोपी डॉ. उमर पहली बार स्पष्ट दिखे. वह फरीदाबाद की दुकान में दो मोबाइल लिए नजर आए. जांच में कट्टरपंथ, एनपीके उर्वरक खरीद, एन्क्रिप्टेड ऐप पर साजिश और कई सहयोगियों की भूमिका सामने आई.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः दिल्ली के लाल किले के पास हुए आत्मघाती विस्फोट की जांच में एक नई सीसीटीवी फुटेज सामने आई है, जिसने हमले को अंजाम देने वाले डॉ. उमर की अब तक की सबसे स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत की है. वीडियो में वह फरीदाबाद की एक मोबाइल दुकान में दिखते हैं, जहां उनका चेहरा पहली बार साफ नज़र आ रहा है. फुटेज में उमर एक बैग टांगे हुए और दो मोबाइल फोन संभालते हुए दुकान में प्रवेश करते हैं. उनके हाव-भाव से स्पष्ट है कि वह तनाव और घबराहट की स्थिति में थे.

मोबाइल फोन ने बढ़ाई टेंशन

वीडियो में देखा जा सकता है कि उमर अपने बैग से एक फोन निकालकर दुकानदार को चार्ज करने के लिए देता है, जबकि दूसरा मोबाइल उसकी गोद में रखा रहता है. इस दृश्य ने जांचकर्ताओं को चौंकाया, क्योंकि विस्फोट के बाद जब उसका शव मिला, तो घटनास्थल से कोई मोबाइल डिवाइस बरामद नहीं हुआ. इससे यह आशंका और गहरी हो गई कि उसने विस्फोट से पहले फोन कहीं छिपा दिया था या किसी साथी को सौंप दिया था.

हमले में इस्तेमाल की गई कार

अधिकारियों के अनुसार, हमले के दौरान उमर वही सफेद हुंडई i20 कार चला रहा था, जिसमें लाल किले के पास विस्फोट हुआ. इस धमाके में 13 लोगों की दर्दनाक मौत हो गई और 20 से अधिक लोग घायल हुए. 1989 में जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जन्मा उमर फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में डॉक्टर था और पहले अपने समुदाय में एक बुद्धिमान व होनहार चिकित्सक के रूप में जाना जाता था.

कट्टरपंथ की ओर झुकाव

जांच में सामने आया कि उमर जम्मू-कश्मीर के दो अन्य डॉक्टरों डॉ. मुजम्मिल और डॉ. शाहीन के संपर्क में था. दोनों को फरीदाबाद से पकड़े गए आतंकी मॉड्यूल के खुलासे के बाद हिरासत में लिया गया था, जिनके पास से 2,900 किलो विस्फोटक बरामद हुए थे. अधिकारियों के मुताबिक, उमर पिछले दो साल में कट्टरपंथी विचारधारा की ओर तेजी से झुक गया था और सोशल मीडिया पर कई उग्रवादी समूहों से जुड़ गया था.

एन्क्रिप्टेड प्लेटफॉर्म पर बनाई गई साजिश

जांचकर्ताओं ने पता लगाया कि उमर और उसके साथियों ने स्विट्जरलैंड आधारित एन्क्रिप्टेड ऐप ‘थ्रीमा’ का उपयोग योजना बनाने और संवाद के लिए किया था. इसके अलावा, उसने एक छोटा निजी सिग्नल समूह भी बनाया था, जिसमें ऑपरेशन से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी साझा की जाती थी. समूह ने कथित तौर पर 26 लाख रुपये से अधिक धन जुटाया, जो उमर को गतिविधियों को अंजाम देने के लिए दिया गया.

विस्फोटक सामग्री की खरीद 

पुलिस के अनुसार, इस पैसे से गुरुग्राम, नूंह और आस-पास के क्षेत्रों के आपूर्तिकर्ताओं से लगभग 3 लाख रुपये के करीब 26 क्विंटल एनपीके उर्वरक खरीदा गया. एनपीके में मौजूद रसायन, अन्य रसायनों के साथ मिलकर तात्कालिक विस्फोटक उपकरण (IED) बनाने के लिए उपयोग किए जा सकते हैं. सूत्रों के मुताबिक, करीब आठ संदिग्ध चार शहरों में एक साथ ब्लास्ट करने की तैयारी में थे और उनके समूह को जोड़ों में बांटा गया था.

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