रॉबर्ट वाड्रा को दिल्ली कोर्ट ने दी बड़ी राहत, शिकोहपुर लैंड डील केस में मिली जमानत

शिकोहपुर भूमि सौदा मामले में रॉबर्ट वाड्रा को अदालत से राहत मिल गई है. जमानत मिलने के बाद उन्होंने ईडी पर सवाल उठाए, जबकि एजेंसी ने जांच पूरी करने के लिए अदालत से अतिरिक्त समय की मांग की है.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: शिकोहपुर भूमि सौदा मामले में रॉबर्ट वाड्रा को बड़ी राहत मिली है. प्रवर्तन निदेशालय (ED) की जांच के बीच शनिवार को दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी. वाड्रा अदालत में पहले जारी किए गए समन के अनुपालन में पेश हुए थे. अदालत के इस फैसले को ईडी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है, क्योंकि एजेंसी इस मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच कर रही है.

मामले की सुनवाई विशेष न्यायाधीश सुशांत चांगोत्रा की अदालत में हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने वाड्रा को केवल जमानत बांड जमा करने का निर्देश दिया और कहा कि राहत देते समय कोई अतिरिक्त शर्त नहीं लगाई जा रही है. जज ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि फिलहाल अदालत केवल जमानत बांड चाहती है और इसके अलावा कोई दूसरी शर्त लागू नहीं की जाएगी. इसके बाद वाड्रा को औपचारिक रूप से जमानत मिल गई.

ईडी की चार्जशीट के बाद जारी हुआ था समन

यह मामला हरियाणा के गुरुग्राम स्थित शिकोहपुर गांव में जमीन खरीद-बिक्री से जुड़े कथित मनी लॉन्ड्रिंग केस से संबंधित है. ईडी ने इस मामले में अभियोजन शिकायत दाखिल की थी, जिसका अदालत ने संज्ञान लिया. इसके बाद रॉबर्ट वाड्रा समेत आठ अन्य लोगों को समन जारी किया गया था.

सुनवाई के दौरान ईडी की ओर से वकील जोहेब हुसैन ऑनलाइन जुड़े. उन्होंने अदालत को बताया कि एजेंसी अदालत के निर्देशों के अनुसार अपनी स्थिति रिपोर्ट दाखिल कर रही है. साथ ही उन्होंने आगे की जांच पूरी करने के लिए दो सप्ताह का अतिरिक्त समय भी मांगा. ईडी का कहना है कि मामले के कुछ पहलुओं की जांच अभी जारी है और विस्तृत रिपोर्ट तैयार करने के लिए समय की जरूरत है.

क्या है शिकोहपुर भूमि सौदा मामला?

यह पूरा मामला सितंबर 2018 में दर्ज हुई एक एफआईआर से जुड़ा है. आरोप है कि गुरुग्राम के शिकोहपुर गांव में लगभग 3.5 एकड़ जमीन के सौदे में अनियमितताएं हुई थीं. ईडी के मुताबिक, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी ने फरवरी 2008 में यह जमीन ओमकारेश्वर प्रॉपर्टीज नाम की कंपनी से करीब 7.5 करोड़ रुपये में खरीदी थी. बाद में यही जमीन रियल एस्टेट कंपनी DLF को लगभग 58 करोड़ रुपये में बेच दी गई. जांच एजेंसी को शक है कि इस सौदे से हुई कमाई का इस्तेमाल कथित मनी लॉन्ड्रिंग गतिविधियों में किया गया. इसी आधार पर ईडी ने वित्तीय लेन-देन की जांच शुरू की थी.

कई बड़े नाम भी आए थे सामने

ईडी द्वारा जुलाई 2025 में दाखिल अभियोजन शिकायत में रॉबर्ट वाड्रा के अलावा कई अन्य व्यक्तियों और संस्थाओं के नाम शामिल किए गए थे. इस मामले की मूल एफआईआर में हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और भूपिंदर सिंह हुड्डा के नाम भी शामिल थे. इसके अलावा एक प्रॉपर्टी डीलर और रियल एस्टेट कंपनी पर भी आरोप लगाए गए थे. केस में भ्रष्टाचार, धोखाधड़ी और जालसाजी जैसे गंभीर आरोप शामिल हैं.

जमानत के बाद ईडी पर बरसे रॉबर्ट वाड्रा

अदालत से बाहर आने के बाद रॉबर्ट वाड्रा ने मीडिया से बातचीत में ईडी पर निशाना साधा. उन्होंने कहा कि उन्हें देश की न्यायिक व्यवस्था पर पूरा भरोसा है, लेकिन ईडी सरकार के इशारों पर काम कर रही है. वाड्रा ने कहा कि वह जांच में पूरा सहयोग करेंगे और अदालत में हमेशा मौजूद रहेंगे. 

उन्होंने कहा कि उनके पास छिपाने के लिए कुछ भी नहीं है और वह किसी भी तरह से डरने वाले नहीं हैं. उन्होंने यह भी कहा कि अगर उनका परिवार राजनीतिक रूप से मजबूत हो रहा है और जनता का समर्थन मिल रहा है, तो स्वाभाविक रूप से उन्हें ऐसे मामलों का सामना करना पड़ेगा. हालांकि, उन्होंने खुद को पूरी तरह निडर बताया. 

अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 जुलाई तय की है. उम्मीद की जा रही है कि तब तक ईडी अपनी विस्तृत स्थिति रिपोर्ट अदालत में पेश करेगी. फिलहाल जांच जारी है और इस मामले पर राजनीतिक और कानूनी नजरें बनी हुई हैं.

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