देश पर मौसम का डबल अटैक! अल-नीनो से कई राज्यों में बिगड़ सकते हैं हालात

पश्चिमी और मध्य भारत के राज्यों पर अल नीनो का असर पड़ने की संभावना है. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी जून और जुलाई के दौरान कम बारिश होने का अनुमान है.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: मौसम विभाग ने इस साल मॉनसून के जल्दी आने का अनुमान लगाया है. पूर्वानुमानों के मुताबिक, मॉनसून एक बार फिर केरल में जल्दी दस्तक देगा और 26 मई के आस-पास राज्य में प्रवेश करेगा. आम तौर पर, मॉनसून 1 जून के आस-पास भारत के दक्षिणी छोर पर पहुंचता है. अगर यह पूर्वानुमान सही साबित होता है, तो यह लगातार तीसरा साल होगा जब मॉनसून तय समय से पहले आया है. पिछले साल, मॉनसून 27 मई को केरल पहुंचा था और 2024 में यह 31 मई को आया था. इस बार मौसम विभाग ने अल नीनो के असर के कारण कई इलाकों में कम बारिश और सूखे जैसी स्थिति पैदा होने की आशंका भी जताई है.

सुपर अल नीनो का असर

मौसम विभाग ने चेतावनी दी है कि 'सुपर अल नीनो' के असर से इस साल कई इलाकों में सूखे जैसी स्थिति पैदा हो सकती है. यह ध्यान देने वाली बात है कि अल नीनो की स्थिति तब बनती है जब समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है. यह घटना वैश्विक जल चक्र के पैटर्न को बिगाड़ देती है, जिसके परिणामस्वरूप बारिश कम होती है. नतीजतन, मॉनसून के कमजोर पड़ने से अक्सर सूखे जैसी स्थितियां पैदा हो जाती हैं.

 किन हिस्सों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा?

मौसम विभाग ने बताया है कि इस साल बारिश में 35 प्रतिशत तक की कमी होने का अनुमान है. रिपोर्टों के मुताबिक उत्तरी, पश्चिमी और मध्य भारत के राज्यों पर अल नीनो का असर पड़ने की संभावना है. पंजाब, हरियाणा और राजस्थान में भी जून और जुलाई के दौरान कम बारिश होने का अनुमान है. अगस्त और सितंबर में अच्छी बारिश होने की उम्मीद है. इसके अलावा मध्य प्रदेश के इंदौर और ग्वालियर जैसे इलाकों में भी सामान्य से कम बारिश होने का पूर्वानुमान है. साथ ही तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश तक फैले एक बड़े इलाके पर भी असर पड़ने की उम्मीद है. ऐसी परिस्थितियों में बारिश का स्तर विनाशकारी हो सकता है.

अल-नीनो की वजह से हो सकता है बड़ा संकट 

मौसम वैज्ञानिकों का कहना है कि भूमध्यरेखीय प्रशांत क्षेत्र में इस समय मौजूद कमजोर ला नीना जैसी स्थितियां अब ' ईएनएसओ -तटस्थ' स्थितियों में बदल रही हैं. 'मॉनसून मिशन क्लाइमेट फोरकास्ट सिस्टम' (MMCFS) इस मौसम के दौरान 'अल नीनो' के विकसित होने की संभावना का संकेत देता है.

ऐसी स्थितियां बनने की संभावना

हिंद महासागर में 'न्यूट्रल इंडियन ओशन डाइपोल' (IOD) की स्थितियां मौजूद हैं. नवीनतम जलवायु मॉडलों के पूर्वानुमान भी यह संकेत देते हैं कि मौसम के अंत तक 'पॉजिटिव आईओडी' स्थितियां विकसित होने की संभावना है. 'पॉजिटिव आईओडी' आमतौर पर मॉनसून के लिए अनुकूल होता है.

समुद्र की तापमान बढ़ने की संभावना

इसके कारण पश्चिमी हिंद महासागर में समुद्र की सतह का तापमान बढ़ जाता है. बदले में, इससे उपमहाद्वीप की ओर नमी का प्रवाह बढ़ जाता है. इसका परिणाम अक्सर सामान्य से अधिक वर्षा के रूप में सामने आता है. इसके अलावा पिछले तीन महीनों जनवरी से मार्च 2026 के दौरान उत्तरी गोलार्ध में हिमपात की मात्रा सामान्य से थोड़ी कम रही.

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