पेट्रोल-डीजल की मार से परेशान डिलीवरी एजेंट, ईंधन कीमतों के खिलाफ आज गिग वर्कर्स की हड़ताल

पेट्रोल और डीजल की बढ़ती कीमतों के बीच गिग वर्कर्स ने बड़ा विरोध प्रदर्शन शुरू करने का फैसला लिया है. डिलीवरी और कैब सेवाओं से जुड़े लाखों कामगार बढ़ते खर्च और कम कमाई को लेकर नाराज नजर आ रहे हैं.

Shraddha Mishra

नई दिल्ली: देशभर में बढ़ती पेट्रोल और डीजल की कीमतों का असर अब ऑनलाइन डिलीवरी और कैब सेवाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. ईंधन महंगा होने से परेशान गिग वर्कर्स ने आज विरोध प्रदर्शन का ऐलान किया है. इसका असर Zomato, Swiggy, Blinkit, Zepto, Ola, Uber और Rapido जैसी ऐप आधारित सेवाओं पर पड़ सकता है. यूनियन ने पांच घंटे तक सेवाएं बंद रखने की घोषणा की है और कंपनियों से प्रति किलोमीटर भुगतान बढ़ाने की मांग की है. हाल ही में देश में पेट्रोल और डीजल की कीमतों में लगभग चार साल बाद बड़ी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. 

रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईंधन के दाम करीब 3 रुपये प्रति लीटर तक बढ़े हैं. दिल्ली में पेट्रोल की कीमत लगभग 97.77 रुपये प्रति लीटर और डीजल की कीमत करीब 90.67 रुपये प्रति लीटर पहुंच चुकी है. गिग एंड प्लेटफॉर्म सर्विस वर्कर्स यूनियन (GIPSWU) का कहना है कि बढ़ती ईंधन कीमतों ने लाखों डिलीवरी एजेंट और ड्राइवरों की कमाई पर सीधा असर डाला है. यूनियन के अनुसार, देश में करीब 1.2 करोड़ लोग ऐसे हैं जो रोजमर्रा की कमाई के लिए बाइक और स्कूटर पर निर्भर हैं. ऐसे में पेट्रोल-डीजल महंगा होने से उनका खर्च लगातार बढ़ता जा रहा है.

आज पांच घंटे बंद रहेंगी कई सेवाएं

यूनियन ने विरोध के तौर पर दोपहर 12 बजे से शाम 5 बजे तक ऐप आधारित सेवाओं को बंद रखने का फैसला किया है. उनका कहना है कि अगर प्रति किलोमीटर भुगतान नहीं बढ़ाया गया तो काम करना और मुश्किल हो जाएगा. यूनियन की अध्यक्ष सीमा सिंह ने कहा कि डिलीवरी कर्मी पहले ही महंगाई, गर्मी और लंबे काम के घंटों से परेशान हैं. ऐसे में ईंधन की बढ़ती कीमतें उनके लिए बड़ा आर्थिक बोझ बन गई हैं. उन्होंने सरकार और कंपनियों से मांग की है कि कम से कम 20 रुपये प्रति किलोमीटर की न्यूनतम दर तय की जाए.

महिला गिग वर्कर्स पर ज्यादा असर

यूनियन का दावा है कि महिला गिग वर्कर्स और डिलीवरी एजेंट इस संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं. कई महिलाएं रोजाना 10 से 14 घंटे तक ट्रैफिक और खराब मौसम में काम करती हैं, लेकिन उनकी कमाई उसी अनुपात में नहीं बढ़ रही. यूनियन ने चेतावनी दी है कि अगर जल्द राहत नहीं दी गई तो कई कामगार इस क्षेत्र को छोड़ने के लिए मजबूर हो सकते हैं. उनका कहना है कि बढ़ते ईंधन और वाहन रखरखाव खर्च के मुकाबले इंसेंटिव और डिलीवरी शुल्क में पर्याप्त बदलाव नहीं किए गए हैं.

गिग इकोनॉमी तेजी से बढ़ रही, लेकिन चुनौतियां भी बढ़ीं

रिपोर्ट्स के मुताबिक, भारत में गिग इकोनॉमी लगातार विस्तार कर रही है. नीति आयोग के अनुमान बताते हैं कि 2020-21 में देश में लगभग 77 लाख गिग वर्कर्स थे, जबकि 2029-30 तक यह संख्या बढ़कर 2.3 करोड़ से ज्यादा हो सकती है. हालांकि, यूनियन का कहना है कि कंपनियां बढ़ते परिचालन खर्च के बावजूद डिलीवरी शुल्क और प्रोत्साहन राशि में जरूरी बदलाव नहीं कर रही हैं. इससे कामगारों की आर्थिक स्थिति कमजोर होती जा रही है.

सरकार और कंपनियों को सौंपा गया ज्ञापन

गिग वर्कर्स यूनियन ने सरकार और प्रमुख डिजिटल प्लेटफॉर्म कंपनियों को ज्ञापन सौंपकर डिलीवरी दरों में संशोधन और ईंधन मुआवजे की मांग की है. यूनियन ने कहा है कि उनका विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहेगा और इसका उद्देश्य गिग वर्कर्स की बढ़ती परेशानियों की ओर सरकार और कंपनियों का ध्यान आकर्षित करना है. हड़ताल के चलते कई शहरों में फूड डिलीवरी और कैब सेवाओं पर असर पड़ने की संभावना जताई जा रही है.

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