मां सरस्वती की होगी घर वापसी! भोजशाला पर हाईकोर्ट का फैसला, लंदन में कैद मूर्ति को वापस लाने का दिया इशारा
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने भोजशाला को मां सरस्वती का प्राचीन मंदिर घोषित कर दिया है. यह केस अयोध्या-काशी से अलग है क्योंकि यह जगह 1909 से ASI के संरक्षण में है और ASI सर्वे में मंदिर के मजबूत सबूत मिले हैं.

भोपाल: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने हाल ही में भोजशाला को मां सरस्वती का मंदिर घोषित कर दिया है. इस फैसले के बाद भोजशाला एक बार फिर चर्चा में है, लेकिन यह केस अयोध्या, काशी या मथुरा से काफी अलग है. साथ ही, यहां मां सरस्वती की प्राचीन मूर्ति का एक रोचक रहस्य भी जुड़ा हुआ है जो धार से लंदन तक फैला है.
भोजशाला का इतिहास
भोजशाला मध्य प्रदेश के धार जिले में स्थित है. यह जगह 11वीं शताब्दी में परमार राजवंश के महान राजा भोज की राजधानी थी. राजा भोज विद्वान, कला प्रेमी और लेखक थे. उन्होंने भोजशाला को संस्कृत शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनाया था.
यहां मां वाग्देवी (सरस्वती) का मंदिर भी था, जहां छात्र पढ़ाई शुरू करने से पहले देवी की पूजा करते थे. 14वीं-15वीं शताब्दी में आक्रमणकारियों ने इसे तोड़ दिया और कमाल मौला मस्जिद बना दी.
अयोध्या-काशी से क्यों अलग है केस?
यह केस अन्य विवादों से अलग है क्योंकि भोजशाला 1909 से ही ASI (पुरातत्व सर्वेक्षण) के संरक्षण में है. जबकि 1902 से ही विवाद शुरू हो चुका था. 2003 से मंगलवार को हिंदुओं और शुक्रवार को मुसलमानों को पूजा-नमाज की अनुमति थी. ASI के वैज्ञानिक सर्वे में हिंदू देवी-देवताओं की आकृतियां, संस्कृत शिलालेख और हवन कुंड मिले. हाईकोर्ट ने इन्हीं सबूतों के आधार पर इसे मंदिर माना है.
मां सरस्वती की मूर्ति का रहस्य
राजा भोज ने भोजशाला में मां सरस्वती की खूबसूरत मूर्ति स्थापित की थी. आक्रमण के बाद यह मूर्ति गायब हो गई. 1961 में प्रसिद्ध पुरातत्वविद डॉ. विष्णु श्रीधर वाकणकर लंदन गए. ब्रिटिश म्यूजियम में उन्होंने एक मूर्ति देखी जो 1875 में मेजर किंकेड द्वारा धार के महल खंडहर से ले जाई गई थी.
डॉ. वाकणकर ने राजा भोज की किताब ‘समरांगण सूत्रधार’ (मंदिर निर्माण की विद्या) के साथ मूर्ति की शैली, मुद्रा, आभूषण और शिलालेख मिलाए. सब प्रमाण मेल खाते थे. उन्होंने साबित किया कि यह वही मूर्ति है जो राजा भोज ने भोजशाला में स्थापित की थी.
हाईकोर्ट का सरकार को संदेश
हाईकोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा है कि ब्रिटेन से इस मूर्ति को वापस लाने की कोशिश तेज की जाए. भले ही केस सुप्रीम कोर्ट जाए, लेकिन मां सरस्वती की मूर्ति का मुद्दा विवाद से ऊपर है. यह धार की सांस्कृतिक धरोहर है. जब यह मूर्ति वापस आएगी और अपने मूल स्थान पर स्थापित होगी, तब भोजशाला का असली इतिहास पूरा होगा.


