दिल्ली की बसों में खत्म होंगे ‘पिंक टिकट’, जुलाई से महिलाओं को करना होगा स्मार्ट कार्ड का इस्तेमाल
दिल्ली में महिलाओं के मुफ्त बस सफर का तरीका अब बदलने जा रहा है. पिंक टिकट की जगह जल्द ही पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड अनिवार्य होगा. मार्च से अब तक 6 लाख से ज्यादा महिलाएं कार्ड बनवा चुकी हैं, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में इसका इस्तेमाल शुरू नहीं हुआ है.

नई दिल्ली: राजधानी की डीटीसी और क्लस्टर बसों में मुफ्त सफर करने वाली महिलाओं के लिए बड़ा बदलाव होने जा रहा है. राजधानी में लंबे समय से चल रही ‘पिंक टिकट’ व्यवस्था अब बंद होने वाली है. दिल्ली सरकार ने फैसला लिया है कि 1 जुलाई 2026 से महिलाओं को मुफ्त बस यात्रा के लिए केवल ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ का इस्तेमाल करना होगा.
सरकार का उद्देश्य मुफ्त यात्रा व्यवस्था को पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी बनाना है. नई व्यवस्था लागू होने के बाद महिलाओं को बस में चढ़ते समय अपने पिंक कार्ड को मशीन पर टैप करना होगा, जिससे उनकी यात्रा का रिकॉर्ड डिजिटल तरीके से दर्ज हो सकेगा.
कब शुरू हुई थी ‘पिंक टिकट’ योजना?
महिलाओं के लिए मुफ्त बस यात्रा की सुविधा साल 2019 में शुरू की गई थी. उस समय दिल्ली सरकार ने ‘पिंक टिकट’ व्यवस्था लागू की थी, जिसके जरिए महिलाएं डीटीसी और क्लस्टर बसों में बिना किराया दिए सफर कर रही थीं.
अब सरकार इस व्यवस्था को खत्म कर ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ सिस्टम लागू करने जा रही है. यह कार्ड केंद्र सरकार की ‘वन नेशन, वन कार्ड’ योजना से भी जुड़ा हुआ है. इस पहल की शुरुआत राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 2 मार्च को की थी.
मेट्रो में भी कर सकेंगी इस्तेमाल
‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ का इस्तेमाल सिर्फ बसों तक सीमित नहीं रहेगा. महिलाएं इस कार्ड का उपयोग दिल्ली मेट्रो में भी कर सकेंगी, हालांकि मेट्रो यात्रा के लिए कार्ड को रिचार्ज कराना जरूरी होगा. सरकार का मानना है कि इस डिजिटल सिस्टम से यात्रा संबंधी डेटा अधिक सटीक तरीके से दर्ज किया जा सकेगा और सब्सिडी व्यवस्था में पारदर्शिता आएगी.
अब तक इतनी महिलाओं ने बनवाया कार्ड
मार्च से अब तक करीब 6 लाख महिलाएं दिल्ली के 58 केंद्रों से पिंक सहेली कार्ड बनवा चुकी हैं. हालांकि अभी भी ज्यादातर महिलाएं पुरानी ‘पिंक टिकट’ व्यवस्था का ही इस्तेमाल कर रही हैं. दिल्ली में रोजाना करीब 10 लाख महिलाएं डीटीसी और क्लस्टर बसों में सफर करती हैं, लेकिन इनमें से केवल 5 से 6 प्रतिशत महिलाएं ही यात्रा के दौरान कार्ड को मशीन पर टैप कर रही हैं.
अभी क्यों कम हो रहा इस्तेमाल?
परिवहन विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार अभी दोनों व्यवस्थाएं साथ-साथ चल रही हैं, इसलिए महिलाएं पिंक टिकट पर ज्यादा निर्भर हैं. हालांकि सरकार का कहना है कि जब पिंक कार्ड अनिवार्य हो जाएगा, तब धीरे-धीरे महिलाएं डिजिटल सिस्टम अपनाने लगेंगी. फिलहाल गर्मी के कारण इस नियम को लेकर सख्ती नहीं की गई है, लेकिन आने वाले हफ्तों में बस डिपो और अन्य जगहों पर जागरूकता अभियान चलाया जाएगा.
कौन बनवा सकता है पिंक सहेली कार्ड?
यह सुविधा सिर्फ दिल्ली में रहने वाली महिलाओं के लिए उपलब्ध होगी. कार्ड बनवाने के लिए दिल्ली का आधार कार्ड होना जरूरी है. इसके अलावा आधार से लिंक सक्रिय मोबाइल नंबर भी अनिवार्य होगा. 12 वर्ष या उससे अधिक उम्र की कोई भी महिला इस कार्ड के लिए आवेदन कर सकती है.
कहां बनवा सकते हैं कार्ड?
महिलाएं ‘पिंक सहेली स्मार्ट कार्ड’ इन जगहों से बनवा सकती हैं:
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डीटीसी डिपो और पास सेक्शन
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एसडीएम कार्यालय
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50 से अधिक विशेष केंद्र
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स्मार्ट कार्ड से बढ़ेगी पारदर्शिता
परिवहन विभाग का कहना है कि स्मार्ट कार्ड सिस्टम लागू होने से पिंक टिकट के गलत इस्तेमाल पर रोक लगेगी. साथ ही सरकार को यह जानने में मदद मिलेगी कि किस रूट पर कितनी महिलाएं सफर कर रही हैं. दिल्ली सरकार ने बजट 2026-27 में महिलाओं की मुफ्त यात्रा योजना के लिए 450 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है.
जल्द होगा सर्वे
डीटीसी जल्द ही बसों में एक सर्वे शुरू करने जा रही है. इसके जरिए यह समझने की कोशिश की जाएगी कि महिलाएं अभी भी पिंक कार्ड की बजाय पुरानी टिकट व्यवस्था को क्यों प्राथमिकता दे रही हैं. इसके साथ ही यह भी जांचा जाएगा कि बस कंडक्टर महिलाओं को कार्ड टैप करने के लिए प्रोत्साहित कर रहे हैं या नहीं.


