Somnath Amrit Mahotsav: प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ में की विशेष कुंभाभिषेक, जानिए आज का अगला प्लान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचकर सोमनाथ अमृत महोत्सव में शामिल हुए . इस दौरान उन्होंने ध्वजारोहण और विशेष कुंभाभिषेक किया.

Sonee Srivastav

सोमनाथ: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज गुजरात के सोमनाथ मंदिर पहुंचकर सोमनाथ अमृत महोत्सव में शामिल हुए . इस दौरान उन्होंने ध्वजारोहण और विशेष कुंभाभिषेक किया. सोमनाथ अमृत महोत्सव, जो मंदिर के पुनर्निर्माण के 75 वर्ष पूरे होने का खास अवसर पर मनाया जा रहा है. 

75 वर्ष पूरे होने का उत्सव

सोमनाथ मंदिर भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में पहला और सबसे महत्वपूर्ण ज्योतिर्लिंग माना जाता है. इसके पुनर्निर्माण को 75 साल पूरे होने पर ‘सोमनाथ अमृत महोत्सव’ मनाया जा रहा है. इस मौके पर देशभर से भक्तों की बड़ी संख्या पहुंच रही है. मंदिर को खूबसूरती से सजाया गया है.

समारोह में विशेष कुंभाभिषेक होगा 

समारोह में देश के 11 पवित्र तीर्थ स्थलों से लाए गए पवित्र जल से विशेष कुंभाभिषेक किया गया. इसके अलावा पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ ध्वजारोहण समारोह भी हुआ. गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने कल देर रात मंदिर पहुंचकर तैयारियों का जायजा लिया और पूजा-अर्चना की.

पीएम मोदी टिकट और सिक्का करेंगे जारी 

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेंगे. वे सोमनाथ मंदिर की समृद्ध विरासत को समर्पित स्मारक डाक टिकट और स्मारक सिक्का जारी करेंगे. भारी भीड़ और प्रधानमंत्री के कार्यक्रम को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद की गई है. 

प्रधानमंत्री का आज का पूरा शेड्यूल

08:30 AM- जामनगर से सोमनाथ प्रस्थान
10:00 AM- सोमनाथ आगमन और रोड शो
10:15 AM- मंदिर में पूजन, कुंभाभिषेक और एयर शो...
12:00 PM- सोमनाथ में जनसभा
01:00 - 03:30 PM- सर्किट हाउस में आराम
05:00 PM- वडोदरा में सरदार धाम का लोकार्पण और जनसभा
07:00 PM- वडोदरा में रोड शो और फिर दिल्ली वापसी.

सोमनाथ मंदिर का पौराणिक इतिहास

श्री सोमनाथ महादेव को आदि ज्योतिर्लिंग कहा जाता है. पौराणिक कथाओं के अनुसार, चंद्रमा ने यहां भगवान शिव की घोर तपस्या की थी. दक्ष प्रजापति के श्राप से पीड़ित चंद्रमा की प्रार्थना से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें आशीर्वाद दिया. मान्यता है कि पहले चंद्रमा ने सोने का, फिर रावण ने चांदी का और बाद में भगवान श्रीकृष्ण ने चंदन की लकड़ी से मंदिर का निर्माण कराया था. 

भगवान कृष्ण का संबंध

सोमनाथ क्षेत्र भगवान श्रीकृष्ण की निजधाम लीला से भी जुड़ा है. भालका तीर्थ वह स्थान है जहां एक शिकारी के तीर से भगवान कृष्ण को चोट लगी थी. इसके बाद वे हिरन, कपिला और सरस्वती नदियों के संगम पर पहुंचे और यहां से उन्होंने अपनी दिव्य देह त्यागकर निजधाम की यात्रा की.

इस कारण यह स्थान लाखों श्रद्धालुओं के लिए बेहद पवित्र माना जाता है. यह अमृत महोत्सव सोमनाथ मंदिर की आस्था और भारत की सनातन परंपरा को नई ऊर्जा देगा.

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