लोकतंत्र की जीत हुई, धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद बोले CJP संस्थापक अभिजीत दिपके, जंतर-मंतर पर झूम उठे प्रदर्शनकारी

NEET पेपर लीक विवाद को लेकर हफ्तों से जारी छात्रों के आंदोलन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया. खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और CJP ने इसे छात्रों की बड़ी जीत बताया.

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नई दिल्ली: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने अपना इस्तीफा दे दिया है, जिसके बाद दिल्ली के जंतर-मंतर पर उत्सव का माहौल बन गया. इस्तीफे की खबर सामने आते ही जंतर-मंतर पर मौजूद प्रदर्शनकारी और समर्थक खुशी से झूम उठे. कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने इसे लोकतंत्र की जीत बताया. इसके साथ ही दिपके ने इसका श्रेय उन छात्रों को दिया, जिन्होंने हफ्तों तक नीट पेपर लीक विवाद को लेकर विरोध किया. 

मुख्य मंच से दिपके ने हजारों समर्थकों को संबोधित करते हुए कहा कि शिक्षा मंत्री का इस्तीफा सबुत है कि निरंतर और शांतिपूर्ण विरोध प्रदर्शन से परिवर्तन लाया जा सकता है. भीड़ की तालियों के बीच दिपके ने इस आंदोलन को देशभर के विद्यार्थियों की सामूहिक इच्छाशक्ति और लोकतांत्रिक मूल्यों की जीत बताया.

दिया भावुक संदेश

भाषण के दौरान दिपके ने उन छात्रों का भी जिक्र किया जिन्होंने NEET पेपर लीक विवाद के बाद आत्महत्या कर ली. उन्होंने प्रदर्शनकारियों से उनकी याद में दो मिनट का मौन रखने का आग्रह किया. 

बता दें कि प्रधान का इस्तीफा केंद्र और मुख्य न्यायाधीश के बीच निर्धारित तीसरे दौर की बातचीत से कुछ ही घंटे पहले आया.  इस बीच प्रदर्शनकारी बार-बार यह कहते रहे कि मंत्री की बर्खास्तगी उनकी "गैर-समझौता योग्य" मांग है. बता दें हाल के दिनों में NEET-UG परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने के आरोप ने देशभर में भारी रोष पैदा कर दिया था.

प्रधान ने कही ये बात 

अपने विदाई पत्र और सार्वजनिक बयानों में प्रधान ने कहा कि उन्होंने शुरू से ही पूरी जिम्मेदारी स्वीकार की और हालात से कभी पल्ला नहीं झाड़ा. उन्होंने यह भी कहा कि वे किसी मेधावी छात्र की प्रतिभा को किसी "परीक्षा माफिया" या अन्य ताकतों द्वारा बर्बाद नहीं होने देंगे. इस्तीफे के पीछे उनका दावा था कि यह कदम छात्रों के भविष्य की रक्षा और यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया कि विरोध का गलत इस्तेमाल "राष्ट्रविरोधी" तत्व न कर सकें.

प्रधान का यह कदम मोदी सरकार में एक वरिष्ठ मंत्री द्वारा प्रतिस्पर्धी परीक्षाओं में अनियमितताओं के चलते पद छोड़ने के रूप में दुर्लभ उदाहरण माना जा रहा है. पिछले कुछ दिनों के घटनाक्रम और लगातार जनता के दबाव ने इस फैसले को आकार दिया है. इस फैसले ने यह संदेश भी दिया कि जब सामाजिक असंतोष व्यापक हो और छात्रों जैसा संवेदनशील वर्ग सड़कों पर उतर आए, तो उससे राजनीतिक पदाधिकारी प्रभावित हो सकते हैं. First Updated : Saturday, 25 July 2026